सपनों का सौदा (कहानी ) - Nazariya Now

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Monday, July 17, 2017

सपनों का सौदा (कहानी )

सरला हॉस्पिटल के आई.सी.यू. के बाहर बैठी हुई रो रही है, आई.सी.यू. में उसका 13  साल का बेटा राजू बेहोश है।  ऑपरेशन के बाद से अभी तक उसे होश नहीं आया है।  डॉक्टर और नर्स आई.सी.यू. में राजू का चेकअप कर रहे हैं।  गुज़रे समय के सारे पल सरला की आँखों के सामने चलचित्र की तरह घूम रहे हैं।  जब राजू की उम्र 5 साल थी तभी एक हादसे में उसके पति की मौत हो गई थी।  पति की मौत के बाद सरला बिलकुल टूट गई थी लेकिन अब उस पर राजू की परवरिश की ज़िम्मेदारी थी,  उसने बड़ी मुश्किल से खुद को संभाला और घरों में काम करके राजू की परवरिश की। अब उसका एक ही मक़सद और सपना था राजू को पढ़ा लिखाकर क़ाबिल बनाना है, उसने राजू का एडमिशन पास के ही कान्वेंट स्कूल में करा दिया, हालाँकि स्कूल की फीस ज़्यादा थी लेकिन फिर भी वो घर के खर्चों में कटौती करके और 3-4 घरों में काम करके किसी तरह मुश्किल से स्कूल की फीस जमा करती।


इसी तरह समय गुज़र रहा था। राजू की उम्र 13 साल हो गई थी, वो पढ़ाई में काफी होशियार था।  वो बहुत दिल लगाकर पड़ता और हमेशा अच्छे नंबरों से पास होता।  हर साल अच्छे नंबरों से पास होने की वजह से राजू को स्कॉलरशिप भी मिल गई थी जिसकी वजह से सरला  पर स्कूल की फीस का बोझ थोड़ा काम हो गया था।  सरला को पडोसी से मालूम हुआ की बस्ती के पास वाली पॉश कॉलोनी में खन्ना साहब अपनी पत्नी और 11 साल के बेटे के साथ रहने आये हैं, खन्ना साहबका बेटा बीमार है उन्हें बेटे की देखभाल और घर के काम के लिए कामवाली की ज़रूरत है, वो तनख्वाह भी अच्छी देंगे और घर में बहुत ज़्यादा काम भी नहीं करना होगा बस झाड़ू पोछे का ही काम बाक़ी काम के लिए एक नौकर और है,  झाड़ू पोछे के अलावा उसे उनके बीमार बेटे की देखभाल करनी है । सरला ने सोचा अभी वो जिस दूसरी कॉलोनी में काम करने जाती है वो घर से दूर भी और वहां इतने घरों में काम करने के बाद भी बहुत ज़्यादा पैसे नहीं मिलते, खन्ना साहब के यहाँ जाकर बात करनी चाहिए उनका घर पास भी है और वो बड़े आदमी हैं तो तनख्वाह भी ज़्यादा मिलेगी, ये सोचकर सरला वहां गई।  खन्ना साहब की गिनती शहर के रईस लोगों में होती थी, शहर में उनकी कई फैक्टरियां हैं और वो एक राजनैतिक पार्टी के सदस्य भी हैं और समाजसेवा के कामों में भी बढ़चढ़कर हिस्सा लेते हैं खन्ना साहब और उनकी पत्नी ने थोड़ी पूछताछ के बाद दूसरे दिन से सरला को सुबह काम पर आने के लिए कह दिया।  सरला खुश थी कि उसे खन्ना साहब के यहाँ काम मिल गया है।

