उपभोक्ता एवं उपभोक्ता अधिकार - Nazariya Now

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Sunday, May 28, 2017

उपभोक्ता एवं उपभोक्ता अधिकार

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986
उपभोक्ता के प्रति न्याय होना संविधान मे बताये गये समाजिक एवं आर्थिक न्याय का ही एक मत्वपूर्ण अंग है इसका अर्थ यहॉ पर यह है कि उपभोक्ताआें को सामानो और सेवाओ की प्राप्ति उचित दर पर होती रहे , तथा ऐसा करने मे सामान की गुणवत्ता , वजन और उत्तमता मे किसी प्रकार का समझौता नही किया जा सकता है विशेषकर जब यह घरेलू खपत के लिए बनायी गयी होती ।

एक समय यही उपभोक्ता बाजार का शंहशाह होता था परन्तु आज उनकी स्थिति बाजार के एक शिकार के रूप मे हो गयी है । ऐसा भी देखा गया है कि उपभोक्ता की अज्ञानता ही बाजार मे उसका शोषित होने का कारण है। अतः आज यह आवश्यकता समय कि मांग है कि उपभोक्ता की उनके अधिकारो के विषय मे शिक्षित किया जाये एवं उन्हे उन साधनो के विषय मे जानकारी दी जाये, जिसके माध्यम से वह अपने अधिकारो को लागू करवा सके ।उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 एक विस्ततृ अधिनियम का उदाहरण है, जो उपभोक्ताआें के छः प्रमुख अधिकारों को पहचानता है जैसे : -
1.    सुरक्षा  का  अधिकार    
2.    सूचना  प्राप्त  करने  का  अधिकार
3     चयन  करने का अधिकार    
4.    सुने  जाने  का  अधिकार
5.    उपचारां  को प्राप्त  करने  का अधिकार
6.    उपभोक्ता - शिक्षा  प्राप्त  करने  का अधिकार ।

 फिर भी, लक्ष्य अभी कुछ दूर पर दिखाई दे रहा है और समाज प्रत्येक वर्ग द्वारा उपभोक्ताआें के संरक्षण सम्बंधी कार्यक्रमों के ऊपर विभिन्न दृष्टिकोण कार्यवाही किये जाने कि आवश्यकता को स्वीकारता है, क्यांकि आमतौर पर उसे वस्तुओं के गुणो के ऊपर उनके वजन और मूल्य के ऊपर तथा विभिन्न सेवाओं कि उपलब्धी के संबंध में बेवकूफ बनाया जाता है। स्कूलां व मीडिया (समाचार-पत्र, रेडियो, टी वी) के माध्यम से उपभोक्ता शिक्षा को प्रथम वरियता प्रदान कि जानी चाहिये और वर्तमान मे जो स्वयंसेवी संस्थायें इस दिशा मे काम कर रही है उन्हे मजबूत बनाया जाना चाहिये। यही नही अपितू उन्हे पर्याप्त प्रोत्साहन व प्रेरणा देना चाहिये जिसे कि वह और अच्छी तरह से उपभोक्ताओं की समस्याओं के ऊपर अपना ध्यान रखें। आज यही आवश्यकता नही है कि उपभोक्ताआें को केवल यह बताया जाये कि किस प्रकार से उनका शोषण हो रहा है अपितु उन्हें स्वयं ही संगठित होकर रहने कि शिक्षा दी जाये जिसे कि वह अपने शोषण कर सफल प्रतिरोध कर सके ।इस विषय मे उपभोक्ता संक्षरण अधिनियम 1986 एक मुख्य कानून है इसे उपभोक्ताआें के अधिकारो कि प्रोत्साहन तथा देने के सुरक्षित उद्देश्य से बनाया गया है।  यह सरल शीघ्र एवं बिना खर्च कि एक ऐसी व्यवसायी को साकार रूप देता है जिससे उपभोक्ताआें की शिकायतों को दूर किया जा सकता है इसकी प्रकृति मुआवज़ा प्रदृत्त है अर्थात उपभोक्ताओं को उनके कष्टों के लिये यहां क्षतिपूर्ति का भी प्रावधान है ।

1. सुरक्षा का अधिकार : सुरक्षा के अधिकार से सरल शब्दों में यही अर्थ है ऐसी वस्तुओं को बाजार में लाने से सुरक्षा प्रदान की जाय जो कि सम्पत्ति जीवन के लिए हानिकारक होती हैं। यह एक निरोधक अधिकार है जो कि वस्तुओं की गुणवत्ता एव सुरक्षा से संबंधित है। यह एक जागरूक रहने का अधिकार है। इसलिए उपभोक्ता को वस्तुओं या सेवाओं की खरीद फरोख्त में स्वयं सावधानी बरतनी चाहिए। उसे ऐसी वस्तुओं की खरीददारी नहीं करनी चाहिए जो भारतीय मानक संस्थान (आई.एस.आई.) या ‘‘एगमार्क’’ के मानक वाले न हों। यदि उनके ऊपर गुणवत्ता का कोई चिन्ह नहीं दर्शाया गया है तो उसे दुकानदार से उस वस्तु की गुणवत्ता के सम्बंध में जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।

2. सूचना प्राप्त करने का अधिकार : उपभोक्ता को यह अधिकार है कि वह वस्तुओं की गुणवत्ता, वजन, शक्ति शुद्धता, मानक एवं मूल्य से सम्बंध में सभी सूचनायें प्राप्त करें। जिससे कि वह स्वयं को अनुचित व्यापारिक व्यवसाय के प्रचलन से बचा सके।

3. चुनने का अधिकार : इसका तात्पर्य विभिन्न प्रकार की वस्तुओं एवं उनके प्रतियोगी मूल्यों के पास जाने एवं जाँच-परख करने से है। इस प्रकार के अधिकार का उपयोग एक प्रतियोगली बाजार में अच्छी प्रकार से हो सकता है।

4. सुनवाई का अधिकार : यदि किसी उपभोक्ता के हितों के विपरीत कोई बात होती है तो उसे वह उपयुक्त मंचों के समक्ष सुनवाई के लिए प्रस्तुत कर सकता है। इस अधिकार के तहत वह अपनी शिकायत जिला मंच, राज्य आयोग तथा राष्ट्रीय आयोग में दर्ज कराके अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है।
 
5. दुःखों के उपचार का अधिकार : उपभोक्ता को यह अधिकार है कि वह अनुचित व्यापारिक व्यवसाय एवं विवेकहीन उपभोक्ता शोषण से उत्पन्न अपने दुखों का उपचार प्राप्त कर सके। पहले उपाय के रूप में दुःखी या क्षतिगत उपभोक्ता अपनी बात को आहत पहुँचाने वाले व्यक्ति के पास ले जाता है। यदि वहाँ उसके दुःखों का कोई उपचार नहीं प्राप्त होते हैं तो वह उस मुद्दे को अपने क्षेत्र के उपभोक्ता-संघ या केन्द्र अथवा राज्य सरकार (जैसी परिस्थिति हो) एक शिकायत डिस्ट्रिक-फोरम (जिला वाद स्थल) में दाखिल कर सकते हैं।

6. उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार : इस अधिकार के अतंर्गत उपभोक्ता को उन सभी बातों की जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है जो एक उपभोक्ता के लिए आवष्यक हो। यह उपभोक्ता के हित एवं जागरूकता के लिए जरूरी है।

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