गुजरात फाइल्स - लीपापोती का पर्दाफाश - Gujarat Files : Anatomy of a Cover Up - Nazariya Now

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Monday, September 25, 2017

गुजरात फाइल्स - लीपापोती का पर्दाफाश - Gujarat Files : Anatomy of a Cover Up

पत्रकार राना अय्यूब जी की किताब गुजरात फाइल्स इंग्लिश, उर्दू, पंजाबी, कन्नड़ और अन्य कई भाषाओं में आने के बाद अब हिंदी एडिशन भी उपलब्ध है।  गुजरात फाइल्स में राणा अय्यूब जी काम बहुत ही सराहनीय है।  इस किताब में राना अय्यूब जी ने अपने स्टिंग ऑपरेशन द्वारा पर्दाफाश किया कि किस तरह अपनी राजनीतिक महत्वकांशा को पूरा करने और अपने दिलों में भरी नफरत को हिंसा द्वारा ज़ाहिर करने के लिए गुजरात में राजनेताओं द्वारा खुनी खेल खेला गया था।  राजनीती के सर्वोच्च पद तक पहुँचने के लिए कोई व्यक्ति किस हद तक गिर सकता है उसे बाखूबी से उजागर किया है।  किस तरह से गुजरात में पुलिस  अधिकारियों  को असंवैधानिक कार्य करने के लिए मजबूर किया गया और जिन अधिकारियों  ने ऐसा करने से मन किया उन्हें किस तरह से दरकिनार किया गया उसका भी खुलासा किया है।  अपने मिशन के लिए राना अय्यूब जी ने मैथिली त्यागी नाम से एक नकली पहचान बनाई और अमेरिका से गुजरात में फिल्म बनाने आई एक फिल्मकार के रूप में राजनेताओं और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारिओं से मिलकर उनसे सच्चाई उगलवाई। किताब  एक के बाद एक सनसनीखेज खुलासे करती है और ऊंचे ओहदों पर बैठे लोगों को बेनक़ाब करती है।

राना अय्यूब  जी ने अपनी जान को खतरे में डालकर पुरे मिशन को अंजाम दिया है, इस मिशन में हर पल उनकी जान को खतरा है ये सब जानते हुए भी उन्होंने सच को सामने लाने के लिए ये खतरा मोल लिया, उनकी हिम्मत और जज़्बा वाक़ई में क़ाबिले तारीफ हैं।  आज के दौर  में जब मिडिया और पत्रकारों का काम सिर्फ सरकार की चापलूसी करने तक ही सीमित हो गया है ऐसे में राना अय्यूब  जी की  किताब अँधेरे में उम्मीद की  किरण साबित होती है।  आज देश में आदर्शवादी, निष्पक्ष  और ईमानदार पत्रकार कम ही हैं, देश में मीडिया की वर्तमान स्थिति को देखते हुए देश के जाने माने पत्रकार रविश कुमार जी ने वर्तमान मीडिया को एक बहुत ही दिलचस्प नाम दिया है ''गोदी मीडिया''।  राना अय्यूब  जी के स्टिंग ऑपरेशन को किताब के रूप में पब्लिश करने के लिए  कोई भी पब्लिशर तैयार नहीं था सब इसे पब्लिश करने से घबरा रहे थे क्योंकि सच का साथ देने के लिए बहुत हिम्मत की ज़रूरत होती है लेकिन अफ़सोस की बात है की पब्लिशर वो हिम्मत नहीं जुटा पाए, ऐसे में राना अय्यूब  जी ने सच को दुनिया के सामने लाने के लिए खुद ही इसे पब्लिश करने का फैसला लिया और किताब का पहला संस्करण इंग्लिश में पब्लिश किया।  अभी तक गुजरात फाइल में उजागर किये गए तथ्यों के बारे में किसी भी अधिकारी या राजनेता ने उनका खंडन नहीं किया हैं और न ही राना अय्यूब जी पर कोई मुक़दमा दायर किया है क्योंकि वो जानते हैं की राना अय्यूब जी के पास उन सभी के वीडियो / ऑडियो टेप सबूत के तौर पर मौजूद हैं ऐसे में कोई अदालती कारवाही करेगा तो वो खुद ही फंस सकता है इसलिए शायद अभी तक सभी खामोश हैं।  

