शन्नो की शादी (कहानी) - लेखक : इमरान पी.एस. - Nazariya Now

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Friday, July 7, 2017

शन्नो की शादी (कहानी) - लेखक : इमरान पी.एस.

पूरे मोहल्ले मे खुशी का माहौल है और शन्नो की तो पूरी गली सजी हुई है क्या ठाठ बाठ से शन्नो की शादी हो रही है हर किसी के दिल मे ये सवाल के शन्नो के पिता प्रमोद गुप्ता तो प्राइवेट कंपनी मे सिक्यूरिटी गार्ड है फिर कैसे ये शान-औ_शौकत मोहल्ले की दबी आवाज़ो से पता चला शन्नो की शादी का पूरा खर्चा करीम उल्ला सहाब ने उठाया है ।करीम उल्ला प्रमोद गुप्ता के घर के सामने रहते है करीब पच्चीस साल से दोनो घरो के बीच पारिवारिक संबंध है हर सुख दुख मे तीज त्योहार मे साथ ही रहते है शन्नो का असली नाम शालिनी है शन्नो नाम करीम उल्ला सहाब ने प्यार से रखा था जब शन्नो ही पड़़ गया ।जब शन्नो का रिश्ता आया तो प्रमोद जी तो घबरा गए मेरे पास अभी इंतज़ाम नही है लेकिन करीम उल्ला ने ये ज़िम्मेदारी अपने ऊपर ले ली कहा शन्नो मेरी बेटी की तरह है ।


