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Sunday, January 28, 2018

इंटरव्यू : एक खास मुलाक़ात कॉमिक्स आर्टिस्ट शम्भू नाथ महतो जी के साथ - An Exclusive Interview with Shambhu Nath Ji

कॉमिक्स कलाकारों / लेखकों / प्रकाशकों के इंटरव्यू की विशेष श्रंखला में आज एक खास इंटरव्यू में हम आपको रूबरू करवा रहे हैं शम्भू नाथ महतो जी से।  शम्भू नाथ महतो जी ने अपने टैलेंट और मेहनत के ज़रिये  कॉमिक्स इंडस्ट्री में अपनी एक खास पहचान बनाई है।  शम्भू नाथ महतो जी कॉमिक्स आर्टिस्ट के साथ एक अच्छे लेखक भी हैं।  उन्होंने देश की कई बड़ी कॉमिक्स कंपनियों के लिए काम किया है। वर्तमान में स्वयं के कॉमिक्स प्रोजेक्ट ''कॉमिक्स थ्योरी''  पर काम कर रहे हैं। आइये शम्भू नाथ महतो जी से उनके अकादमिक शोधार्थी व कॉमिक्स फैन से प्रोफेशनल कॉमिक्स आर्टिस्ट बनने के सफर के बारे में जानते हैं।


शम्भू जी इस विशेष इंटरव्यू में आपका स्वागत है।

सवाल 1  : कॉमिक्स के प्रति अपने जूनून और अपने जीवन के अब तक के सफर के बारे में बताएं।
जवाब : प्रस्तुत प्रश्नों पर अपनी प्रतिक्रिया शुरू करने से पहले मैं बता देना चाहूंगा कि मूलतः मैं इतिहास का शोधार्थी हूँ जिसकी झलक आपको मेरी इन प्रतिक्रियाओं में और गतिविधियों में नजर आएगी। शुरू से ही विधा अर्जन की ओर मेरी प्राथमिकता रही है जिसने मेरे कॉमिक्स सफर को रूपक प्रदान किया है। कॉमिक्स मेरे बचपन से लेकर अब तक का सबसे अहम् हिस्सा रहा है वो सिर्फ किस्से कहानी न होकर जीवन जीने का तरीका रहा है. Comics का जूनून करके तो कोई चीज नहीं रही हाँ एक सटीक दृष्टिकोण के रूप में कॉमिक्स का स्थान मेरे जीवन में है. 1990 में शायद पहली बार Comics से सामना हुआ वो कॉमिक्स ''अंगारा'' की प्रथम कॉमिक. तब से कॉमिक्स मेरी सोच और क्रिएटिविटी का मूल संघटक रहा.

12 वीं के बाद स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षा के दौरान कॉमिक्स से कम ही तालमेल रहा जो भी रहा वो स्वंय को एक चित्रकार के रूप में ढालने के लिए अभ्यास और कॉमिक्स बनाने का रहा इस दौरान कुछ 3 कॉमिक्स मैंने बनाई जिसमें की कुछ स्वयं के निर्मित चरित्रों पर मैंने कॉमिक्स बनाये जो की अप्रकाशित हैं. ये 3 कॉमिक्स मेरे लिए comics making को समझने के लिए नींव रही हैं. अपनी शिक्षा को प्राथमिकता मैंने हमेशा ही दिया है और उसी कारण कई अच्छे मौकों को त्यागने में मैं पीछे नहीं रहा. 2011 में राज कॉमिक्स में “नागराज- ‘फ्लैशबैक’“ पर एक कहानी pitch के स्वीकार होने के कुछ महीने बाद मेरे M.Phil में सिलेक्शन हो जाने पर मना कर देना तथा 2017 में PhD की तैयारी के चलते फ़ेनिल कॉमिक्स से आये 3 comics के कॉन्ट्रैक्ट्स व भविष्य के कई संभावित कामों को जैसे की बेताल कॉमिक्स को मना कर देना, और अब इस वर्ष 2018 में अपने कॉमिक्स विषय पर PhD के लक्ष्य को ध्यान में रखकर राज कॉमिक्स में ही तिरंगा पर मेरे ''अराजक'' नामक कहानी को दुखी मन से मैंने वापस ले लिया, हालाँकि अक्सर ही pitch सफल होने के बाद लेखन कार्य आगे बढ़ा परन्तु हर बार जालिम परिस्थितियों के मद्देनजर मुझे कठोर फैसले लेने पड़े हैं जिससे यकीनन मेरे कॉमिक्स करियर पर असर पड़ता है परन्तु सही और सटीक फैसले को मैं तवज्जो देना पसंद करता हूँ खासकर तब जब ऐसे अपेक्षित काम लम्बे खिंच जाते हैं या फिर में उसे पूरा करने की स्थिति में न होऊं तो दोनों तरफ का समय व्यर्थ न हो इसलिए ऐसे कठोर फैसले लेने पड़ते है. अराजक कहानी के सन्दर्भ में मैं अपने कॉमिक्स –मित्रों (क्लोज वालों से खासकर जिन्हें “अराजक” कहानी पता है) से अपेक्षा करता हूँ की वो माफ़ तो करेंगे ही पर भविष्य में जब मैं इस कहानी व चरित्र ''अराजक'' को प्रकाशित करूँगा तो वे इसका खुले दिल से स्वागत करेंगे.

