विदेशी राष्ट्रपति की गाँव यात्रा (कहानी) - Nazariya Now

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Sunday, July 2, 2017

विदेशी राष्ट्रपति की गाँव यात्रा (कहानी)

सुबह से ही पूरे गाँव में चहल पहल का माहौल था।  हाइवे से गाँव की तरफ आने वाली सड़क की मरम्मत का काम चल रहा है, गाँव में भी पक्की सड़क बनाई जा रही है ।  गांव में साफ़ सफाई की जा रही है ।  गाँव के एकमात्र सरकारी स्कूल और पंचायत भवन की पुताई भी की जा रही है।  स्कूल और पंचायत भवन के लिए फर्नीचर, कंप्यूटर, कूलर, ठन्डे पानी की मशीन और बहुत सा सामान ट्रक में भरकर आ चूका है जिसे पुताई के बाद जमाना है।  गाँव के लोग बहुत खुश नज़र आ रहे हैं, सब दौड़-दौड़कर हर काम में अपना हाथ बांटे रहे हैं।  गाँव में लाइट का इंतज़ाम किया जा रहा है। सभी तैयारियां बहुत ज़ोरशोर से चल रही है।  2 दिन बाद भारत आने वाले विदेशी राष्ट्रपति के  दौरे के लिए इस गाँव को चुना गया है।  गाँव के लोग विदेशी राष्ट्रपति के स्वागत के लिए बहुत उत्साहित हैं ।  


लगभग सभी तैयारियां हो चुकी हैं।  सड़क बन गई है, स्कूल में नया फर्नीचर, कंप्यूटर, लाइब्रेरी और लेबोरेटरी और अन्य सामान जमाया जा चूका है, स्कूल का पुराना  फर्नीचर और सामान फिलहाल थोड़ी दूर एक मैदान में ले जाकर पटक दिया गया है । गाँव का सरकारी स्कूल किसी प्राइवेट कान्वेंट स्कूल की तरह लग रहा है।  गाँव के बच्चे स्कूल के नए रंग रूप को देखकर ख़ुशी से फूले नहीं समां रहे।  पंचायत भवन में भी नया फर्नीचर, कम्प्यूटर आदि सामान जैम चूका है, कमर्चारियों के काम करने के लिए  केबिन  बनाये गये है , पंचायत भवन किसी छोटे से कॉर्पोरेट ऑफिस जैसा नज़र आ रहा है। स्कूल में मास्टरजी विदेशी राष्ट्रपति का स्वागत और अभिवादन कैसे करना है बच्चों को सीखा रहे हैं ''Good Afternoon Sir ''  ''How are you Sir''   ''Your Most Welcome''   ''Thank You'' जैसे शब्द याद करा रहें हैं और उन्हें कब और किस तरह कहना है ये भी सीखा रहे हैं।  बच्चे बड़े उत्साह के साथ सब सीख रहे हैं।  पूरे गाँव उत्सव जैसा माहौल है, एक तो विदेशी राष्ट्रपति से मिलने की ख़ुशी और दूसरा गाँव में सड़क, लाइट, साफसफाई,  स्कूल आदि चीज़ों का विकास होना गाँववालों के लिए दोहरी ख़ुशी का कारण है।  

