सरकारी पैसे का जनप्रतिनिधियों द्वारा दुरूपयोग - Nazariya Now

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Saturday, July 8, 2017

सरकारी पैसे का जनप्रतिनिधियों द्वारा दुरूपयोग

हाल ही मैं सरकार ने घोषणा की है कि लोग एलपीजी सब्सिडी की तरह रेल टिकट पर मिलने वाली सब्सिडी भी छोड़ सकते हैं क्योंकि रेलवे को टिकट पर सब्सिडी के कारण हर साल करोड़ों रुपये का घाटा होता है। केंद्र व राज्य सरकारें सरकारी ख़ज़ाने में पैसों की कमी की बात करके बहुत सी जनकल्याण से जुडी योजनाओं को लागु नहीं करती हैं, इसी तरह जब किसानों की  कर्जमाफी या  बिजली के बिल माफ़ करने की बात आती है तो भी केंद्र व राज्य सरकारें सरकारी ख़ज़ाने में पैसों की कमी का बहाना बनाती हैं।  केंद्र व राज्य सरकारें पैसा बचाने के लिए  जनकल्याणकारी योजनाओं को पूरी तरह से लागु नहीं करती और जनता से सब्सिडी छोड़ने जैसे अपील करती हैं।  जबकि अगर देखा जाये तो सरकारी पैसे का सबसे ज़्यादा दुरूपयोग जनप्रतिनिधिओं द्वारा ही किया जाता है।  सरकार चाहे तो सांसदों व विधायकों को हद से ज़्यादा मिलने वाली सुविधाओं में कटौती करके सरकारी पैसे की बचत कर सकती हैं। 
चुनाव के समय देखा जाता है की प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री, सांसद विधायक आदि अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार के लिए देश के अलग अलग राज्यों की यात्रा करते है और कई बार अपनी राजनैतिक पार्टी की बैठकों में शामिल होने के लिए भी अलग अलग राज्यों में जाते हैं, अक्सर ये सभी यात्रा विशेष विमान में की जाती हैं, और फिर एयरपोर्ट से सभास्थल तक पहुँचाने के लिए हेलीकॉप्टर से जाया जाता है, साथ ही जिस जगह चुनाव प्रचार या पार्टी मीटिंग के लिए जा रहे हैं वहां विशेष सुरक्षा व्यस्था की जाती है, इन यात्राओं और सुरक्षा व्यस्था में होने वाले खर्चे लाखों करोड़ों में होते हैं और वो सारा पैसा सरकारी ख़ज़ाने से लिया जाता है, जबकि सही मायनों में चुनावी सभा या पार्टी मीटिंग में जाना सरकारी काम नहीं है वो उस नेता का अपनी पार्टी के लिए किया जा रहा निजी काम होता है, ऐसे में उस खर्चे को या तो स्वयं वही नेता या फिर उसकी पार्टी को वहां करना चाहिए। 

संसद भवन की कैंटीन में खाने के जो रेट हैं उतने काम रेट पूरे देश में कहीं नहीं हैं। सरकार चाहे तो वहां से सब्सिडी हटाकर पैसा बचा सकती है। जनप्रतिनिधियों को फ्री में मिलने वाली हवाई और रेल यात्राओं में कटौती करके भी  पैसे की बचत की जा सकती है।  इन सबके अलावा और भी बहुत से तरीके हैं जिनसे सरकारी पैसे की बचत की जा सकती है।   आज देश में महंगाई की वजह से लोगों का सुकून से जीना पहले ही मुश्किल हो रहा ऐसे में सरकार जनता को मिलने वाली सब्सिडी छोड़ने की बात करने के बजाये अन्य फ़िज़ूल खर्चों में कटौती करके सरकारी पैसे की बचत करे तो ही बेहतर होगा।  सरकार को समझना चाहिए की सरकारी ख़ज़ाने में जमा पैसा देश की जनता की खून पसीने की कमाई जो विभिन्न टैक्स के रूप में वो सरकार को दी गई रक़म है, इस पैसे पर पहला हक़ जनता का ही है, इनका दुरूपयोग करने के बजाय इसे जनकल्याण की योजनाओं पर खर्च करना चाहिए। 

 ©Nazariya Now

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