सरला ने अगले दिन से खन्ना साहब के यहाँ काम शुरू कर दिया।  वहां उसे मालूम हुआ की खन्ना साहब के इकलोते बेटे प्रिंस की दोनों किडनियां ख़राब हैं। उसने मिसेस खन्ना से पुछा ''मैडम मैंने सुना है कि ख़राब किडनी बदली भी जा सकती है'' सरला की बात सुनकर मिसेस खन्ना के चेहरे पर उदासी छा गई उन्होंने जवाब दिया ''किडनी बदली जा सकती है लेकिन उसके लिए ब्लड ग्रुप का मैच होना बहुत ज़रूरी है, प्रिंस का ब्लड ग्रुप AB निगेटिव है, ये ग्रुप बहुत काम लोगों का होता है, हमारे  रिश्तेदारों में से किसी का मैच नहीं हो रहा इसलिए प्रिंस की किडनी ट्रांसप्लांट नहीं हो पा रही है'' सरला को ये जानकर बहुत दुःख हुआ। वो सोचती की इतने भले लोगों  के साथ भगवान ने ऐसी नाइंसाफी क्यों की। सरला रोज़ सुबह राजू को स्कूल भेजने के बाद खन्ना साहब के यहाँ जाती घर का थोड़ा काम करती और प्रिंस के देखभाल करती और शाम को वापस घर आकर राजू और अपने लिए खाना बनती ।

एक दिन स्कूल से लौटते वक़्त राजू का कार से एक्सीडेंट हो गया एक्सीडेंट में राजू को काफी चोट लगी जिसकी वजह से खून ज़्यादा बह गया।  एक्सीडेंट के बाद कार वाला भाग गया, कुछ लोग राजू को पास के सरकारी अस्पताल ले गए।  सरला को मालूम हुआ तो वो घबराई  हुई अस्पताल पहुंची, वहां जाकर देखा कि राजू को सर और हाथ पैर में काफी चोट आई है।  राजू हॉस्पिटल के बाद बेड पर बेहोश लेटा हुआ है, सरला उसके पास जाकर रोने लगती है, तभी नर्स वह आती है और कहती है ''आप इसकी माँ हैं ?'' सरला जवाब में ''हाँ'' कहती और पूछती है मेरा बेटा कैसा ? उसे होश क्यों नहीं आया अभी तक ? नर्स कहती है ''घबराने की कोई बात नहीं आपका बेटा ठीक है थोड़ी देर में उसे होश आ जायेगा, खून ज़्यादा बाह जाने की वजह से थोड़ी कमज़ोरी है, उसे खून लगाने की ज़रूरत है'' सरला कहती है ''जितनी ज़रूरत हो आप मेरा खून ले लीजिये, बस मेरे बेटे को ठीक कर दीजिये'' नर्स कहती है ''हमने आपके बेटे का ब्लड ग्रुप चेक किया है AB नेगेटिव है, ये ग्रुप बहुत कम लोगों का होता है, हमारे ब्लड बैंक में भी अभी अवेलेबल नहीं है, आप मेरे साथ चलिए हम आपका ब्लड टेस्ट करते हैं अगर आपका ग्रुप मैच हुआ तो आपका खून ले सकते हैं''  नर्स सरला को अपने साथ ब्लड टेस्ट के लिए ले जाती और टेस्ट के बाद बताती है कि उसका ब्लड ग्रुप मैच नहीं हुआ है, इसलिए अब प्राइवेट ब्लड बैंक से ब्लड लाना होगा और वो काफी महंगा मिलेगा। सरला कहती ''आप मुझे लिखकर दीजिये में खून लेकर आउंगी कैसे भी करके'' नर्स सरला को एक परचा देती है जिस पर उसके बेटे का नाम उम्र और ब्लड ग्रुप लिखा होता है और ब्लड बैंक का पता भी लिखकर देती है ।