सब तैयारियां हो गई हैं अब गाँववालों को विदेशी राष्ट्रपति के आने का इन्तिज़ार है। विदेशी राष्ट्रपति के दौरे से एक दिन पहले शाम को शहर से कुछ अधिकारी आते हैं गाँव के सरपंच जी को कुछ समझाते हैं।  सरपंच जी गांववालों को इकठ्ठा करते हैं।  और कहना शुरू करते हैं ''जैसा की आप सबको मालूम है की कल हमारे गाँव में विदेशी राष्ट्रपति आने वाले हैं, उसके संबंध में सरकार और प्रशासन की और से कुछ विशेष दिशा निर्देश देने के लिये शहर से अधिकारीगण आये हैं, वो आपको कल क्या करना है समझायेंगे'' इतना कहकर सरपंच जी शहर से आये हुए अधिकारीयों की और देखते हैं।  फिर उनमे से एक अधिकारी उठकर आगे आते हैं और गाँववालों को समझाते हैं ''जब विदेशी राष्ट्रपति गाँव पहुंचे तो गाँव का कोई भी व्यक्ति उनके पास जाने की कोशिश न करे, कोई शोर हंगामा नहीं होना चाहिए, सब दूर से ही देखेंगे, गाँव का कोई भी बच्चा स्कूल नहीं आएगा, हम नहीं चाहते की ऐसा कुछ हो जिसका उन पर बुरा प्रभाव पड़े, ये सिर्फ गाँव ही नहीं पूरे देश की इज़्ज़त का सवाल है, इसलिए इन सब बातों का खास ख्याल रखा जाये'' इतना कहकर अधिकारी खामोश हो गए।  उनकी बात सुनकर गाँव के स्कूल के मास्टरजी बोले ''सर जब विदेशी राष्ट्रपति जी स्कूल में बच्चों से मिलने आ रहे हैं तो फिर बच्चों को कल स्कूल आने से क्यों मना किया जा रहा है ? '' मास्टरजी की बात सुनकर अधिकारी गुस्से में आ गए और बोले ''मास्टरजी आप अपना ज़्यादा दिमाग न लगाए जैसा निर्देश दिया जा रहा है वैसे ही करे, ये आदेश ऊपर से आये हैं उनका पालन होना ज़रूरी है, सरपंच जी सबको समझाइये कोई आदेश की अवहेलना न करे ये आपकी ज़िम्मेदारी है'' इतना कहकर अधिकारी चले गए।  किसी तरह बड़ी मुश्किल से सरपंच जी ने गाँववालों को आदेशों  का पालन करने के लिए समझाया। 

अगले दिन सुबह से पूरे गाँव में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी, जगह जगह पुलिस और सुरक्षकर्मीयों को तैनात किया गया था।  बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के पत्रकार/रिपोर्टर मौजूद हैं  गाँववालों  को मुख्य रास्ते, स्कूल और पंचायत भवन के क़रीब नहीं आने दिया जा रहा है, सिर्फ गाँव के कुछ खास लोगों और स्थानीय नेताओं के खास समर्थकों  ही आने दिया जा रहा है । विदेशी राष्ट्रपति के आने का समय दोपहर 12 बजे का है ।  सुबह लगभग 10 बजे दो बसें स्कूल के सामने आकर रूकती हैं। एक बस में से बहुत से बच्चे  उतरते हैं, ये बच्चे गाँव के सरकारी स्कूल की यूनिफार्म पहने हुए हैं, दूसरी बस में आये लोग गाँव के लोगों के जैसी  वेशभूषा में  हैं।  वहां मौजूद अधिकारी बस से आये हुए बच्चों और लोगों को कुछ निर्देश देते हैं उसके बाद बच्चों को स्कूल के अंदर ले जाया जाता  है। दूसरी बस से आये कुछ लोगों को पंचायत भवन की और ले जाया जाता है, बाक़ी लोग वहीँ रुक जाते हैं।  गाँववाले दूर से ये सब देख रहे हैं, अब उन्हें समझ में आ रहा है की क्यों गाँव के बच्चों को स्कूल आने के लिए मन किया गया था और क्यों गाँववालों को रोका जा रहा है।  गाँववाले दूर से ही खामोश होकर सब देख रहे हैं।  गाँव के बच्चे जो कल तक बहुत खुश और उत्साहित थे आज उनके चेहरों पर मायूसी छाई हुई है।  