इसके अलावा पिछले साल कई घटना- दुर्घटनाएं हुई जिसने मेरे कॉमिक्स करियर को Professionally शुरू किया और बूस्ट किया व दुनियादारी से अवगत कराया. एक लेखक के रूप में मेरा करियर कॉमिक्स में अभी शुरू नहीं हुआ है और फिलहाल कई कारणों से मैंने किसी अन्य के लिए कॉमिक्स –लेखन न करने का फैसला किया है, पर चित्रकार के रूप में पिछले वर्ष मैंने फरवरी से अपनी शुरुआत की और कम समय में मुझे कई नए प्रकाशनों से अच्छा काम मिला व इतना की समय के अभाव के चलते कई कॉमिक्स प्रकाशकों के आये हुए कॉन्ट्रैक्ट्स मैंने विनम्रता के साथ लौटा भी दिए. 2017 के अंत में मैंने COMICS THEORY के तहत GHOSTS OF INDIA-Horror Comics Anthology की शुरुआत भी की है. जिसमे मेरे मित्रों और कई नए- पुराने लेखक और चित्रकारों व पहली बार संपर्क में आये लोगों ने भरपूर सहयोग व उद्यम दिया, सभी की ये एकजुटता और विश्वास अपने आप में एक बड़ी बात है.

इसी के साथ मेरे कॉमिक्स सफ़र का एक अहम् हिस्सा रहा है वर्ष 2015 में एक Documentary Film “Indian
Comics Fans” की शुरुआत और जो अब भी जारी है जिसके लिए मैं निरंतर इंटरव्यूज लेता रहता हूँ!

सवाल 2 : ड्राइंग के अलावा आपके और क्या-क्या शौक हैं ?
जवाब : पढना और लिखना.

सवाल 3 : आपके दोस्तों और परिवार के सदस्यों की आपकी क्रिएटिविटी पर क्या राय रहती है और उनसे कितना सहयोग मिलता है ?
जवाब : मेरे जितने भी लंगोटिया मित्र, ऑफलाइन और ऑनलाइन मित्र हैं सभी को मेरा काम पसंद आता है (जिन्हें नहीं आता वो ये पढने के बाद शायद मुझे फेसबुक पर ब्लाक कर देंगे !)  मैं यहाँ एक चित्रकार     के रूप में सक्रिय हूँ ये मेरे परिवार व दोस्तों के विश्वास और अविश्वास ( जो की बहुत जरुरी है क्रिएटिविटी जगाने के लिए ) और सहयोग का नतीजा ही है.


सवाल 4 : अपनी पसंदीदा कॉमिक्स, लेखक, आर्टिस्ट और कॉमिक करैक्टर कौन हैं ?
जवाब : पसंदीदा comics नागराज और थोडांगा की मौत, कॉमिक्स में पसंदीदा तो नही पर साहित्य में लेखक श्रीलाल शुक्ल (राग दरबारी वाले ), चित्रकार में प्रताप मुलीक जी, श्री मार्क सिल्वेस्टरी, श्री जिम ली, अलेक्स रॉस और बहुत से, Comics चरित्र नागराज, आक्रोश, तौसी, बैटमैनवा एंड पार्टी.