सरला को मालूम है की उसके पास इतने पैसे नहीं हैं की वो ब्लड बैंक से खून खरीद सके, इसलिए अस्पताल से सीधी  खन्ना साहब के घर जाती है।  खन्ना साहब कहीं बहार जाने की तैयारी में हैं वो उसे बंगले के लॉन में ही कार के पास खड़े मिल जाते हैं, सरला को  देखकर नाराज़गी से पूछते हैं ''तुम आज काम पर क्यों नहीं आई ? तुम्हे पता भी था मेडम को एक ज़रूरी मीटिंग में जाना था, तुम्हे आज जल्दी आने को कहा था ताकि प्रिंस का  ध्यान रख सको, तुम्हारी वजह से मेडम को घर पर प्रिंस के पास रुकना पड़ा'' पहले से ही घबराई हुई सरला खन्ना साहब की नाराज़गी देख रोने लगती है, खन्ना साहब पूछते हैं ''क्या बात है ? रो क्यों रही है ?'' सरला कहती है ''साहब मेरे बेटे का एक्सीडेंट हो गया है वो अस्पताल में बेहोश, उसे खून की ज़रूरत है और जो खून उसे लगना वो अस्पताल में नहीं है और मेरा खून भी उसके खून से नहीं मिल रहा है, खून  प्राइवेट ब्लड बैंक से लेना होगा मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि मैं वहां से खून खरीद सकूँ''  बोलते बोलते सरला का गला भर आता है और वो ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है और रोते रोते नर्स ने जो ब्लड  ग्रुप वाला पर्चा दिया था वो खन्ना साहब  के सामने कर देती है और हाथ जोड़कर कहती है ''ये वाला खून जितने पैसे में आयेगा उतने पैसे आप आप मुझे दीजिये वो पैसे आप मेरी तनख्वाह में से काट लिया करना आपकी बहुत मेहरबानी होगी।  खन्ना साहब सरला के हाथ से पर्चा लेकर देखते हैं उसमे ब्लड ग्रुप AB नेगेटिव लिखा देखकर उन्हें ख्याल आता है की उनके बेटे प्रिंस का ब्लड ग्रुप भी AB नेगेटिव ही है, वो  कहते हैं ''तुम रोओ नहीं, ब्लड का इंतज़ाम हो जायेगा'' सरला से अस्पताल का पता लेकर कहते हैं तुम अस्पताल पहुंचो में ब्लड लेकर वही आ रहा हूँ।  सरला दोनों हाथ जोड़कर उन्हें धन्यवाद कहती है और वहां से चली जाती है।  सरला के जाने के बाद खन्ना साहब थोड़ी देर वहीँ खड़े होकर कुछ सोचते हैं फिर ड्राइवर से ब्लड बैंक चलने को कहते हैं।

थोड़ी देर में खन्ना साहब ब्लड लेकर अस्पताल पहुँचते हैं तब तक राजू को होश आ चूका है सरला वही उसके पास बैठी हुई है, खन्ना साहब को देखकर वो दोनों हाथ जोड़कर खड़ी हो जाती है, खन्ना साहब सरला को बैठने के लिए कहते हैं।  खन्ना साहब के अस्पताल में आने की खबर सुनकर अस्पताल के बड़े डॉक्टर उनसे मिलने आ जाते हैं।  खन्ना साहब डॉक्टर से राजू की सेहत बारे में पूछते हैं।  डॉक्टर बताते हैं की राजू अब ठीक है खून की थोड़ी कमी है, आप खून ले ही आये हैं अब शाम को खून लगा दिया जायेगा और 2 -3 दिन में अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी।  खन्ना साहब डॉक्टर को राजू अच्छे से अच्छा ट्रीटमेंट देने की हिदायत देने के बाद वहां से चले जाते हैं।  खन्ना साहब के प्रभाव की वजह से अस्पताल में राजू के इलाज का खास ध्यान रखा जाता है और 3 दिन बाद राजू को अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है, 1 हफ्ते में राजू के सेहत में काफी सुधार होने लगता है और कुछ दिन में राजू बिलकुल ठीक हो गया है। सरला भी अब खन्ना साहब के यहाँ काम पर जाने लगी है। एक दिन खन्ना साहब  सरला  के घर आते हैं और राजू की तबियत के बारे में पूछते  हैं। सरला कहती है ''साहब राजू अब बिलकुल है, सब आपकी कृपा है'' खन्ना साहब कहते हैं ''इसमें कृपा वाली क्या बात है, इतना तो मैं कर ही सकता हूँ'' फिर वो कहते हैं ''में सोच रहा हूँ राजू को हॉस्पिटल ले जाकर उसका एक बार मेडिकल चेकअप करवा  लेते हैं, उसकी तबियत तो अब ठीक है लेकिन फिर भी में अपनी तसल्ली के लिए एक बार चेकअप करवाना चाहता हूँ'' सरला कहती है ''साहब आपके  बहुत उपकार हैं हम पर, हम माँ बेटे सदैव आपके ऋणी रहेंगे अपने जो कुछ हमारे लिए किया वो आज के दौर कोई किसी के लिए नहीं करता, ये तो आपका बड़प्पन है जो आपकी हम पर  इतनी कृपा है'' खन्ना साहब मुस्कुराकर कहते हैं  ''कोई बात नहीं, तुम भी प्रिंस का इतना ध्यान रखती तो हमारा भी कुछ फ़र्ज़ बनता है , तुम शाम को राजू को तैयार रखना में उसे चेकअप के लिए हॉस्पिटल ले जाऊंगा''  इतना कहकर खन्ना साहब चले जाते हैं

