जागरूकता की कमी के कारण देश में बढ़ता जालसाज़ी का कारोबार - Nazariya Now

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Tuesday, May 2, 2017

जागरूकता की कमी के कारण देश में बढ़ता जालसाज़ी का कारोबार

कुछ समय पहले एक मोबाइल कंपनी मात्र 251 रू. में स्मार्टफोन देने का दावा करके रातों रात चर्चा का विषय बन जाती है। प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया, सोशल मीडिया से लेकर आम जनता तक हर कहीं उस मोबाइल की ही चर्चा होती है। कंपनी इसे दुनिया का सबसे सस्ता स्मार्टफोन होने के दावे के साथ इसके विज्ञापन जारी करती है। कंपनी इसे डिजिटल इंडिया कैंपेन का हिस्सा बताकर प्रचारित करती है और इसे अपनी वेबसाईट पर बिक्री के लिए (251+40 रूपये शिपिंग चार्ज के साथ) उपलब्ध करवाती है। मात्र 251 रूपये में स्मार्टफोन मिलने की ख़बर सुनते ही लोग बुकिंग के लिए टूट पड़ते हैं। लोग इस स्मार्टफोन को ख़रीदने के लिए इतने बेताब हो जाते हैं कंपनी की वेबसाईट पर एक साथ इतना ज़्यादा ट्रेफिक हो जाता है जिसकी वजह से सिर्फ एक घण्टे में ही वेबसाईट क्रेश हो जाती है। लोग बुकिंग करके फोन आने के इंतेज़ार में लग जाते हैं। एक साल बीतने के बाद भी देश में किसी को फोन डिलिवर नहीं हुआ। FREEDOM 251 का विज्ञापन आने के कुछ समय के बाद एक और कंपनी मात्र 888 रूपये में स्मार्टफोन देने का विज्ञापन जारी करके पूरे देश में चर्चा में आ जाती है। FREEDOM 251 की डिलेवरी न मिलने से निराश लोग अब इस कंपनी से सस्ता स्मार्टफोन मिलने उम्मीद लगा लेते हैं और इस फोन की बुकिंग भी शुरू हो जाती है। लोग बढ़ी उम्मीद के साथ फोन की बुकिंग कर लेते हैं। लेकिन इस कंपनी का स्मार्टफोन भी FREEDOM 251 की तरह किसी को नहीं मिलता है। ऐसी ही एक और कंपनी NAMOTEL  नाम से मात्र 99 रूपये में स्मार्टफोन देने का दावा करके फोन की आनलाईन बुकिंग करती है लेकिन यहां भी वही होता है जो पिछली दो कंपनियों के दावे का हुआ। देश में आज तक किसी को फोन डिलीवर नहीं हुआ। ये तीन उदाहरण मात्र हैं वरना देश में न जाने कितनी कंपनियां अलग-अलग प्रोडक्ट के ज़रिये लोगों को झूठे सपने दिखाकर बेवकूफ बनाती होंगी और कई बार तो लोगों की मेहनत का पैसा खाकर भाग जाती हैं।
    इस तरह की घटनाओं के कई कारण है। एक कारण तो सरकार की लापरवाही है जो इस तरह की कंपनियों पर कोई कार्यवाही नहीं करती। ठीक प्रकार से जाँच पड़ताल करे बिना ही उन्हें अपना प्रोडक्ट मार्केट में लांच करने का लायसेंस भी आसानी से मिल जाता है। दूसरा कारण है लोगों में जागरूकता की कमी होना, लोग बिना सोचे-समझे विज्ञापनों पर यक़ीन कर लेते हैं और अपना समय और पैसा दोनों बर्बाद कर लेते हैं। एक कारण लोगों के मन में बसा लालच भी है लोग फ्री और सस्ती चीज़ को लेने के लिए अतिउत्साहित हो जाते हैं और बिना सोचे समझे बिना किसी जांच पड़ताल के ऐसी चीज़ों पर यक़ीन करके धोखे में फंस जाते है। 

