अंधभक्ति की आग में जलता देश - Nazariya Now

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Friday, August 25, 2017

अंधभक्ति की आग में जलता देश

आज फिर देश जल रहा है, खुद को एक बलात्कारी बाबा का भक्त कहने वाले कानून और संविधान की धज्जियाँ उड़ाते हुए सड़कों पर आतंक मचा रहे हैं, गाड़ियां जलाई जा रही हैं,  जगह-जगह आग लगाईं जा रही है, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाया जा रहा है, अभी तक लगभग 30 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, सैकड़ों लोग घायल हैं, करोड़ों का नुकसान हुआ है।  लगभग 350 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है।  इंटरनेट भी बंद है।  देश के चार राज्यों में दहशत का माहौल है।  दिल्ली और उत्तर प्रदेश में भी कुछ स्थानों पर हिंसा की घटना की ख़बरें हैं। इन आतंकियों ने मीडिया पर भी हमला किया।  इन सबके बीच सरकार मूकदर्शक बनी हुई है, हर बात में ट्वीट करने वाले प्रधानमंत्री देश में फेल रहे आतंक पर चुप्पी साधे बैठे हुए हैं।  सरकार अपना वोटबैंक बचाने की चिंता में इन आतंकियों पर कड़ी कार्यवाही नहीं कर रही है। 



देश में जो ये आतंक की आग फ़ैल रही है उसकी ज़िम्मेदार सरकार भी है, जब एक दिन पहले से ही इस तरह की हिंसा की आशंका थी तो पहले ही शहर में आरोपी के समर्थकों को इकठ्ठा क्यों होने दिया गया ? जब रेप के आरोपी बाबा राम रहीम के समर्थक खुलेआम आतंक फैलाने की धमकियाँ दे रहे थे तो उन्हें फ़ौरन गिरफ्तार किया जाना था, ख़बरों के अनुसार लगभग 600 गाड़ियों का काफिला आरोपी को कोर्ट लेकर पहुंचा है तो सरकार और प्रशासन ने इतने बड़े काफिले को कोर्ट तक जाने ही क्यों दिया ? आतंक फैलाने की धमकी देने वालों को पहले ही गिरफ्तार किया जाना चाहिए था।  मीडिया आतंक फैला रहे लोगों को भक्त कह रहा है जबकि इन्हे भक्त नहीं बल्कि आतंकी कहना चाहिए।  ये लोग कानून और संविधान का तोड़कर देश में आतंक फैला रहे हैं, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं, देश में भय का माहौल बना रहे हैं इन्हे भक्त कहना बिलकुल गलत हैं ये आतंकी हैं, इनके साथ एक आतंकी जैसा सुलूक होना चाहिए, सरकार को चाहिए की पुलिस और सेना को इनके खिलाफ सख्त कार्यवाही करने को कहे।  

रेप के आरोपी गुरमीत राम रहीम के समर्थक कानून और संविधान तोड़कर आतंकी बन गए हैं, संविधान से ज़्यादा विश्वास उन्हें आरोपी  पर है, बलात्कार जैसे गंभीर अपराध का दोषी होने के बाद भी ये लोग उसका समर्थन कर रहे हैं, ये अन्धविश्वास का नतीजा है, आज देश में ऐसे ढोंगी बाबाओं की कमी नहीं है, ये ढोंगी धर्म के नाम पर लोगों का खासतौर पर महिलाओं का शोषण करते हैं, आसाराम का केस भी इसका एक उदाहरण है न जाने वो कब से और कितनी मासूम लड़कियों के साथ रैप किया होगा लेकिन उसके प्रभाव के कारण किसी ने पुलिस में एफ.आई.आर  दर्ज कराने  की हिम्मत ही नहीं की।  एक लड़की ने हिम्मत की और आज आसाराम जेल की सलाखों के पीछे है, उस लड़की की हिम्मत की प्रशंसा करनी होगी बिना डरे उसने बहुत हिम्मत का काम किया वरना और न जाने कितनी मासूम लड़कियों को अपनी हवस का शिकार बनाता। इतना सब होने के बाद भी आसाराम के समर्थकों की कमी नहीं है वो उसके गलत कामों पर पर्दा डालना चाहते हैं उसे निर्दोष बताते हैं, आसाराम के समर्थन में एक न्यूज़ चैनल सुदर्शन न्यूज़ तो खुलकर सामने आया है।   वर्ष 2014 में हिसार में भी एक ढोंगी बाबा रामपाल ने अपने समर्थकों के साथ उस समय पुलिस और सेना पर हमला किया जब वो उसे गिरफ्तार करने के लिए गई।  रामपाल को उसके आश्रम से गिरफ्तार करने में पुलिस और सेना को कई दिन लग गए, बड़ी मुश्किल से उसे गिरफ्तार किया जा सका, गिरफ़्तारी के बाद उसके आशाराम से बड़ी मात्रा में हथियार बरामद हुए। देश में और भी ऐसे कई ढोंगी हैं जो धर्म का चोला पहनकर गलत काम कर रहे हैं।   

इस तरह की घटनाओं के लिए सरककर/राजनेता और अंधविश्वासी लोग ज़िम्मेदार हैं। लोग बिना सोचे समझे पाखंडियों बाबाओं के जाल में फंस जाते हैं।  अंधविश्वासी लोगों को इन ढोंगियों पर इतना ज़्यादा भरोसा होता है की वो इनके गलत कामों को भी चमत्कार मानकर समर्थन करते हैं और जब ये ढोंगी बाबा कानून के शिकंजे में फंसते हैं तो ये अंधविश्वासी लोग  संविधान और कानून की परवाह किये बग़ैर सड़कों पर आतंकी बनकर उतर आते हैं।  दूसरी तरफ राजनेता वोटबैंक के लालच में इन ढोंगियों को बढ़ावा देते हैं क्योंकि वो जानते हैं कि इन ढोंगियों के समर्थक चुनाव में उनके लिए वोटबैंक का काम करतेँगे ।  धर्म का चोला ओढे ये बाबा बाक़ायदा चुनाव में राजनैतिक पार्टियों का  प्रचार करते हैं बदले में सरकार बन जाने पर उन्हें अपने आश्रम के लिए ज़मीन और अन्य सुविधायें दी जाती हैं,  कई बार तो राजनैतिक पार्टियां ऐसे बाबाओं को चुनाव में टिकट भी देती हैं।  बार बार देश की तरक़्क़ी की बात होती है वहीँ दूसरी और इस तरह की घटनाओं से देश उल्टा पीछे की तरफ़ चला जाता है।  जब तक देश में इस तरह की घटनाओं पर रोक नहीं लग सकती देश की तरक़्क़ी की राह बहुत मुश्किल है।  लोगों को अन्धविश्वास छोड़कर इन ढोंगी बाबाओं के खिलाफ आगे आना होगा और साथ ही राजनेता और सरकार को अपना वोटबैंक का लालच छोड़कर ऐसे लोगों पर कड़ी कार्यवाही करनी होगी तभी देश की तरक़्क़ी मुमकिन हैं, तभी सपनों का भारत बन पायेगा।  
 
 शहाब ख़ान  'सिफ़र'
©Nazariya Now

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