शाम को खन्ना साहब राजू को मेडिकल चेकअप के लिए अपने साथ हॉस्पिटल ले जाते हैं।  राजू ने स्कूल जाना शुरू कर दिया है, सरला खन्ना साहब को बहुत मानती हैं उन्होंने उसके बेटे की जान बचाकर उस पर इतना बड़ा जो उपकार किया है, वो सबसे कहती है कि खन्ना साहब लिए फ़रिश्ते बनकर आये था अगर वो दिन मदद न करते तो पता नहीं उसके बेटे का क्या होता ?

कुछ दिनों से खन्ना साहब के बेटे प्रिंस की तबियत काफी ख़राब हैं, उसकी हालत दिन ब दिन बिगड़ती जा रही है। डॉक्टर के अनुसार जल्दी से जल्दी किडनी ट्रांसप्लांट होना बहुत ज़रूरी है नहीं तो जान का है।  खन्ना साहब सरला को में बुलाते हैं, मिसेस खन्ना भी वहां मौजूद हैं।  खन्ना साहब पहले राजू के बारे में पूछते हैं उसकी तबियत पढ़ाई वगैरह के बारे में फिर कहते हैं ''सरला हमें तुमसे कुछ बात करना हैं, हम तुम्हारे बेटे राजू को गोद लेना चाहते हैं हम उसे क़ानूनी तौर पर गोद लेंगे उसकी पढ़ाई परवरिश का पूरा खर्चा हम ही उठाएंगे, हम चाहते हैं की वो अच्छे स्कूल में पड़े उसकी अच्छी तरह परवरिश हो जिससे वो बड़ा आदमी बने, तुम्हारा सपना भी तो यही होगा न'' मिसेस खन्ना भी उनकी हाँ में हाँ मिलती हैं।  खन्ना साहब की बात सुनकर सरला दोनों हाथ जोड़कर कहती है ''साहब ये तो आपका बड़प्पन हैं जो मुझ गरीब के बेटे पर आपकी इतनी कृपा है, आप तो मेरे लिए फरिश्ता बनकर आये हैं, आपका पहले ही हम पर बहुत बड़ा उपकार है'' कहते हुए उसकी आँखों में आंसू आ जाते हैं।  मिसेस खन्ना सरला के पास आती हैं और कहती हैं ''सरला तुम्हे तो ये सुनकर खुश होना चाहिए लेकिन तुम रो रही हो, अगर तुम्हे ये लगता है की राजू तुमसे दूर हो जायेगा तो ऐसा कुछ नहीं होगा राजू तुम्हारे पास ही रहेगा'' उनकी बात सुनकर सरला अपनी साड़ी के पल्लू से आंसू पोंछते हुए कहती है ''मेडम ये तो ख़ुशी के आंसू हैं, आपने मेरे सपनो को पंख दे दिए बस यही सोचकर ख़ुशी के आंसू आ गए'' खन्ना साहब कहते हैं ''तो फिर हम तुम्हारी हाँ समझे ?'' सरला कहती है ''जी'' खन्ना साहब कहते हैं ''ठीक है फिर में आज ही वकील से क़ानून कार्यवाही के लिए पेपर कम्पलीट करने को कहता हूँ '' इतना कहकर खन्ना साहब वहां से चले जाते हैं।  मिसेस खन्ना कहती हैं ''सरला मुझे एक सोशल मीटिंग में जाना है थोड़ी देर में आ जाउंगी तुम प्रिंस का ख्याल रखना'' इतना कहकर मिसेस खन्ना भी चली जाती हैं।

