देशभक्ति के मायने - Nazariya Now

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Tuesday, May 16, 2017

देशभक्ति के मायने

देशभक्ति क्या है ? देशभक्ति का पैमाना क्या है ? सच्चा देशभक्त कौन है ? वर्तमान में ये कुछ सवाल हैं जिनके जवाब अलग अलग लोगों की लिए अलग अलग हैं।  कुछ लोग स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त), गत्रतंत्र दिवस (26 जनवरी ) पर प्रोफाइल में तिरंगा लगाकर और सोशल मीडिया पर देशभक्ति वाली पोस्ट लिखकर खुद को सच्चा देशभक्त मानकर ज़िम्मेदारी पूरी समझते हैं।  पिछले कुछ सालों में भारत में देशभक्ति के मायने काफी बदल गए हैं, देशभक्ति का पैमाना भी बदल गया है।  वर्तमान में देशभक्ति का मतलब एक राजनैतिक पार्टी से जोड़ा जाने लगा है । जो उस राजनैतिक पार्टी का समर्थन करे केवल वही देशभक्त माना जाने लगा है।  जो उस पार्टी की आलोचना करे उसे उसे देशद्रोही कहा जाने लगा है।  2014 के चुनाव के समय एक नेता का कहना था की जो उनकी पार्टी को वोट नहीं देगा उसे पाकिस्तान भेज देना चाहिए।  हाल ही में मध्य प्रदेश के एक नेता  ने बयान दिया की जो लोग उनकी पार्टी को वोट नहीं वो देते पाकिस्तानी हैं।  क्या सिर्फ किसी राजनैतिक पार्टी का समर्थक होना ही देशभक्ति है ? संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक ( 18 साल की आयु वाले) को वोटिंग  का अधिकार दिया है। मतदान मतदाता को संविधान द्वारा दिया मौलिक अधिकार है, मतदाता की अपनी मर्ज़ी है वो जिस उम्मीदवार / राजनैतिक पार्टी को वोट करे।  राजनैतिक पार्टी / उम्मीदवार केवल अपने पक्ष में वोटिंग के लिए मतदाता से अपील कर सकते हैं।  कोई भी व्यक्ति या राजनैतिक पार्टी को अधिकार नहीं की वो मतदाता पर किसी भी तरह का दबाव बनाकर या किसी तरह का लालच देकर अपने पक्ष में वोट करने के लिए कहे। अगर कोई ऐसा करता है तो वो न केवल मतदाता को संविधान  में दिए मौलिक अधिकार के विरुद्ध होगा बल्कि चुनाव आदर्श अचार संहिता का उलंघन भी होगा।  
देश की आज़ादी के लिए देश के हर वर्ग, समाज,  धर्म के लोगों ने मिलजुलकर अंग्रेज़ों से संघर्ष किया।  हज़ारों स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। अंग्रेज़ों के शासन के समय देश के हर व्यक्ति का एक ही सपना था आज़ाद भारत।  एक ऐसा भारत जहाँ सब समान होंगे, जहाँ किसी के साथ धर्म, जाति, क्षेत्र, भाषा के आधार पर भेदभाव नहीं होगा।  हर व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा होगी, किसी के साथ कोई अन्याय नहीं होगा।  इस अपने को साकार करने के लिए हज़ारों लोगों ने अपनी क़ुर्बानी दी।  यही लोग सच्चे देशभक्त थे जिन्होंने  देश के लिए अपनी जान क़ुर्बान  कर दी, हँसते हँसते फांसी के फंदे को गले लगा लिया।  इसी तरह हमारे देश के सैनिक दिन -रात चाहे कंपकपा देने वाली सर्दी हो, तपा देने वाली धुप या तूफानी बारिश हर वक़्त देश की रक्षा के लिए सीमा पर मुस्तैद हैं।  अपने घर परिवार से दूर सिर्फ देश के लिए शहीद हो जाते हैं। ये भी सच्चे देशभक्त हैं।    



देश की आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता  सेनानी और बॉर्डर पर  देश की रक्षा के लिए मौजूद सैनिक तो यक़ीनन  देशभक्त हैं लेकिन देश की आम जनता के लिए देशभक्ति का पैमाना क्या है ? देश की आम जनता के लिए देशभक्ति के सही मायने क्या हैं।  मेरे विचार में कुछ काम हैं जिन्हें करके सही मायनो में हम खुद को देशभक्त मान सकते हैं।   हर वो व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म, जाति, समाज, क्षेत्र का हो वो सच्चा देशभक्त है जो देश के संविधान में विश्वास रखता है, देश के कानून का पालन करता है, चुनाव में बिना किसी डर और लालच के मतदान करता है, किसी के साथ धर्म, जाति, समाज, क्षेत्र के आधार पर भेदभाव नहीं करता है, सभी के साथ भाईचारे से रहता है,  अपने ऊपर निर्धारित सभी कर ( Income Tax, Sales Tax, Property, Tax, Service Tax etc.) पूरी ईमानदारी से देता हैं, बिजली चोरी नहीं करता, किसी के साथ अन्याय नहीं करता, रिश्वत नहीं लेता और न ही रिश्वत देता है, देश की सेना के महत्त्व को समझता है उसका सम्मान करता है, पर्यारवरण को नुकसान नहीं पहुंचता, देश की सम्पति को नुकसान नहीं पंहुचाता, खुद को देश का ज़िम्मेदार नागरिक मानकर देश के हित में सोचता है। यही लोग सच्चे देशभक्त हैं।  चाहे ये किसी   किसी भी धर्म, जाति, समाज, क्षेत्र के हों, किसी भी राजनैतिक पार्टी को वोट देते हों ये बात मायने नहीं रखती।  देशभक्ति को धर्म, जाति, क्षेत्र  या राजनैतिक सोच के आधार पर परिभाषित नहीं किया जा सकता।  देशभक्ति एक भावना है उसका राजनीतिकरण करना बिलकुल गलत और संविधान विरोधी है। 

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