करीम उल्ला सहाब बोहोत खुश है दौड़ दौड़ कर सारे काम कर रहे है कभी हलवाई को समझाइश देते है कभी लाईट वाले को समझाने लगते है तो कभी डेकोरेशन वाले को बता रहे है किस तरह काम करे ।शन्नो की भी खुशी का ठिकाना नही है इतरा इतरा कर चलती है दरवाज़े पर आती बाहर की तरफ देखती है फिर वापस चली जाती है जैसे अभी दोपहर से ही बारात आने का इंतजार कर रही हो ।लेकिन आज मोहल्ले के करीब दो सौ लड़को मे मायूसी का माहौल है क्योंकि शन्नो बोहोत दूर जा रही है पराई होकर चुलबुली सुंदर शन्नो सभी को भाती थी ।जैसे ही शाम का वक्त करीब आया तो प्रमोद जी गली मे खड़े होकर आवाज़ लगाते है शन्नो को पार्लर कब भेजोगी शन्नो की माँ । बस असलम आ जाए उसकी कार मे जाएगी अंदर से शन्नो की माँ कहती है। असलम उल्ला करीम उल्ला सहाब का बड़ा बेटा है छोटा बेटा सैफ उल्ला जो दसवी कक्षा का छात्र है। करीम उल्ला ये सुनकर अपने बेटे को फोन लगाते हुए फटकारते है
घर मे शादी है और तुमको आज आफिस जाने की क्या ज़रूरत थी ।
बस अब्बू आ ही गया आपके पीछे देखे ।
पीछे असलम कार के साथ खड़ा था इतने मे शन्नो भी भागते हुए आकर कार मे बेठ जाती हैं ।
असलम :-- मे हाथ मुँह धोकर आता हू
शन्नो :-- तुम तो ऐसे ही अच्छे लगते हो लल्लू
असलम :-- चुप बैठ बंदरिया
असलम और शन्नो दोनो हम उम्र है साथ खेल कर बड़े हुए है दोनो मे पटती भी बोहोत है ।
असलम शन्नो को पार्लर ले जाने के लिए निकलता है पूरे मोहल्ले के लड़को के सीने पर सांप लोट जाता है ।
प्रमोद जी करीम उल्ला फिर अपने कामो मे व्यस्त हो जाते है ।
रात के आठ बजे शन्नो अभी तक नही आई ये सोच कर प्रमोद जी असलम को फोन लगाते है ।
लेकिन फोन रिसीव नही हुआ
फिर लगाया रिसीव नही हुआ
तीसरी बार लगाया फिर रिसीव हुआ असलम ने बताया उसकी कार खराब हो गई थी फहीम भाई के गैरेज पर सुधरवा रहा हू शन्नो को पार्लर छोड़ आया था अब उसको लेने जा रहा हू ।
नौ बजे फिर फोन लगाया तो असलम का नम्बर बंद बता रहा था ।
मेरी गाड़ी की चाबी फेंकना शन्नो की माँ शायद असलम की गाड़ी खराब हो गई मे ही जाकर शन्नो को लेकर आता हू ।
जब तक प्रमोद जी अपनी खटारा स्कूटर स्टार्ट करते उससे पहले मोहल्ले की दो सौ गाड़ीया मायूस आशीको की रवाना हो गई सभी वहा पहले से पहुंच गए देखने के लिए शन्नो दुल्हन बन कर कैसी लगती है ।
प्रमोद जी भी पहुंच गए जाकर पता करा तो सुन कर हैरान रह गए ।
रिसेप्शन पर बैठी महिला ने बताया यहा शन्नो नाम की कोई लड़की नही आई सभी हैरान होकर प्रमोद जी को देख रहे थे उन्होंने जेब से मोबाइल निकाल कर असलम को लगया तो फिर असलम का मोबाइल बंद आ रहा था ।
तभी उन नाकाम आशिको की भीड़ मे से एक बोला असलम शन्नो को भगा कर ले गया ।
प्रमोद जी बोले पागल हो गए हो तुम लोग असलम मेरे ही घर का बच्चा है ।
लेकिन सभी एक आवाज़ मे बोले असलम भोली भाली शन्नो को बहला-फुसलाकर कर भगा ले गया चलो भाईयो उसके घर उसके कमीने बाप से पूछते है कहा भगवाया है उस मुल्ले ने हमारे धर्म की लड़की को ।
कहा गई शन्नो ?
एक पुराना घर पुरानी दीवारे उसके अंदर पुरानी चादर पर बैठी शन्नो अपने बेटे विराट के स्कूल से आने का इंतजार कर रही है । सोच मे कितनी जल्दी पांच साल निकल गए राहुल के साथ कॉलेज मे मिलना फिर पापा मम्मी का राहुल के साथ शादी का इंकार करना फिर शादी वाले दिन पार्लर से भागना असलम तो पार्लर छोड़ कर चला गया था वही राहुल मेरा पहले से इंतजार कर रहा था । लेकिन आज अपने इस फैसले पर अफसोस होता है काश मम्मी पापा की मान लेती तो यू मेरी जिंदगी बर्बाद ना होती राहुल की नशे की लत ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी पता नही अब घरवाले अपनाते भी है या नही आज पांच साल बाद अपने घर जा रही हूँ।  