खन्ना साहब शहर के सबसे बड़े अस्पताल में  डॉक्टर दीवान के साथ मौजूद हैं, डॉक्टर दीवान शहर के सबसे क़ाबिल और मशहूर डॉक्टर हैं। दोनों बातचीत में मशगूल हैं, डॉक्टर दीवान कह रहे हैं ''खन्ना साहब आप समझ नहीं रहे, ये गैर क़ानूनी  है, और इसमें बहुत खतरा भी है, क़ानूनी तौर पर किडनी डोनर की उम्र कम से कम 18 साल होना ज़रूरी है और जिसे किडनी डोनेट की जा रही है उसके साथ रिश्ता होना भी ज़रूरी है'' खन्ना साहब कहते हैं ''आप टेंशन मत लीजिये में क़ानूनी  तौर पर उस बच्चे को गोद ले रहा हूँ, बाक़ी उसकी उम्र कम होने की आप फ़िक्र मत कीजिये, किसी को कुछ मालूम नहीं चलेगा, में सब संभल लूंगा'' डॉक्टर दीवान कहते हैं ''बात सिर्फ लीगल फॉर्मलिटीज की ही नहीं है, आप जिस बच्चे की किडनी लेने की बात कर रहे हैं उसकी उम्र सिर्फ 13 साल है, ऑपरेशन में उसकी जान का खतरा भी हो सकता है'' खन्ना साहब कहते हैं ''उस बच्चे की जान को खतरा हो सकता है और मेरे बेटे प्रिंस की जान पहले से ही खतरे में है, आप ये बताइये ऑपरेशन की सक्सेस के कितने चांस हैं ?'' डॉक्टर दीवान कहते हैं ''ऑपरेशन की सक्सेस का मुझे पूरा यक़ीन है लेकिन बस उस बच्चे की उम्र कम होने की वजह से में कोई रिस्क नहीं लेना चाहता'' खन्ना साहब कहते हैं ''जब आपको ऑपरेशन की सक्सेस का यक़ीन है तो फिर आप ऑपरेशन की तैयारी कीजिये बाक़ी लीगल फॉर्मलिटीज की आप टेंशन मत लीजिये में सब संभल लूंगा, वैसे भी ये बात सिर्फ हमारे बीच ही रहेगी'' डॉक्टर दीवान कहते हैं ''ओके, हम इसी हफ्ते ऑपरेशन करते हैं'' खन्ना साहब ''थैंक यू'' कहकर डॉक्टर दीवान से हाथ मिलाकर चले जाते हैं।

खन्ना साहब ने वकील से मिलकर राजू को गोद लेने के पेपर तैयार करवा लिए हैं और सरला से उन पर साइन भी करवा लिए हैं।  सरला बहुत खुश है की राजू के लिए उसने जो सपने देखे थे वो सारे सपने अब सच हो जायेंगे । खन्ना साहब और मिसेस खन्ना आपस में बात कर रहे हैं, मिसेस खन्ना कह रही हैं ''अगर सरला नहीं मानी तो हम क्या करेंगे ?'' खन्ना साहब कहते हैं ''अभी सरला को कुछ बताने की ज़रूरत नहीं है, ऑपरेशन के बाद ही बतायेगे'' मिसेस खन्ना कहती हैं ''लेकिन'' खन्ना साहब कहते हैं ''लेकिन वेकिन कुछ नहीं, अभी सरला से कुछ नहीं कहना है, उसे बाद में समझा लेंगे वैसे भी हम उसके बेटे को गोद लेकर उस पर इतना बड़ा अहसान कर चुके हैं, बाद में वो कुछ नहीं कह पायेगी हम उसे समझा लेंगे''

