चुनाव - (कहानी) - Nazariya Now

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Tuesday, August 1, 2017

चुनाव - (कहानी)

शहर में म्युनिसिपल चुनाव की घोषणा हो चुकी थी। पूरे शहर में आजकल इसी की चर्चा हो रही है।  स्थानीय नेता अपने अपने चुनावी टिकट की जुगाड़ में लगे हुए हैं। शहर की एक कॉलोनी विकास नगर में भी लोगों में चुनावी चर्चा चल रही है।  मोहल्ला समिति की बैठक में म्युनिसिपल चुनाव के बारे में चर्चा हो रही है, क्षेत्र  के लोग अपनी अपनी राय दे रहे हैं।  शर्मा जी कहते हैं ''पिछले पार्षद ने 5 सालों में कोई ढंग का काम नहीं किया है, सड़क की हालत तो देखिये जगह जगह गद्दे हैं'' लोग उनकी हाँ में हाँ मिला रहे हैं।  फिर जावेद भाई कहते हैं ''शर्मा जी सही कह रहे हैं, पूरी कॉलोनी में न वक़्त पर साफ़ सफाई होती है, न बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिया, सब वोट लेकर भूल जाते हैं '' बाक़ी लोग भी अपने विचार व्यक्त करते हैं और तय  होता है की इस बार चुनाव में कॉलोनी के ही किसी व्यक्ति को निर्दलीय उम्मीदवार बनाया जाये ताकि वो जीतने के बाद कॉलोनी के लिए काम कर सके। काफी लोगों के नामों पर चर्चा होने के बाद सूर्यकांत जी के नाम पर सब सहमत होते हैं। सूर्यकान्त जी पड़े लिखे ईमानदार आदमी हैं।  वो एक समाज सेवक हैं,  सज्जन आदमी हैं, हमेशा सबकी मदद के लिए तैयार रहते हैं,  कॉलोनी के लोग सूर्यकान्त जी से बात करके उन्हें म्युनिसिपल पार्षद का चुनाव लड़ने के लिए मना लेते हैं।

सूर्यकान्त जी के व्यवहार कारण पूरी कॉलोनी में लोग उनका बहुत सम्मान करते हैं। पूरे क्षेत्र में काफी लोकप्रिय हैं।  सूर्यकान्त जी का चुनाव प्रचार शुरू हो गया है, उन्हें क्षेत्र के लोगों का खूब जनसमर्थन मिल रहा है, कॉलोनी के लोग उनकी जीत के प्रति सुनिश्चित हैं। राजनैतिक पार्टियों को सूर्यकान्त जी के चुनाव लड़ने के बारे में मालूम होता है तो उन्हें चुनाव से पहले ही अपनी हार साफ़ नज़र आने लगती है, उनके पास ऐसा कोई उम्मीदवार नहीं है जो वार्ड चुनाव में सूर्यकान्त जी को टक्कर दे सके।  सूर्यकान्त जी को अपना नाम वापस लेने के लिए राजनैतिक पार्टियों की और से कई तरह के प्रलोभन दिए जाते हैं, लेकिन वो ईमानदार आदमी हैं वो किसी लालच में नहीं आते।  काफी कोशिशों के बाद भी जब राजनैतिक पार्टी सूर्यकान्त जी को चुनाव से हटने के लिए नहीं मना पाती तो वो दूसरा रास्ता निकलते हुए विकास नगर के नामी बदमाश मुकेश  को अपना उम्मीदवार घोषित कर देते हैं।  मुकेश क्षेत्र का गुंडा है उसके खिलाफ पुलिस में कई केस दर्ज हैं, वो कई तरह के गैरकानूनी काम करता है, राजनैतिक संरक्षण प्राप्त होने के कारण  पुलिस उसके खिलाफ कार्यवाही नहीं कर पाती है।  पूरे क्षेत्र में उसका आतंक है लोग उससे डरते हैं।

मुकेश राजनैतिक पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं।  जिस गुंडे मुकेश से लोग बात करने से घबराते थे वही मुकेश घर घर जाकर लोगों से हाथ जोड़कर वोट के लिए अपील कर रहा है। मुकेश के उम्मीदवार बनने से क्षेत्र के लोग थोड़े भयभीत हैं।  मुकेश के साथी क्षेत्र के लोगों को समझा रहे हैं की मुकेश अब सारे गलत काम छोड़कर राजनीति में गया है, चुनाव जीतकर वो लोगों के लिए काम करना चाहता है इसलिए उसे ही वोट दें क्योंकि अगर वो चुनाव हारा तो फिर पुराने काम शुरू कर देगा इसलिए उसका चुनाव जीतना क्षेत्र के लोगों के लिए ज़रूरी है।  हालाँकि ये समझाइश एक अप्रत्यक्ष रूप से दी जा रही है धमकी ही थी, क्षेत्र के लोग भी समझाइश में छुपी हुई धमकी को समझ रहे हैं।  चुनाव का परिणाम आ चूका है। मुकेश रिकॉर्ड वोटों से चुनाव जीत गया है कल तक जो मुकेश क्षेत्र का बदनाम गुंडा था वो अब पार्षद बन गया है और सूर्यकांत जी की चुनाव में ज़मानत तक ज़ब्त हो गई है।
एक और ईमानदार आदमी चुनाव हार गया है और फिर हम कहते हैं राजनीति में ईमानदार और अच्छे लोग क्यों नहीं आते ? 

लेखक : शहाब ख़ान  'सिफ़र'

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