काश देश में ऐसी शर्मनाक घटना फिर न हो - - Nazariya Now

HIGHLIGHTS

Saturday, May 6, 2017

काश देश में ऐसी शर्मनाक घटना फिर न हो -

16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में हुई मानवता को शर्मसार करने वाली घटना में ज़ुल्म का शिकार निर्भया को इन्साफ मिल ही गया।  5 मई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनते हुए आरोपियों को हाईकोर्ट से मिली मौत की सजा को बरक़रार रखा है। इस केस में 6 आरोपी थे जिनमे से एक आरोपी रामसिंह ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी।  अन्य आरोपी मुकेश सिंह (बस क्लीनर), पवन गुप्ता, विनय शर्मा, अक्षय ठाकुर तिहाड़ जेल में है और एक आरोपी को नाबालिग होने का कारण फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट ने तीन साल के लिए बाल सुधार केंद्र में भेजा था जहाँ से वो दिसंबर 205 में सजा पूरी करके रिहा हो चूका है। 



निर्भया गैंग रैप की घटना ने पुरे देश में एक भूचाल ला दिया था।  पुरे देश में ही नहीं विदेशों में भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया हुई।  इस घटना के बाद से देशभर में आंदोलन के द्वारा महिला के के साथ अपराध पर सख़्त कानून की मांग होने लगी।  नया यौन उत्पीड़न क़ानून लागू किया गया जिसमे आरोप लगने के साथ ही गिरफ़्तारी का प्रावधान किया गया।  आरोपियों को मौत की सज़ा बरक़रार रखने का सुप्रीम कोर्ट  फैसला प्रशंसनीय है।  इस फैसले के असर से महिलाओं के साथ ऐसी शर्मसार हरकतों को अंजाम देने वालों को एक कड़ा सन्देश मिला है।  आरोपियों को बिलकुल भी बक्शा नहीं जायेगा।  इस फैसले के बाद कुछ हद तक इस तरह के अपराधों में कमी होगी। इससे पहले 14 अगस्त 2014 को 14 को लड़की से रैप और हत्या  आरोपी धनंजय चटर्जी को फांसी दी गई थी। 

निर्भया केस शुरआत से न्याय मिलने तक तारीख दर तारीख़ :  

16 दिसंबर 2012: चलती बस में सामूहिक बलात्कार और क्रूरता
17 दिसंबर 2012: चार आरोपियों, राम सिंह, मुकेश, विनय शर्मा, पवन गुप्ता की शिनाख़्त
18 दिसंबर 2012: चारों आरोपी गिरफ़्तार
21 दिसंबर 2012: पांचवां नाबालिग आरोपी आनंद विहार बस अड्डे से पकड़ा गया
22 दिसंबर 2012: छठा आरोपी अक्षय ठाकुर औरंगाबाद से गिरफ़्तार
26 दिसंबर 2012: निर्भया को इलाज के लिए सिंगापुर भेजा गया
29 दिसंबर 2012: निर्भया की सिंगापुर में मौत
3 जनवरी 2013:  फास्ट ट्रैक कोर्ट में पांच आरोपियों के ख़िलाफ़ चार्जशीट
28 फरवरी 2013: जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में नाबालिग पर आरोप तय
11 मार्च 2013: मुख्य आरोपी राम सिंह ने ख़ुदकुशी की
31 अगस्त 2013: नाबालिग़ आरोपी दोषी क़रार दिया गया
10 सितंबर 2013: चारों आरोपी दोषी क़रार दिए गए
13 सितंबर 2013: चारों आरोपियों को फांसी की सज़ा
7 अक्टूबर 2013: चारों आरोपियों ने दिल्ली हाइकोर्ट में की अपील
13 मार्च 2014: हाइकोर्ट ने मौत की सज़ा बरक़रार रखी
15 मार्च 2014: चारों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की
20 दिसंबर 2015: नाबालिग तीन साल बाद बाहर
27 मार्च 2017: सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुरक्षित रखा
5 मई 2017 : सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के मौत की सजा के फैसले को बरक़रार रखा 

हमारे देश में महिला को देवी का दर्जा दिया है लेकिन दुःख की बात है की महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में पिछले कुछ समय में लगातार बढ़ोतरी हुई है।  6 -7 साल की मासूम बच्ची से लेकर 60 - 70 की बुज़ुर्ग महिला के साथ भी ऐसी शर्मसार घटनायें होती रहती हैं।  गांव में घूँघट में रहने वाली महिला से लेकर मेट्रो सिटी में जॉब करने वाली महिला भी सुरक्षित नहीं है।  आखिर कब तक ऐसी घटनायें होती रहेंगी ? क्या सिर्फ सख्त कनूर बना देने से ही इन घटनाओं पर लगाम लगाई जा सकती है ? सिर्फ कानून बना देने से ही काम नहीं चलेगा उस  कानून  का सही से पालन होना भी ज़रूरी है।  बहुत से घटनाओं में आरोपी इतने प्रभावशाली होते हैं की उनके खिलाफ पुलिस में एफ आई आर  भी दर्ज नहीं हो पाती।  कई बार आरोपी महिला को जान से मरने का डर बताकर उसे  एफ आई आर  दर्ज करवाने से रोक देते हैं। आसाराम का केस एक उदाहरण है न जाने वो कब से और कितनी मासूम लड़कियों के साथ रैप किया होगा लेकिन उसके प्रभाव के कारण किसी ने पुलिस में एफ.आई.आर  दर्ज कराने  की हिम्मत ही नहीं की।  एक लड़की ने हिम्मत की और आज आसाराम वो जेल की सलाखों के पीछे है। उस लड़की की हिम्मत की प्रशंसा करनी होगी बिना डरे उसने बहुत हिम्मत का काम किया वरना और न जाने कितनी मासूम लड़कियों को अपनी हवस का शिकार बनाता। 


महिलाओं को अपने खिलाफ होने वाले छोटे से छोटे अपराध के खिलाफ बिना डरे आवाज़ उठानी होगी।  अगर कोई छेड़खानी करे या किसी तरह की गलत टिपण्णी करे तो बिना डरे खुलकर उसका विरोध करें।  पुरुषों को भी अपनी मानसिकता बदलने की ज़रूरत है, महिलाओं का सम्मान करें, अगर कही किसी महिला के साथ कोई छेड़खानी या कोई गलत टिपण्णी की  जा रही है तो उसका विरोध करें, छेड़खानी करने वाले को सबक सिखायें। बच्चों को अच्छे संस्कार दे उन्हें महिलाओं को सम्मान देना सिखायें।  


सरकार को चाहिए की महिलाओं की सुरक्षा के लिए उन्हें आत्मरक्षा की ट्रेनिंग दी जाये।  सरकार एक लक्ष्य निर्धारित करे की देश की हर महिला को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग मिले उसके लिए स्कूल कॉलेज में लड़कियों को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग देने के लिए ट्रेनर की नियुक्ति करे   इसके साथ ही हर मोहल्ले में 3 - 4 ऐसी टीमें बनाई जाएँ जो महिलाओं और लड़कियों को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग दे ताकि किसी तरह की खतरे के वक़्त वो अपनी रक्षा कर सके।  

एक निर्भया को तो इन्साफ मिल गया लेकिन देश में ऐसी बहुत निर्भया होंगी जिन्हे इन्साफ नहीं मिल पाया है।  सरकार और समाज  ज़िम्मेदारी समझे ताकि फिर देश में ऐसी शर्मनाक घटना न हो।   

No comments:

Post a Comment