दलित की दावत (कहानी) - Nazariya Now

HIGHLIGHTS

Wednesday, July 26, 2017

दलित की दावत (कहानी)

गाँव में सुबह से ही काफी चहल पहल थी।  आज मंत्री जी गाँव के दलित बबलू के यहाँ रात्रि  भोजन के लिए आ रहे हैं पूरे गाँव में यही चर्चा का विषय था।  मंत्री जी के समर्थक पूरे गाँव में मंत्री जी की महानता का ढिंढोरा पीटते फिर रहे हैं।  बबलू थोड़ा घबराया हुआ है, वो सोच रहा है क्या मंत्री जी वाक़ई उसके साथ भोजन करेंगे, और वो मंत्री जी के लिए शाही खाने का इंतज़ाम कैसे करेगा ? गाँव के सरपंच जी ने जब बबलू को बताया की उसे खाने के इंतज़ाम की फ़िक्र करने की ज़रूरत नहीं मंत्री जी के समर्थकों ने सारा इंतज़ाम कर लिया है।  गाँव के लोग यह सोचकर खुश हैं की मंत्री जी गाँव में आकर गाँव की समस्याओं को देखेंगे तो उसके लिए ज़रूर कुछ न कुछ करेंगे वो बबलू को समझा रहे हैं की उसे गाँव की कौन कौनसी प्रमुख समस्याएं मंत्री जी के सामने रखना है।  


थोड़ी देर बाद गाँव की अधकच्ची सड़क पर हिचकोले खाती एक कार चली आ रही है उसके पीछे पीछे एक मिनी ट्रक भी चल रहा है।  कार और ट्रक बबलू के घर के सामने आकर रुक गए हैं।  कार में से दो लोग उतारते हैं जो देखने में और हावभाव से बड़े अधिकारी लग रहे हैं।  उन्हें देखकर बबलू फ़ौरन हाथ जोड़कर खड़ा हो जाता है।  उनमे से एक अधिकारी सवाल करते हैं ''बबलू तुम्हारा नाम है ?'' बबलू जवाब में कहता है ''जी हुज़ूर मेरा ही नाम है'' दोनों अधिकारी बबलू को ऊपर से नीचे तक घूरकर देखते हैं और पीछे घूमकर ट्रक वाले से कहते हैं ''सामान उतारो'' ट्रक वाला और साथ आये लोग ट्रक से सामान उतारने लगते हैं।  ट्रक में से सोफा, कालीन, कूलर, फ्रिज, कुर्सियां, फ्रिज, इन्वर्टर आदि उतारकर बबलू के घर के सामने रखने लगते हैं।  गाँव के कुछ लोग भी वहां इकठ्ठे हो गए हैं।  दोनों अधिकारी आपस में बात करने में मसरूफ हैं, बबलू हैरानी से उन्हें देख रहा है वो अधिकारियों से कुछ भी पूछने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है, जैसे तैसे हिम्मत करके पूछता है ''हुज़ूर ये सब सामान यहाँ क्यों रखा जा रहा है ?''  एक अधिकारी बोलते हैं ''अरे भाई तुम्हारे घर मंत्री जी भोजन के लिए आने वाले हैं, उनके आने से पहले सब इंतेज़ाम करना पड़ता है'' बबलू पूछता है ''क्या ये सब मेरे घर के लिए हैं ?'' अधिकारी कहते हैं ''हाँ तुम्हारे घर में ही ले जाकर सारा सामान जमा दो, थोड़ी देर में इलेक्ट्रिशन आएगा वो इन्वर्टर स्टार्ट कर देगा'' इतना कहकर दोनों अधिकारी चले जाते हैं।  बबलू गाँव के कुछ लोगों और ट्रक से आये  साथ मिलकर सारा सामान घर में ज़माने लगता है।  बबलू और उसकी पत्नी सारा सामान देखकर बहुत खुश हैं, उन्होंने तो सपने में भी नहीं सोचा की ऐसी चीज़ें कभी उनके घर में होंगी, उनकी 5 साल की बेटी भी घर में नई चीज़ें देखकर खुश हो रही है।  

शाम तक सारा सामान जमाया जा चूका है, इलेक्ट्रिशन ने इन्वर्टर भी स्टार्ट कर दिया है, बबलू के घर के आसपास काफी रौशनी की गई है।  स्थानीय नेताओं ने मंत्री जी के स्वागत की पूरी तैयारी कर रखी है। विभिन्न न्यूज़ चैनल और अखबारों के जर्नालिस्ट भी गाँव पहुँच गए हैं।  सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात है, मंत्री जी के निजी सुरक्षाकर्मी भी पहुँच चुके हैं ।  थोड़ी देर में सुचना मिलती है की मंत्री जी बस गाँव पहुँचने ही वाले हैं, सुचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षाकर्मी अलर्ट हो जाते हैं। थोड़ी ही देर में पुलिस की सायरन बजाती गाडी के पीछे गाड़ियों का काफिला गांव में प्रवेश करता है।  आगे पीछे पुलिस की गाड़ियों के बीच मंत्री जी गाडी है।  गाड़ियों का काफिला बबलू के घर के सामने आकर ठहरता है। मंत्री जी अपंनी लक्ज़री गाडी से उतारकर दोनों हाथ जोड़कर सबका अभिवादन करते हैं।  मंत्री जी के समर्थक उनकी तारीफ में नारे लगाने लगते हैं।  स्थानीय नेता मंत्री जी को एक बड़ा सा हार पहनकर उनका स्वागत करते हैं।  बबलू को बुलाया जाता है।  मंत्री जी को स्वागत के लिए जो हार पहनाया गया था मंत्री जी वो हार उतारकर बबलू को पहना देते हैं।  हार के वज़न से बबलू की गर्दन थोड़ी झुक जाती है।  न्यूज़ चैनल और अखबारों के कैमरामैन मंत्री जी के फोटो खींच रहे हैं।  मंत्री जी को खाने के लिए बबलू के घर के अंदर ले जाया जाता है बबलू भी उनके साथ है ।