स्थानीय सांसद, विधायक, कलेक्टर और अन्य  अधिकारी भी वहां  पहुँच चुके हैं।  थोड़ी देर बाद सूचना आती है की विदेशी राष्ट्रपति बस गाँव पहुँचने ही वाले हैं, अधिकारी, पुलिस और सुरक्षाकर्मी  सभी अलर्ट हो जाते हैं।  थोड़ी ही देर में आगे पीछे पुलिस की गाड़ियों के साथ बीच में 2-3 बड़ी गाड़ियां भी गाँव में पहुंच जाती हैं।  गाड़ी के रुकते ही सुरक्षाकर्मी गाड़ियों को घेर लेते हैं।  पहले गाडी से मुख्यमंत्री उतरते हैं, बाक़ी गाड़ियों में से राष्ट्रपति जी  के कुछ सहयोगी, अन्य मंत्री और वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी उतरते हैं ।  मुख्यमंत्री हाथ जोड़कर सबका अभिवादन करते हैं।  फिर विदेशी राष्ट्रपति उतरते हैं।  विदेशी राष्ट्रपति चारों तरफ नज़रें घुमाकर देख्रते हैं फिर हाथ हिलकर सबका अभिवादन करते हैं।  स्थानीय सांसद और विधायक राष्ट्रपति जी को गुलदस्ता देकर स्वागत करते हैं।  मुख्यमंत्री विदेशी राष्ट्रपति को स्कूल के गेट तरफ चलने के लिए कहते हैं।  स्कूल के गेट पर वही लोग जो सुबह बस में बैठकर आये थे हांथों में  फूलमाला  लिए मौजूद हैं, उन्ही में से एक महिला हाथ में आरती का थाल लिए आगे बढ़ती है, विदेशी राष्ट्रपति की आरती उतारकर उन्हें तिलक लगाया जाता है और फिर हार पहनाकर स्वागत किया जाता है। फिर विदेशी राष्ट्रपति को स्कूल के अंदर ले जाया जाता है, उन्हें कलेक्टर उन्हें अंग्रेजी में स्कूल के बारे में जानकारी देते हैं, मुख्यमंत्री जी को अंग्रेजी आती हैं इसलिए वो बातचीत में मुस्कुराकर केवल Yes और Good  जैसे शब्दों का ही इस्तेमाल कर रहे हैं।  फिर विदेशी राष्ट्रपति को एक क्लास की और ले जाया जाता है उनके आने की आहट सुनते ही क्लास में मौजूद टीचर बच्चों को अंग्रेजी में समझते हुए बोर्ड पर कुछ लिखने लगते हैं।  विदेशी राष्ट्रपति के क्लास में दाखिल होते ही बच्चे खड़े होकर अंग्रेजी में उनका अभिवादन करते हैं। राष्ट्रपति जी बच्चों की और मुस्कुराकर देखते हुए उनके अभिवादन का जवाब देते हैं।  राष्ट्रपति क्लास में मौजूद टीचर से हाथ मिलाते हुए बोर्ड की तरफ देखते हैं बोर्ड पर विज्ञान के कुछ समीकरण (Equations) लिखे हुए हैं।  

कलेक्टर बच्चों की तरफ मुखातिब होकर कहते हैं ''बच्चों आपका कोई भी सवाल हो तो आप महामहिम राष्ट्रपति जी से पूछ सकते हैं'' एक बच्चा खड़ा होकर अंग्रेजी में राष्ट्रपति जी का अभिवादन करता हुए उनसे ग्लोबल वार्मिंग के बारे में उनके विचार के बारे में पूछता है।  राष्ट्रपति जी मुस्कुराकर उसके सवाल का जवाब देते हैं, फिर इसी तरह बच्चे आर्थिक, सामाजिक, विज्ञान, अंतरिक्ष, चिकित्सा, साहित्य, विभिन्न अन्तराष्ट्रीयता विषयों के बारे में राष्ट्रपति जी के साथ संक्षिप्त चर्चा करते हैं।  विदेशी राष्ट्रपति गाँव के बच्चों की अंग्रेजी और विभिन्न विषयों के बारे में उनकी रुचि और ज्ञान देखकर बहुत प्रभावित होते हैं और बच्चों की प्रशंसा करते हैं और उन्हें इसी तरह आगे भी पढ़ाई में मन लगाने और  कुछ प्रेरक प्रसंग बताकर प्रेरित करते हैं।  साथ ही बेहतरीन शिक्षा  व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री जी की भी प्रशंसा करते हैं।  स्कूल के प्राचार्य राष्ट्रपति जी को गांधीजी का चित्र और कुछ किताबे भेंट करते हैं।  