सवाल 5 : आप अपने जीवन में सबसे ज़्यादा किससे प्रभावित है और किसे अपना रोल मॉडल मानते हैं ?
जवाब : अपने पिताजी से सबसे ज्यादा प्रभावित हूँ और मेरे रोल मॉडल भी वही हैं जिन्होंने एक ऐसी बात मुझमे
गढ़ी जो हमेशा मेरे साथ मेरे काम में रहती है कि “कोई भी काम करने से पहले ये जरुर सोचो की उससे कोई
आहत तो नहीं हो रहा, किसी को तकलीफ हो वैसा काम नहीं करना चाहिए, भले ही खुद तकलीफ सहो”!!

सवाल 6 : आपका पसंदीदा स्पोर्ट, फिल्म, बॉलीवुड / हॉलीवुड कलाकार कोन है ?
जवाब :
कंचे, पकडम- पकड़ाई (all versions जैसे लंगड़ी दौड़ ), छुपन- छुपाई, लूडो- शतरंज, पोषम-पा (चोर की अभी भी तलाश है), ओक्का –बोक्का, गुल्ली –डंडा, पिठू मार, खो-खो ...ये है झींगुर-रहित जीवन!
पसंदीदा फिल्म गाइड, तेरे घर के सामने, प्यासा, नदिया के पार, कागज के फूल, साहब बीवी और गुलाम सभी
फिल्मे जिसमे देव आनंद और गुरुदत्त और वहीदा रहमान हों. हॉलीवुड में कलाकार बड़े वाले जैकमैन और निकोल किडमैन. फिल्म में van helsing, west side story, ऑस्ट्रेलिया, the artist, La La Land, सभी सुपर हीरो वाली फिल्मे जैसे के x-man सीरीज, बैटमैन vs सुपरमैन इत्यादि. 

सवाल 7 : भारत में कॉमिक्स के भविष्य के बारे में क्या सोचते हैं ?
जवाब : अच्छा ही सोचता हूँ!! comics का भविष्य उज्जवल है, कई पब्लिशर्स अपनी एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं जैसे की राज, याली और tbs इत्यादि. पर मुनाफा एक बड़ी चीज है जिससे बहुत से कॉमिक्स पब्लिशर्स वंचित है. हालात ये हैं की बड़े प्रकाशक छोटे हो गए हैं और छोटे अब उनके बराबर. ये स्थिति लोकतंत्र के सिद्धांत के हिसाब से तो अच्छा है पर comics के हिसाब से गड़बड़ है. भविष्य अच्छा ही होगा क्यूंकि सभी अपने स्तर पर कुछ न कुछ कर रहे हैं!

सवाल 8 : आपके ''कॉमिक्स थ्योरी''' प्रोजेक्ट के बारे में कुछ बताइये
जवाब :
  कॉमिक्स थ्योरी एक प्रयास है Comics से सम्बंधित चीजों को समझने का, explore करने का और कुछ निर्मित करने का. इसी के तहत GHOSTS OF INDIA- Horror Comics Anthology शुरू किया गया जहां की 50 लेखकों के कहानियों पर करीब 20 से जायदा चित्रकारों के द्वारा बनाये गए कॉमिक anthology को लाया जायेगा. निरंतर नए और अनुभवी लेखक व चित्रकार जुड़ रहे हैं. 17 दिसम्बर 2017 को Delhi में आयोजित Comics Fan Fest-8 में हमने इसका प्रस्तुतीकरण भी किया और अभी हाल ही में एक उपन्यास व कहानी प्रकाशक सूरज पॉकेट बुक्स के साथ Promotional- Partnership भी की गई है. अब तक हमारे साथ 40 से ज्यादा Creatives एग्रीमेंट करके जुड़ चुके हैं और लगातार आ रहे हैं. Creatives को पेमेंट का भी प्रावधान है. अगले माह फरवरी में 5 से 10 Comics स्ट्रिप्स हम Preview के तौर पर लायेंगे. भारतीय नए व अनुभवी लेखकों और चित्रकारों के साथ- साथ इसमें शुरू से ही विदेशी लेखक व चित्रकार भी रूचि ले रहे हैं जिनके लिए अब हमने अपने दरवाजे खोल दिए हैं और वे जल्द ही इसमें शामिल होंगे. ज्यादा जानकारी के लिए संपर्क करें: www.facebook.com/comicstheory

सवाल 9 : आपके हिसाब से एक अच्छी कॉमिक्स के क्या मापदण्ड हैं ?
जवाब :
कॉमिक्स में अभी तो मेरी शुरुआत ही है सो अनुभव के आधार पर अधिकारिक तौर पर नहीं बल्कि एक
शोधार्थी के तौर पर इतना कहूँगा की अच्छी कॉमिक्स वो है जो अपनी कहानी पाठक को कह जाये.

