सैनिकों की शहादत पर होती राजनीति - Nazariya Now

HIGHLIGHTS

Thursday, May 18, 2017

सैनिकों की शहादत पर होती राजनीति

 देश में सैनिकों की शहादत की घटनायें लगातार बढ़ती जा रही हैं।  कभी पकिस्तान के कायराना हमले, कभी आतंकवादी हमले में तो कभी नक्सली हमलों  में लगातार सैनिक शहीद हो रहे हैं।  सरकार और राजनैतिक पार्टियां इस मुद्दे पर भी राजनीति करते नज़र आ रहे हैं।  कभी सैनिकों की शहादत पर आंसूं बहाने वाली, एक सर के बदले दस सर लाने की बात करने वाली पार्टी सैनिकों की शहादत पर सिर्फ निंदा करके अपनी ज़िम्मेदारी से बच रही है।  आखिर कब तक हमारे सैनिक शहीद होते रहेंगे ? क्यों सरकार पकिस्तान के खिलाफ कोई ठोस क़दम नहीं उठाती ? देश की सेना में हिम्मत और हौसले की कोई कमी नहीं है, हमारी सेना के इरादे पहाड़ से ज़्यादा मज़बूत हैं, लेकिन सरकार ने सेना के हाथ बांध रखे हैं।  सरकार सिर्फ निंदा करके और मुआवजा देकर अपनी ज़िम्मेदारी पूरी क्यों समझ लेती है।  सैनिक के खून की एक एक बूँद अनमोल होती।  जब एक सैनिक शहीद होता है तो पूरा देश उस सैनिक और उसके परिवार का ऋणी बन जाता है।  सारी दुनिया की दौलत से भी वो ऋण उतारा नहीं जा सकता।  लेकिन सरकार और राजनैतिक पार्टियां उस सैनिक की शहादत पर भी राजनीति करने से बाज़ नहीं आती और मीडिया भी टीआरपी के लिए शहीदों पर हो रही राजनीति की ख़बरों को बढ़ावा देता है।  कौनसा मंत्री/राजनेता शहीद के परिवार से मिलने गया, किसने क्या बयान दिया, कौनसी सरकार के कार्यकाल में कितने सैनिक शहीद हुए स्टूडियो में बैठकर इसकी तुलना की जाती है।  



पिछले साल भारतीय सेना ने पकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक का सफल ऑपरेशन किया।  ये पूरी तरह से सेना द्वारा किया गया ऑपरेशन था।  इसका पूरा श्रेय सेना को मिलना चाहिए था, लेकिन यहाँ भी सरकार और राजनैतिक पार्टियां अपनी अपनी राजनैतिक रोटियां सकती नज़र आए।  देश में जगह जगह प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री के फोटो वाले होर्डिंग/पोस्टर लगाए गए, इसे प्रधानमंत्री और सरकार की उपलब्धि के तौर पर दिखाया गया, इन होर्डिंग / पोस्टर में  सर्जिकल स्ट्राइक का पूरा श्रेय सरकार को दिया गया।  अन्य कुछ राजनैतिक पार्टियों ने सर्जिकल स्ट्राइक के सबूतों की मांग करके सरकार को घेरने की कोशिश की और यह सिर्फ अपने राजनैतिक फायदे के लिए किया गया।

जो सैनिक देश की रक्षा की खातिर अपना घर परिवार छोड़कर सरहद पर मुस्तैदी के साथ अपना फ़र्ज़ निभा रहा है, खून जमा देनी वाली सर्दी हो, तपा देने वाली धुप हो या फिर तूफानी बारिश हर पल सैनिक सरहद पर देश की रक्षा के लिए डटे हुए हैं। उन सैनिकों नाम पर भी राजनैतिक पार्टियां अपनी राजनीति कर रही हैं।  जिस सैनिक का पूरा देश क़र्ज़दार है उस सैनिक और उसके परिवार को सुविधा के नाम पर क्या दिया जा रहा ? एक सैनिक ने ख़राब खाने की शिकायत की तो उसकी शिकायत सुनकर उसका समाधान करने के बजाय उस सैनिक को सेना से बर्खास्त कर दिया जाता है।  हाल ही में उत्तर प्रदेश के एक शहीद सैनिक के परिवार से मुख्यमंत्री का मिलने का प्रोग्राम था, मुख्यमंत्री के पहुँचने से पहले प्रशासन ने सैनिक के घर में सोफे, कालीन  और अन्य सामान रखवा दिए और मुख्यमंत्री के वहां से जाने के फ़ौरन बाद वो सारे सामान हटवा लिए गए।  क्या ये शहीद सैनिक और उसके परिवार का अपमान नहीं है ? 

आखिर कब तक सरकार और राजनैतिक पार्टियां सेना के नाम पर राजनीति करते रहेंगे ? क्यों सरकार और राजनैतिक पार्टियां इस मुद्दे पर एकजुट होकर इसका समाधान निकालने की बात नहीं करते। सिर्फ निंदा के तीर चलाने से काम नहीं चलेगा सरकार को कड़े क़दम उठाने होंगे। पकिस्तान के खिलाफ ठोस नीति बनाने की ज़रूरत है।  इसके साथ ही सैनिकों और उनके परिवारों के लिए नयी नीति बनानी होगी, सैनिकों की शिकायतों पर ध्यान देकर उनका समाधान निकलना होगा, सैनिकों को को मिलने वाले खाने और अन्य चीज़ों की गुणवत्ता को बढ़ाना होगा।  शहीद हुए सैनिकों के परिवार को सम्मान के साथ विशेष सुविधायें उपलब्ध कराना  होंगी।  सैनिक देश का गौरव हैं उनको और उनके परिवार को सम्मान देना सरकार और देश के हर नागरिक की ज़िम्मेदारी है।  

© Nazariya Now

No comments:

Post a Comment