फिर राष्ट्रपति जी को गाँव के पंचायत भवन में ले जाया जाता है, वहां भी उनका स्वागत किया जाता है।  गाँव के पंचायत भवन में कमर्चारियों को कंप्यूटर/लैपटॉप पर काम करता हुआ देखकर काफी प्रभावित होते हैं। कलेक्टर उन्हें गाँव के विकास से सम्बंधित कार्यों के बारे में बताते हैं।  विभिन्न औपचारिकताओं के बाद राष्ट्रपति जी की वापसी का समय हो जाता है।  राष्ट्रपति जी बड़ी सी गाडी में बैठकर वापस चले जाते हैं, उनके साथ ही मुख्यमंत्री और अन्य मंत्री भी वापस चले जाते हैं।   सांसद, विधायक, पुलिस/प्रशासनिक अधिकारी  धीरे-धीरे सभी लोग वापस लौट रहे हैं।  थोड़ी ही देर में सुबह वाली दोनों बसें भी आ जाती हैं, और जो बच्चे और लोग सुबह आये थे वो भी बस में जाकर बैठने लगते हैं फिर वो बस भी वापस चली जाती है।  पुलिस और सुरक्षकर्मी भी वापस जा चुके हैं ।  गाँववाले दूर से ही मायूस होकर यह सब देख रहे हैं। स्कूल के मास्टरजी गाँववालों के पास जाते हैं और उन्हें तसल्ली देते हुए समझाते है कि भले ही बच्चों को आज विदेशी राष्ट्रपति जी से नहीं मिलने दिया गया हो लेकिन कम से कम उनके आने से स्कूल का विकास तो हो ही गया है इसका फायदा भी तो गाँव के बच्चों को ही मिलेगा और इसी बहाने गाँव में सड़क, साफ़ सफाई जैसा काफी कुछ काम भी तो हुआ है।   