विराट स्कूल से वापस आता है और उसको लेकर नशे मे धुत राहुल से कह कर घर से निकलती है और 35 घंटे के थका देने वाले सफर से अपने मोहल्ले मे पहुंचती है सब कुछ वही है लेकिन आज कोई नज़र उसकी तरफ नही उठ रही शायद कोई पहचान ही नही पा रहा आँखो मे गड्ढे पड़ गए वक्त के थपेड़े सारी सुंदरता ले उड़े ।जैसे ही अपनी गली की तरफ मुड़ी तो दिल की धड़कन तेज़ हो गई पापा मम्मी तो किसी हाल मे माफ नही करेंगे वो तो पहेले ही कह चुके थे राहुल या हम मे से तुझे किसी एक को चुनना पड़ेगा मेरी नादानी थी मैंने राहुल को चुना।अब सिर्फ एक ही रास्ता है करीम चाचा उन्होंने मुझे अपनी बेटी की तरह समझते है वो मुझे ज़रूर माफ कर देगें वो पापा मम्मी को भी मना लेगें और मेरा सबसे अच्छा दोस्त असलम भी पापा को मना लेगा पहले उनके घर जाती हू । लेकिन करीम उल्ला का घर देख कर उसके पैरो तले ज़मीन निकल गई एक वीरान जला हुआ खंडहर अंदर पहुंच कर देखा काली दीवारे काली छत वहशीपन की कहानी ब्यान कर रही है जैसे किसी दरिंदगी की हदे यहा पार हुई है इंसानियत को शर्मसार करती कहानी ब्यान करता हुआ घर ।
मन मे कई सवाल लिए अपने घर का दरवाज़ा खटखटाया ।
अंदर से एक औरत आती है
शन्नो :-- आप कौन
हम इस घर मे रहते है हमारा घर है ये
शन्नो :-- ये घर प्रमोद गुप्ता जी का है
अच्छा हम किराएदार है वो अब यहा नही रहते
शन्नो :-- फिर कहा रहते है
गुप्ता जी का तो नही मालूम उनकी वाइफ को किराया देने जाते है हम हास्पिटल मे
शन्नो :-- हास्पिटल मे कौन से हास्पिटल मे
सिटी केयर मेंटली हास्पिटल में
हज़ारो सवाल दिल में लिए शन्नो हास्पिटल की तरफ भागी वहा उसकी बुआ मौजूद थी इस हाल मे उनको शन्नो की ज़रूरत थी इसलिए गिले शिकवे भुला कर उसको गले लगाकर खूब रोई फिर उसकी माँ से मिलाने ले गई जो अपना मानसिक संतुलन खो चुकी थी ।
शन्नो से अपनी माँ की ये हालत देखी ना गई बाहर आकर बैठ गई
उसकी बुआ भी बाहर आ गई
शन्नो :-- ये सब कैसे हुआ और पापा कहा है करीम चाचा का घर
बुआ :-- तुम्हारा ये क़दम कई जिंदगीया तबाह कर गया जब तुम पार्लर से नही आई तो सब तुम्हे देखने गए तुम नही मिली और असलम का मोबाइल बंद मिला तो सब समझे असलम तुम्हे भगा ले गया
सब लोग असलम के अब्बू से सवाल करने लगे बताओ कहा भगाया है तुमने और तुम्हारे बेटे ने शन्नो को
उन्होंने कहा शन्नो मेरी बेटी है और असलम मेरा खून वो ये काम कर ही नही सकता लेकिन उन्मादी भीड़ ने असलम के घर पर पेट्रोल डाल दिया प्रमोद भैय्या अपनी बंदूक लेकर सामने खड़े हो गए करीम भाई का घर मेरी लाश पर लुटेगा लेकिन पहले भैय्या को गोली मार दी और करीम भाई उनकी बीवी और उनका लड़का सैफ उल्ला समेत पूरे घर को आग लगा दी पूरा घर चीख पुकार से गूंज उठा लेकिन किसी भी वहशी को तरस ना आया ।
सामने असलम भी आ गया अपने जलते घर को देख कर चीखते हुए आया लेकिन भीड़ ने उस आगे ना जाने दिया ।
पहला सवाल शन्नो कहा है ?
मुझे नही मालूम मे तो पार्लर छोड़ कर गया था मेरी गाड़ी खराब हो गई थी मेरा मोबाइल डिस्चार्ज हो गया था वापस आया तो पता चला वो वहा गई ही नही ।
अंदर से सैफ उल्ला की आवाज़ आई भाई हमे बचाओ ।
इसके बाद कोई सवाल ना हुआ भीड़ जंगली सूअरो की तरह उस पर टूट पड़ी और जब तक असलम की जान ना निकल गई मारते ही रहे ।
तुम्हारे अपहरण और प्रमोद भैय्या के क़त्ल का इल्ज़ाम भी करीम भाई के ऊपर लगा दिया उस भीड़ ने ।
और करीम उल्ला परिवार को तुम्हे अपनी बेटी मानने की कीमत अपनी और अपने परिवार की जान देकर चुकाना पड़ी तुम्हारी माँ सारा मंज़र अपनी आँखो से देख कर अपना मानसिक संतुलन खो बैठी ।।
( क़ुसूरवार कौन ?
शन्नो ?
राहुल या ? हत्यारों का झुंड ?
मुसलमान हमेशा से अच्छा पड़ोसी, अच्छा दोस्त, अच्छा हमदर्द साबित हुआ है लेकिन आज के आधुनिक धर्मो ने हमारे किरदार को बदतरीन बनाकर पेश किया है ।।)

 लेखक : इमरान पी.एस.
नोट : कहानी के पात्र व घटना काल्पनिक हैं

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