घर के अंदर का नज़ारा देखकर बबलू की आँखें फटी रह जाती हैं, अंदर कालीन पर तरह तरह के पकवान रखे हुए हैं और साथ में मिनरल वाटर की बोतलें भी राखी हुई हैं।  बबलू ने अपनी ज़िन्दगी में ऐसे पकवान खाना तो दूर कभी हक़ीक़त में देखे भी नहीं थे।  मंत्री जी खाना खाने बैठते हैं, बबलू को भी साथ बिठाया जाता है।  मंत्री जी खाना खा रहे हैं उनके खास समर्थक आसपास मौजूद हैं, कैमरामैन फोटो खींच रहे हैं।  बबलू के घर के बाहर गाँव के लोग जमा हैं, सभी मंत्री जी से मिलना चाहते हैं ।  बबलू से घबराहट के मारे खाया ही नहीं जा रहा है।  मंत्री जी खाने से फ़ारिग़ हो चुके हैं।  घर के बाहर पत्रकार मंत्री जी के इंतज़ार में मौजूद हैं। थोड़ी देर में मंत्री जी बाहर आते है और पत्रकारों से बातचीत में मशगूल हो जाते है। बबलू भी मंत्री जी के साथ मौजूद है।   बबलू मंत्री जी से बात करना चाहता है की लेकिन उसे कुछ बोलने का मौका ही नहीं मिल पा रहा है। मंत्री जी दोनों हाथ जोड़कर पत्रकारों को अलविदा कहकर अपने सेक्रेटरी के कान में कुछ कहते हैं, सेक्रेटरी आगे बढ़कर सुरक्षाकर्मी से कुछ कहते हैं सुरक्षाकर्मी मंत्री जी के चरों और घेरा बनाकर उन्हें कार तक ले जाते हैं, और मंत्री जी कार में बैठकर चले जाते हैं गाँव के लोगों को मिलने का मौक़ा मिल ही नहीं पाता।  अब पत्रकार बबलू को घेरकर उससे सवाल पूछने लगते हैं, ''मंत्री जी  से मिलकर कैसा लगा ?''  ''मंत्री जी ने आपके साथ भोजन  करने आये इस बार में आपका क्या कहना है ? '' पत्रकार और भी तरह तरह के सवाल कर रहे हैं,अचानक हुई सवालों की बारिश से बबलू घबराया हुआ है, मुश्किल से जवाब दे पा रहा है। एक पत्रकार बबलू से सवाल करता है ''आप और आपका परिवार मंत्री जी से मिलकर खुश हैं ?'' बबलू को कोई जवाब नहीं सूझता वो कहता ''हाँ हम बहुत खुश हैं'' पत्रकार बबलू उसकी पत्नी और उसकी बेटी को साथ खड़ा करता है और हँसते हुए फोटो खिचवाने को कहता है,  कैमरामैन बबलू और उसके परिवार के फोटो लेकर चले जाते हैं। बबलू सोच रहा है की भले ही वो मंत्री जी को अपनी समस्या नहीं बता पाया लेकिन कम से कम मंत्री जी  की वजह से उसे बहुत सा ऐसा सामान तो मिल ही गया है जिसे खरीदने की उसकी हैसियत नहीं थी।  

सभी लोग जा चुके हैं।  बबलू के पडोसी और गाँव के कुछ लोग ही वहां मौजूद हैं।  थोड़ी ही देर में सुबह वाला ट्रक वापस आता है, ट्रक में से कुछ लोग उतरते हैं और बबलू के पास आते हैं और कहते सामान वापस ले जाने की बात करते है।  बबलू कहता है ''ये सामान तो मंत्री जी हमारे लिए भेजा था, वापस क्यों ले जाना चाहते हो'' बबलू की  बात सुनकर वो लोग हँसने लगते हैं और हँसते हुए कहते हैं ''ये सब तुम्हारे लिए नहीं आया था, वो सब तो मंत्री जी की सुविधा के लिए आया था, तुम्हे क्या लगता है मंत्री जी क्या तुम्हारे घर गर्मी में ज़मीन पर बैठते, अरे भाई मंत्री जी के कहीं भी जाने से पहले सब व्यवस्था करनी पड़ती है तुम नहीं समझोगे, चलो सामान ट्रक में रखवाने में हमारी मदद करो '' बबलू उदास मन से सामान उठा उठाकर ट्रक में रखवा रहा है, उसकी पत्नी और बेटी आँखों में मायूसी लिए उसे देख रहे हैं।  अगले दिन अख़बार में मंत्री जी की बबलू के घर भोजन की खबर छपी है, पत्रकार ने ने मंत्री जी तारीफ में कोई कसर नहीं छोड़ी है  खबर के साथ बबलू की परिवार के साथ हँसते हुए फोटो  भी है।
लेखक : शहाब ख़ान  'सिफ़र'

No comments:

Post a Comment