दूसरे दिन मिसेस खन्ना सरला को बुलाकर कहती हैं ''कल राजू को साथ ले आना, हम चाहते हैं हमारा बेटा कुछ दिन हमारे साथ भी रहे'' सरला खुश होकर कहती है ''जी मेडम में ले आउंगी अब वो आपका ही बेटा जितने दिन चाहे आपके साथ रखें'' अगले दिन सरला राजू को अपने साथ ले आती है और शाम को उसे वहीँ छोड़कर घर चली जाती है।  सरला पहली बार राजू  दूर है, घर में उसका मन नहीं लग रहा है, बेचैनी की वजह से उसे नींद भी नहीं आ रही है।  अगले दिन वो सुबह जल्दी ही खन्ना साहब के घर पहुंच जाती है।  वहां जाकर चौकीदार से मालूम होता है कि कल रात को प्रिंस को हॉस्पिटल में एडमिट किया गया है, खन्ना साहब और मिसेस खन्ना भी हॉस्पिटल में हैं राजू को भी साथ ले गए हैं ।  सरला प्रिंस की हालत को लेकर बहुत ज़्यादा फिक्रमंद हो जाती है, वो मन ही मन प्रिंस की सलामती के लिए दुआ करती है और सोचती है की खन्ना साहब और मिसेस खन्ना कितने भले लोग हैं उसके अपने बेटे की तबियत इतनी ख़राब होने के बाद भी वो राजू को को अपने साथ ले गए उसे अकेला घर में नहीं छोड़ा, इतनी ज़्यादा फिक्र करते हैं वो राजू की, मेरा राजू बहुत ख़ुशक़िस्मत है।  वो सोचती है उसे भी हॉस्पिटल जाना चाहिए।  चौकीदार से हॉस्पिटल का पता लेकर वो हॉस्पिटल जाने के लिए निकल पड़ती है, मन में प्रिंस की सलामती की दुआ करती हुई वो ऑटोरिक्शा में बैठकर हॉस्पिटल की तरफ जा रही है।

हॉस्पिटल वहां से काफी दूर है। सरला वहां पहुंचकर रिसेप्शन काउंटर से प्रिंस के बारे में पूछती है, उसे बताया जाता है की प्रिंस का ऑपरेशन चल रहा है।  सारला  ऑपरेशन थिएटर के बारे में पता करके वहां पहुँचती है, ऑपरेशन थिएटर के बाहर कुछ लोग मौजूद हैं, मिसेस खन्ना वहीँ सोफे पर बैठी हुई हैं उनके साथ 2 महिलायें और भी हैं जो शायद उनकी रिश्तेदार हैं,  खन्ना साहब कुछ लोगों के साथ वही खड़े बात कर रहे हैं।  सरला को अचानक वह देखकर सब चौंक जाते हैं।  खन्ना साहब कहते हैं ''सरला तुम यहाँ कैसे ?'' सरला कहती है ''में  घर पहुंची तो प्रिंस बाबा की तबियत के बारे में पता चला तो मुझसे रहा नहीं गया इसलिए में यहाँ आ गई'' सब हैरत से सरला को देख रहे हैं।  फिर सरला कहती है ''प्रिंस बाबा कैसे हैं अब ? और राजू नज़र नहीं आ रहा कहाँ है वो ? ज़रूर यही कहीं घूम रहा होगा बहुत शैतान हो गया'' मिसेस खन्ना, खन्ना साहब की और देखती हैं, खन्ना साहब सरला के पास आकर कहना शुरू करते हैं ''देखो सरला दरअसल बात ये है की प्रिंस की हालत बहुत ज़्यादा ख़राब हो रही थी, उसे जल्दी से जल्दी किडनी ट्रांसप्लांट की ज़रूरत थी, अगर जल्दी उसका ऑपरेशन नहीं किया जाता तो उसकी जान को खतरा था'' खन्ना साहब धीरे धीरे सरला को समझाने के अंदाज़ में बोल रहे हैं, सरला ख़ामोशी से उनकी बात सुन रही है।  खन्ना साहब आगे कहते हैं ''तुम्हे मालूम ही है कि प्रिंस का ब्लड किसी से भी मैच नहीं हो रहा रहा था इसलिए ऑपरेशन नहीं हो सकता था'' इतना कहकर खन्ना साहब खामोश हो जाते हैं। सरला के चेहरे पर डर और बेचैनी के छा जाती है, उसका दिल किसी अनहोनी आशंका से ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगता है। खन्ना साहब भी सरला को सच बताने में घबरा रहे हैं वो फिर कहना शुरू करते हैं ''प्रिंस और राजू का ब्लड ग्रुप एक ही है और चेकअप के बाद मालूम हुआ की राजू की एक किडनी प्रिंस को डोनेट की जा सकती है, इसलिए हमें मजबूरन ये फैसला लेना पड़ा, राजू भी ऑपरेशन थिएटर में है उसकी एक किडनी प्रिंस को लगाईं जा रही है, लेकिन तुम बिलकुल फ़िक्र मत करो राजू को कुछ नहीं होगा, किडनी देने से उसके शरीर को कोई नुकसान नहीं होगा और वैसे भी राजू अब हमारा बेटा है हम उसे कुछ नहीं होने देंगे'' इतना कहकर खन्ना साहब खामोश हो गए।