              लोगों में जागरूकता की कमी और लालच के कारण जालसाज़ों ने कई तरह के तरिके बना लिये हैं इनमें से कुछ तरीके जो सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया जाते हैं वो लोगों  को फोन, मैसेज, ईमेल के द्वारा बताया जाता है कि किसी तरह के लकी ड्रा में उनकी कोई बढ़ी रकम या किसी गाड़ी का इनाम निकला है और उन्हें किसी नंबर पर संपर्क करने के लिए कहा जाता है और संपर्क करने पर किसी बैंक खाते में प्रोसेसिंग या रजिस्ट्रेशन चार्ज के नाम पैसे जमा करने को कहा जाता है। लोग गाड़ी या पैसा मिलने के लालच में बिना सोचे समझे बताये गये खाते में पैसा जमा कर देते हैं। पैसा जमा करने के बाद जिस नंबर पर उन्होंने संपर्क किया था वो नंबर बंद बताता है और जब लोगों की समझ में आता है कि उनके साथ जालसाज़ी की गई है लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है वो अपनी मेहनत की कमाई गवां चुके होते हैं। कुछ लोग किसी तरह की स्कीम के बारे में बताकर कुछ महीने या साल में पैसा दौगुना करने का लालच देकर भी लोगों की मेहनत की कमाई लूट लेते हैं। 
 
 


        जालसाज़ों ने टेक्नालाॅजी के बढ़ते इस्तेमाल का भी पूरा फायदा उठाते हुए जालसाज़ी करना शुरू कर दी है। जालसाज़  ख़ुद को बैंक अधिकारी/कर्मचारी बताकर फोन करते हैं। फोन पर लोगों से उनके डेबिट/क्रेडिट कार्ड, बैंक खाते की डिटेल वैरिफिकेशन या अन्य किसी बहाने से लेकर खाते से पैसा निकाल लेते हैं। यहां भी कारण वही है जागरूकता की कमी अकसर इन जालसाज़ों का शिकार अधिकतर अनपढ़ या कम पढ़े लिखे लोग होते हैं, शिक्षा और जागरूकता की कमी के चलते ये लोग जालसाज़ों की बातों में आसानी से फंस जाते हैं, लेकिन कई बार तो उच्च शिक्षित लोग भी भी इनकी बातों में आकर जालसाज़ी का शिकार बन जाते हैं।
 
         इन जालसाज़ों से बचने का एक ही सबसे कारगर तरीक़ा है जागरूक बनना, बिना किसी जांच पड़ताल के किसी भी कंपनी/व्यक्ति की बातों पर यक़ीन न करना। किसी तरह के इनाम या सस्ती या  फ्री में मिलने वाली चीज़ के लालच में न आना।  अपने डेबिट/क्रेडिट कार्ड, बैंक खाते की डिटेल किसी भी व्यक्ति को न देना चाहे डिटेल मांगने वाला खु़द को बैंक अधिकारी/कर्मचारी ही क्यों न बताये। बैंक कभी भी किसी ग्राहक से किसी भी तरह की डिटेल फोन पर नहीं मांगते हैं। लोगों को यह समझना ज़रूरी है कि बैंक को फोन पर डिटेल मांगने की ज़रूरत ही नहीं होती है क्योंकि ग्राहक की पूरी जानकारी बैंक रिकार्ड में दर्ज होती है, फिर बैंक फोन पर जानकारी क्यों लेगी। बैंक की और से स्पष्ट निर्देश होता है कि किसी को भी अपने बैंक खाते से संबंधित जानकारी न दें। अगर कभी बैंक को ग्राहक से कोई जानकारी लेना या किसी तरह का काम होता है तो बैंक द्वारा ग्राहक के रजिस्टर्ड फोन नं. / ईमेल पर मैसेज/मेल करके बैंक ब्रान्च में संपर्क करने के लिए कहा जाता है। इसलिए कभी किसी व्यक्ति/संस्था की बातों पर बिना पूरी जांच पड़ताल के यक़ीन न करें। अगर कोई व्यक्ति बैंक अधिकरी/कर्मचारी के नाम से फोन करके जानकारी मांगे या किसी तरह के इनाम का लालच देकर पैसों की मांग करे तो उसकी जानकारी फौरन पुलिस को दें। किसी तरह के इनाम या सस्ती चीज़ के लालच में न आयें। खु़द जागरूक बने और लोगों को भी जागरूक बनायें। न खु़द किसी तरह की जालसाज़ी का शिकार हों और दूसरों को भी शिकार होने से बचायें। जागरूक बने सुरक्षित रहें।

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