अभी गाँव के लोग यही चर्चा कर ही रहे थे की 2 ट्रक गाँव में दाखिल होते हैं एक ट्रक स्कूल के सामने रुक जाता है और दूसरा ट्रक पंचायत भवन की तरफ चला जाता है।  ट्रक में कुछ लोग उतरते हैं और स्कूल के अंदर जाकर फर्नीचर और अन्य सामान उठाना शुरू कर देते हैं।  अभी तक दूर से सब देख रहे गांववाले ये देखकर गुस्सा हो जाते हैं और कुछ लोग मास्टरजी को साथ लेकर वहां पहुंचकर सामान उठा रहे लोगों से पूछते हैं कि ''ये सब क्या हो रहा है ? स्कूल का सामान क्यों वापस ले जा रहे हो ?'' वो लोग कहते हैं ''हमें ऊपर से आदेश मिला है।'' यह सुनकर गाँववाले उन लोगों से बहस करने लगते हैं।  मास्टरजी कहते हैं ''ज़रा रुकिए में सरपंच जी से इस बारे बात करता हुं''मास्टरजी जेब से मोबाइल निकलकर सरपंच जी फ़ोन लगते हैं और उन्हें सब बताते हैं।  सरपंच जी कहते हैं ''उन लोगों को सामान वापस ले जाने दो, ऊपर से यही आदेश आया है, पंचायत भवन का सामान भी वापस ले जाया जा रहा है, हम लोग इसमें कुछ भी नहीं कर सकते'' यह कहकर फ़ोन काट देते हैं।   मास्टरजी गांववालों को समझाने की कोशिश करते हैं लेकिन वो नहीं मानते और  कहते हैं ''कुछ भी हो स्कूल का सामान हम नहीं ले जाने देंगे'' धीरे धीरे गाँव के और लोग भी इकठ्ठे होने लगते हैं और सामान ले जाने वाले लोगों को घेरकर खड़े हो जाते हैं  गाँव के लोगों को इकठ्ठा देख सामान उठाने वालों में से एक आदमी किसी को फ़ोन लगाकर कुछ कहता है।  थोड़ी ही देर में पुलिस की गाड़ी आ जाती है।  गाडी में से 3-4 पुलिसवाले उतरकर कहते है ''ये क्या तमाशा लगा रहा है ? तुम लोग सरकारी काम में क्यों रूकावट डाल रहे हो ? चलो भागो सब यहाँ से नहीं तो अभी सबको अंदर कर दूंगा'' गाँववाले मास्टरजी की तरफ देखते हैं, मास्टरजी आगे बढ़कर पुलिस वाले से कहते हैं ''सर दरअसल बात ये है की यह सारा सामान स्कूल के लिए आया था, अब ये लोग वापस ले जाने की बात कर रहे हैं इसी बात का हम सब विरोध कर रहे हैं, आप ही सोचिये पहली बार स्कूल के लिए कुछ अच्छा काम हुआ है, इससे बच्चों को बहुत ज़्यादा फ़ायदा हो सकता है, अगर ये सब वापस चला जायेगा तो बच्चों को फिर से पहले की तरफ परेशानी होगी और जल्दबाज़ी में नए फर्नीचर को ज़माने लिए जिस तरह से पुराने फर्नीचर को हटाकर दूर मैदान में रखा गया था उसकी वजह से बहुत सा फर्नीचर टूट भी गया है'' अभी मास्टरजी अपनी पूरी बात कह भी नहीं पाए थे की पुलिस वाले ने कहा ''तुम्हारे लेक्चरर की ज़रूरत नहीं है, तुम ज़्यादा नेता बनने की कोशिश करोगे तो तुम्हे ही अंदर कर देंगे'' फिर गांववालों की और देखकर कहा ''चलो जाओ सब यहाँ से नहीं तो तुम सब पर सरकारी काम में रूकावट डालने का केस बना ढुंगा, साड़ी ज़िन्दगी जेल में सड़ते रहोगे'' मास्टरजी और  गांववाले मायूसी के साथ वापस लोटने लगते हैं ।  फिर वो पुलिसवाला जेब से फ़ोन निकालकर कही फ़ोन करके कहता है ''सर आप बिलकुल चिंता न करे, हमने सब संभाल लिया है, सब कुछ ठीक है गाँववालों को भी समझा दिया है'' कहकर फ़ोन काटकर ट्रक में आये लोगों से कहा ''जल्दी जल्दी सारा सामान ट्रक में भरो और ले जाओ।  थोड़ी ही देर में सारा सामान ट्रक में भरकर वापस जा चूका था।  



विदेशी राष्ट्रपति शहर में मौजूद हैं कल उनका अपने देश वापसी का प्रोग्राम है। शहर में विदेशी राष्ट्रपति के लिए विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। एक पत्रकार ने उनसे पूछा ''सर हमारे देश की किस चीज़ ने आपको सबसे ज़्यादा प्रभावित किया ?'' विदेशी राष्ट्रपति ने जवाब दिया ''मुझे यहाँ का एजुकेशन सिस्टम बहुत पसंद आया, मैं गाँव के बच्चों से मिला उनका इंग्लिश और विभिन्न विषयों पर नॉलेज देखकर  बहुत ज़्यादा प्रभावित हुआ, यहाँ की सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है'' विदेशी राष्ट्रपति की बात सुनकर लोग तालियां बजाते हैं।

अगले दिन विदेशी राष्ट्रपति वापस अपने देश लोट गए हैं।  अख़बारों में  हैडलाइन है ''विदेशी राष्ट्रपति सरकार के कार्यों से हुए प्रभावित''''विदेशी राष्ट्रपति ने की सरकार के विकास कार्यों की प्रशंसा'' । दूसरी और गांव में  स्कूल का पुराना टूटा फूटा फर्नीचर और सामान वापस स्कूल में लाकर जमाया जा रहा है।


लेखक : शहाब ख़ान  'सिफ़र'

हैसियत  - (ग़रीबी और मुफलिसी  के दर्द  को बयान करती कहानी - लेखक : डॉ. ज़फर खान)

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