गुजरात फाइल के बारे में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बी.एन. श्रीकृष्ण कहते हैं ''राजनीतिक बेईमानी के मौजूदा दौर में  साहसपूर्ण खोजी पत्रकारिता की मिसाल''

 बिज़नेस स्टैण्डर्ड में प्रकाशित आईएएनएस ने अपनी समीक्षा में गुजरात फाइल के बारे में लिखा '' यह किताब खोजी पत्रकारिता का चरम है।  राणा अय्यूब ने जो किया उसे करने के लिए उठाये जोखिमों के लिए हमें उन्हें सलाम करना चाहिए।  जब उन्होंने किताब को पेश किया तो यह भी ज़ाहिर किया की कोई प्रकाशक किताब को प्रकाशित करने को तैयार नहीं था और इसलिए उन्होंने खुद ही इसे प्रकाशित करने का फैसला किया।  अगर पुलित्जर के पास विदेश में साहसी पत्रकारिता के लिए कोई पुरस्कार होता तो वह निसंदेह राना को ही मिलता'' ।  

 आउटलुक ने गुजरात फाइल्स के बारे में लिखा है ''एक ऐसी किताब जो सत्ता में सबसे ऊंचे ओहदों पर बैठे लोगों के बारे में असहज रहस्यों को उजागर करता हो और फिर उसे खुद प्रकाशित करना क्योंकि स्थापित प्रकाशन घराने उससे पीछे हट जाते हैं, यह वाक़ई बड़ी हिम्मत व संकल्प का काम है।  राना अय्यूब में यह हिम्मत भरपूर है।  जो लोग न्याय के तंत्र व  संस्थानों की ईमानदारी की चिंता करते हैं गुजरात फाइल्स उनकी आँखे खोल सकती है''।

गुजरात फाइल्स के बारे में रविश कुमार कहते हैं  ''राना अय्यूब की किताब को पत्रकारिता के संस्थानों में पड़ने के लिए अनिवार्य बना देना चाहिए खासतौर पर पत्रकार बनने की इच्छुक महिलाओं के लिए, जो गुजरात फाइल्स और राना अय्यूब के कॅरियर से सहस की पत्रकारिता और आदर्श ईमानदारी के सबक ले सकती हैं''।

   हिंदुस्तान टाइम्स  ने अपनी समीक्षा में कहा ''अय्यूब में साफगोई है।  उनके भीतर दोषी को बेनक़ाब करने और उन अदृश्य रेखाओं को खोज निकलने की अदम्य इच्छा है जो ताक़तवर लोगों को हत्याओं को अंजाम देने वाले लोगों से जोड़ती है''। 

 डी.एन.ए. का कहना है ''गुजरात फाइल्स...  एक साहसिक किताब है।  एक ऐसे समय में जब ज़्यादातर लोग ताक़तवर लोगों के सामने सच कहने से डरते हैं, अय्यूब ने कहावती अंदाज़ में बैल को उसके सींगों से पकड़ने की कोशिश की है''।  

गुजरात फाइल्स आने के बाद सोशल मीडिया पर राजनेताओं के समर्थकों द्वारा राना अय्यूब जी को बहुत ज़्यादा ट्रोल किया जा रहा है लेकिन राना अय्यूब जी बिना डरे उन सबका सामना कर रही हैं।  उनकी हिम्मत और हौसले की जितनी तारीफ़ की जाये कम है।  राना अय्यूब को हिम्मत, साहस और हौसले की एक बेहतरीन मिसाल कह सकते हैं। मेरे विचार में हर देशवासी को यह किताब ज़रूर पड़ना चाहिए ताकि सब सच्चाई से वाक़िफ़ हो सकें।  गुजरात फाइल्स हिंदी,  इंग्लिश, उर्दू, पंजाबी, कन्नड़ और अन्य कई भाषाओं में उपलब्ध है, हिंदी एडिशन का प्रकाशन ''गुलमोहर किताब'' ने किया है, गुजरात फाइल्स विभिन ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट Amazon, Flipkart, Pharos Media  सहित कई जगह उपलब्ध है।

शहाब ख़ान
©Nazariya Now

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