भारत में जीका वायरस की पुष्टि। क्या है जीका वायरस ? और उससे कैसे बचा जा सकता है ? - Nazariya Now

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Tuesday, May 30, 2017

भारत में जीका वायरस की पुष्टि। क्या है जीका वायरस ? और उससे कैसे बचा जा सकता है ?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मच्छर से फैलने वाले खतरनाक जीका वायरस के लिए भारत सहित कई देशों के लिए अलर्ट जारी किया है। डब्ल्यूएचओ ने एक आपातकालीन टीम का गठन किया है। इस वायरस को भारत के लिए भी खतरनाक बताया जा रहा है।  विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक गर्भवती महिला समेत तीन लोगों में जीका वायरस के मामलों की पुष्टि की है।  ये मामले गुजरात के अहमदाबाद से सामने आए हैं, जो देश में पहला मामला है. सभी मामले शहर के बापूनगर इलाके से रिपोर्ट हुए हैं।  डब्ल्यूएचओ ने एक वक्तव्य में कहा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय- भारत सरकार ने गुजरात के अहमदाबाद जिले के बापूनगर क्षेत्र में जीका वायरस से बीमारी के प्रयोगशाला में पुष्ट तीन मामलों की जानकारी दी है.' हालांकि, डब्ल्यूएचओ ने मौजूदा उपलब्ध सूचना के आधार पर भारत के लिए किसी यात्रा या व्यापार पाबंदी की अनुशंसा नहीं की है। 


क्या है जीका वायरस ?
यह एक प्रकार का वायरस है, जो एडीज एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्ट्स नाम की मादा मच्छरों के काटने से फैलता है। ये डेंगू और चिकनगुनिया फैलाने वाले एडीज मच्छरों की प्रजातियां हैं। मानव शरीर में प्रवेश के बाद यह वायरस अपनी संख्या बढ़ाने के लिए मानव कोशिकाओं का इस्तेमाल करता है। जिका विषाणु Flaviviridae विषाणु परिवार से है। जो दिन के समय सक्रिय रहते हैं। इन्सानों में यह मामूली बीमारी के रूप में जाना जाता है, जिसे जिका बुखार, जिका या जिका बीमारी कहते हैं। 1947  के दशक से इस बीमारी का पता चला। यह अफ्रीका से एशिया तक फैला हुआ है। यह 2014 में प्रशांत महासागर से फ्रेंच पॉलीनेशिया तक और उसके बाद 2015 में यह मेक्सिको, मध्य अमेरिका तक भी पहुँच गया।

जीका वायरस के लक्षण 
जीका वायरस के लक्षण डेंगू बुखार की ही तरह होते हैं।अधिकांश मामलों (60 - 80 %) में कोई लक्षण नहीं दिखते, यदि कुछ लक्षण दिखते हैं तो वे लक्षण अमूमन इस प्रकार के हो सकते हैं - बुखार, लाल आँखें, जोड़ों में दर्द, सिरदर्द लाल चकत्ते।  आम तौर पर लक्षण हल्के और 7 दिनों से भी कम रहते हैं। यह मरीज़ नर्वस सिस्टम पर हमला करता है। जिसकी वजह से सांस लेने में दिक्कत या कमजोरी महसूस हो सकती है।  संक्रमण के शरीर में प्रवेश करने के 24 घंटे के अंतराल में वायरस का असर होता है असर पहले आंखों पर दिखने लगता है, जिसमें आंखे लाल हो जाती है और पानी गिरने लगता है।

जीका वायरस कैसे फैलता है ? 
ज़ीका  वायरस प्रमुख रूप से एडीज प्रकार के मच्छर के काटने से फैलता है। शारीरिक संबंध बनाने और खून चढ़ाने से भी इसके फैलने की संभावना रहती है। यह रोग गर्भवती माँ से गर्भस्थ शिशु में जा सकता है वर्टिकली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन और शिशु के सिर के अपूर्ण विकास की वजह बन सकता है। इस रोग की पहचान के लिए होने वाली जाँचों में रक्त, मूत्र या लार संबंधी परीक्षण शामिल हैं, जो बीमार व्यक्ति में इस वायरस के आरएनए के होने का पता लगाने के लिए की जाती हैं। 

जीका वायरस से बचाव 
जीका वायरस के लिए अभी तक कोई वैक्सीन नहीं बनी है।  जीका वायरस से बचने की लिए मच्छरों से बचाव बहुत ज़रूरी है।  जिन क्षेत्रों में इस रोग के होने की संभावना है वहाँ मच्छरों द्वारा काटे जाने से बचा जा सके।  मच्छर भगाने वाले उपाय अमल में लाना, कपड़ों से शरीर का अधिकतम भाग ढँककर रखना, मच्छरदानी का प्रयोग, मच्छर पुनर्जनन रोकने हेतु ठहरे पानी को हटाना जैसी बातें शामिल होती हैं। ब्राजील के स्वास्थ्य अधिकारियों ने 2015 में प्रकोप के कारण गर्भवती महिलाओं को जीका वायरस से प्रभावित इलाकों में यात्रा करने से बचने की सलाह दी थी।  

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा भारत में जीका के पहले मामले की पुष्टि के बाद केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय अन्य राज्यों के लिए भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। अंतराज्यीय वाहनों और एअरपोर्ट पर विशेष स्कैनिंग की जा रही है। किसी भी संभावित मरीज के पाए जाने पर सीधे एअरपोर्ट से केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय मच्छर जनित रोग बचाव विभाग को सूचित करने के लिए कहा गया है। 

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