सरला को लगा जैसे आसमान उसके सर पर टूट पड़ा हो, उसके पैरों के नीचे से ज़मीन निकल गई हो, उसे यक़ीन नहीं हो रहा की खन्ना साहब ऐसा भी कर सकते हैं, अपने बेटे की जान बचाने के लिये उसके मासूम बेटे के जान को कैसे खतरे में डाल सकते हैं। वो निःशब्द  सी हो गई है उसके मुंह से शब्द नहीं निकल रहे हैं, वो फटी आँखों से खन्ना साहब को देख रही है। खन्ना साहब उससे नज़रें नहीं मिला पा रहे हैं। मिसेस खन्ना सरला के पास आती हैं और कहती हैं ''सरला हम जानते हैं हमने तुमसे ये बात छुपकर गलती की है, हमें तुम्हे सारी बात बतानी चाहिए थी, लेकिन हम मजबूर थे, हम अपने बेटे को मरते हुए नहीं देख सकते थे, अगर हम तुम्हे बताते तो तुम कभी इसके लिए तैयार नहीं होती,  हमें मजबूरन फैसला लेना पड़ा'' सरला की आँखों से आंसू बह रहे हैं, वो खुद को सँभालते हुए रुंधे गले से कहती है ''मैडम आप लोगों ने अपने बेटे की जान बचाने की खातिर मेरे मासूम बेटे को मौत के मुंह में भेज दिया, आपके बेटे की जान की क़ीमती है लेकिन क्या मेरे बेटे की जान की कोई क़ीमत नहीं सिर्फ इसलिए क्योंकि हम गरीब हैं'' कहते-कहते सरला का गला भर आया है वो बहुत मुश्किल से बोल पा रही है।

