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Wednesday, May 24, 2017

मानहानि मुक़दमे - सवाल प्रतिष्ठा या पैसे का ?

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा लगाया गया मानहानि का मुक़दमा दिल्ली की अदालत में काफी समय से चल रहा है।  अब वित्त मंत्री ने अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ मानहानि का एक और मुक़दमा दायर कर दिया है। मुक़दमे में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने 10 करोड़ का दावा किया है।  पहले वाले मुक़दमे में भी 10 करोड़ का दावा किया गया था। राजनीति में आरोप प्रत्यारोप लगते रहते हैं और राजनेता एक दूसरे पर मानहानि का करते रहते हैं।  राजनेताओं द्वारा एक दूसरे पर मानहानि के मुक़दमे की दावा राशि आमतौर पर करोड़ों में होती है। सवाल ये उठता है की करोड़ों की ये राशि किस आधार पर तय की जाती है ? इस राशि को तय करने का पैमाना क्या होता है ?  


सबसे पहले यह समझना होगा की मानहानि क्या है ? भारतीय दंड संहिता में मानहानि को धारा 499 में इस तरह परिभाषित किया गया है : जो कोई बोले गए, या पढ़े जाने के लिए आशयित शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्य निरूपणों द्वारा किसी व्यक्ति के बारे में कोई लांछन इस आशय से लगाता या प्रकाशित करता है कि ऐसे लांछन से ऐसे व्यक्ति की ख्याति की अपहानि की जाए या यह जानते हुए या विश्र्वास करने का कारण रखते हुए लगाता या प्रकाशित करता है कि ऐसे लांछन से ऐसे व्यक्ति की ख्याति की अपहानि होगी अपवादों को छोड कर यह कहा जाएगा कि वह उस व्यक्ति की मानहानि करता है। यहाँ मृत व्यक्ति को कोई लांछन लगाना मानहानि की कोटि में आता है, यदि वह लांछन उस व्यक्ति के जीवित रहने पर उस की खयाति की अपहानि होती और उस के परिवार या अन्य निकट संबंधियों की भावनाओं को चोट पहुँचाने के लिए आशयित हो। किसी कंपनी, या संगठन या व्यक्तियों के समूह के बारे में भी यही बात लागू होगी। व्यंगोक्ति के रूप में की गई अभिव्यक्ति भी इस श्रेणी में आएगी। इसी तरह मानहानिकारक अभिव्यक्ति को मुद्रित करना, या विक्रय करना भी अपराध है।लेकिन किसी सत्य बात का लांछन लगाना, लोकसेवकों के आचरण या शील के विषय में सद्भावनापूर्वक राय अभिव्यक्ति करना तथा किसी लोक प्रश्र्न के विषय में किसी व्यक्ति के आचरण या शील के विषय में सद्भावना पूर्वक राय अभिव्यक्त करना तथा न्यायालय की कार्यवाहियों की रिपोर्टिंग भी इस अपराध के अंतर्गत नहीं आएँगी। इसी तरह किसी लोककृति के गुणावगुण पर अभिव्यक्त की गई राय जिसे लोक निर्णय के लिए रखा गया हो अपराध नहीं मानी जाएगी। मानहानि के इन अपराधों के लिए धारा 500 ,501  व 502  में दो वर्ष तक की कैद की सजा का प्रावधान किया गया है। लोक शांति को भंग कराने को उकसाने के आशय से किसी को साशय अपमानित करने के लिए इतनी ही सजा का प्रावधान धारा 504  में किया गया है।  

प्रतिष्ठा और मान सम्मान की बात की जाये तो सही मायनो में वो अनमोल होती है उसका कोई मोल नहीं लगाया जा सकता, लेकिन  राजनेता अपनी प्रतिष्ठा का मोल करोड़ों का मानते  हैं।  यहाँ सिर्फ प्रतिष्ठा का मोल ही करोड़ों में होता है, वहीँ अगर देश में किसी तरह की प्राकृतिक या आप्रकर्तिक दुर्घटना में किसी आम आदमी की की जान की चली जाती है तो है तो उसे 1 - 2 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया जाता है।  एक तरफ राजनेता की प्रतिष्ठा करोड़ों में है वही दूसरी और एक व्यक्ति की जान का मोल सिर्फ 1 - 2 लाख माना जाता है।  ऐसे ही जब कोई सैनिक देश की रक्षा करते हुए शहीद होता है तो उसके परिवार को भी कुछ लाख रुपये की मदद दी जाती हैं यहाँ भी शहादत का मोल सिर्फ कुछ लाख रुपये लगाया जाता है। मानहानि के मुक़दमे होते रहते हैं सवाल ये है की अगर मुक़दमा करने वाला मुक़दमा जीत जाता है और उसे दावा राशि मिल जाती है तो क्या उसकी खोई हुई प्रतिष्ठा वापिस मिल जाएगी  ? अपनी प्रतिष्ठा मान सम्मान को पैसे से तोलना कितना सही है ?

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