मिसेस खन्ना कहती हैं ''सरला मैं तुम्हारी तकलीफ समझ सकती हूँ क्योंकि में भी तुम्हारी तरह एक माँ हूँ, आज जो तकलीफ तुम्हे हो रही है, कई सालों से में भी वही तकलीफ़ झेल रही हूँ, में हर दिन अपने बेटे प्रिंस को मौत के क़रीब जाता देख रही थी, राजू  के बारे में जानकर हमें उम्मीद की किरण नज़र आई और हम अपने बेटे के प्यार में अंधे हो गए और हमने मजबूरन ये फैसला लिया, तुम भी मेरी तकलीफ समझ सकती हो आखिर तुम भी एक माँ हो'' इतना कहकर मिसेस खन्ना भी रोने लगती हैं।  इतनी देर से खामोश खड़े खन्ना साहब बोलना शुरू करते हैं ''सरला तुम बिलकुल फ़िक्र मत करो राजू जल्दी ही ठीक हो जायेगा हम उसका पूरा ख्याल रखेंगे हमने उसे गोद लिया है वो भी हमारा बेटा है, उसके इलाज, पढ़ाई, परवरिश की सारी ज़िम्मेदारी अब हमारी है, सब ठीक हो जायेगा'' सरला खन्ना साहब और मिसेस खन्ना की और देखकर कहती है ''साहब आपने राजू को इसलिए गोद नहीं लिया क्योंकि आप उसे अपना बेटा मानते हैं, बल्कि आपने उसे इसलिए गोद लिया क्योंकि वो सिर्फ आपके बेटे की जान बचाने का एक ज़रिया था, आप लोगों ने मुझे मेरे बेटे के सुनहरे भविष्य के सपने दिखाए में,  आप लोगों ने मेरे सपनो को पंख दिए लेकिन हक़ीक़त है की आपने मेरे बेटे की जान की क़ीमत पर मेरे सपनों का सौदा किया है।'' इतना कहकर सरला फूट फूटकर रोने लगती हैं, खन्ना साहब और मिसेस खन्ना उससे नज़रें नहीं मिला पा रहे हैं।

थोड़ी देर में ऑपरेशन थिएटर का दरवाज़ा खुलता है, अंदर से डॉक्टर दीवान 2 और डॉक्टरों के साथ बहार आते हैं।  खन्ना साहब फ़ौरन आगे बढ़कर पूछते हैं ''प्रिंस कैसा है ?'' डॉक्टर दीवान कहते हैं'' खन्ना साहब मुबारक हो ऑपरेशन सक्सेस रहा, 2 -3  घंटे में बच्चों को होश आ जायेगा फिर आप उनसे मिल सकते हैं'' खन्ना साहब डॉक्टर दीवान  से हाथ मिलकर उन्हें ''थैंक यू''  कहते हैं, तभी सरला दौड़ती हुई आती है और डॉक्टर दीवान से पूछती है ''डॉक्टर साहब मेरे बेटा कैसा है, मुझे उससे मिलना है ?'' डॉक्टर दीवान खन्ना साहब की तरफ देखते हैं, खन्ना साहब कहते हैं ''ये राजू की माँ हैं'' डॉक्टर दीवान सरला से कहते हैं ''चिंता की कोई बात नहीं वो बिलकुल ठीक है, उसे होश आ जाये फिर आप उससे मिल सकती हैं, अभी हम दोनों को आई.सी.यू. में शिफ्ट कर रहे हैं'' इतना कहकर डॉक्टर दीवान चले जाते हैं।  सरला उदास चेहरा लिए वहीँ बैठ जाती है।  थोड़ी देर में नर्स और कम्पाउंडर एक एक करके स्ट्रेचर पर प्रिंस और राजू को आई.सी.यू. में शिफ्ट करने के लिए ऑपरेशन थियेटर से बाहर लाते हैं,  अभी दोनों बेहोश हैं।  खन्ना साहब, मिसेस खन्ना, सरला और बाक़ी लोग भी उनके पीछे पीछे  आई.सी.यू. तक आ गए हैं।  प्रिंस और राजू को अलग-अलग आई.सी.यू. वार्ड में शिफ्ट किया जाता है।  प्रिंस को लक्ज़री आई.सी.यू. में शिफ्ट किया गया है और राजू को जनरल आई.सी.यू. में।

सरला अकेली आई.सी.यू. के बाहर बैठी गुज़रे समय के ख्यालों में खोई हुई थी तभी नर्स ने आकर उसे बताया की राजू को होश आ गया है। सरला साड़ी के पल्लू से अपने आंसू पोछती है और आई.सी.यू. में जाती है, राजू को देखकर उसकी आँखों में फिर से आंसू आ जाते हैं।  वो सोच रही है धोखे से उसके सपनों का सौदा हुआ है और उसे उस सौदे की बहुत बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ी है।
लेखक : शहाब ख़ान  'सिफ़र'

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