सवाल 10 : टेक्नोलॉजी के दौर में कॉमिक्स मेकिंग में बहुत बदलाव आये हैं, पहले जहाँ लगभग सभी काम हाथ से किये जाते था वहीँ अब कंप्यूटर / लैपटॉप / ग्राफ़िक्स टेबलेट का इस्तेमाल होता है, टेक्नोलॉजी के बढ़ते चलन से कॉमिक्स मेकिंग को कितना फायदा पहुंचा है ?
जवाब :
क्यूंकि मैं दोनों ही तरीको मैन्युअल और डिजिटल आजमा चुका हूँ साथ ही Documentary फिल्म के दौरान किये गए इंटरव्यूज से अर्जित इस मुद्दे पर ज्ञान का उपयोग करूँ तो इतना ही कहूँगा की डिजिटल ने कॉमिक्स मेकिंग को फायदा ही पहुंचा है. भारतीय सन्दर्भ में डिजिटल ने मैन्युअल कॉमिक्स मेकिंग को विस्थापित नहीं किया क्यूंकि डिजिटल के मुख्यधारा में आने से बहुत पहले ही कॉमिक्स मुख्यधारा से हट गयी यानि कई Comics पब्लिशर्स का डब्बा गुल हो गया. जो डिजिटल हैं वो नई पीढ़ी हैं! कॉमिक्स बनाना और अच्छी REALISTIC क्वालिटी के साथ संभव हुआ है. साथ ही कुछ बुराइयां भी आई हैं डिजिटल के कारण जैसे की चित्रकारों खासकर नौसिखियों का आलस्यवर्धन हुआ है जहां की ईमानदारी से चित्रकारी पर मेहनत न करके COLORIST भरोसे छोड़ देना कि वो लीपा-पोती कर देगा. यक़ीनन आजकल Colorist की महत्ता बढ़ी है और मुझे सबसे ज्यादा मजा तब आएगा जब बिना चित्रकार (पेंसिलर) के Colorist ही Comics बनायें या फिर ऐसी स्थिति में Colorist का नाम चित्रकार से पहले दिया जाए!

सवाल 11 : पायरेसी ने कॉमिक्स इंडस्ट्री को काफी नुक़सान पहुँचाया है आपके विचार में इसे रोकने के लिए किस तरह के क़दम उठाने चाहिए ?
जवाब :
piracy एक झटके में रोकने के लिए प्रकाशकों को डिजिटल कॉमिक्स फ्री कर देनी चाहिए!...इस आधे –मजाक को जाने दें तो अपने शोध के हिसाब से कहूँ तो इस सवाल का जवाब देने से पहले मैं खुद पूछना चाहूँगा की “कौन सी Piracy ?” शुरुआती Comics Fans द्वारा किये गए शेयरिंग को Piracy नहीं कहा जाना चाहिए क्यूंकि उसी के कारण कहीं न कहीं आज ऑनलाइन comics की दुनिया है वो मुनाफे के लिए नहीं बल्कि Comics के लिए की गई थी और वे सफल रहे और उनकी ये सफलता ही है की कुछ मुनाफेखोरी की सोच रखने वाले लोगो ने इसे मुनाफे का जरिया बनाया. कुछ आधे दशक से ये मुनाफेखोरी वाली Piracy जोरों पर है और ये वही डिजिटल Comics उपयोग करते हैं जो पहली पीढ़ी के ऑनलाइन Comics Fans ने शेयरिंग करने के लिए Scan किये थे. मामला पेचीदा है इतना की बिना इसे समझे इसे रोकने की कोशिश करने वाले प्रकाशक खुद की अच्छी छवि और मुनाफा खो बैठे हैं. इसे रोकने की हाल फिलहाल की कोशिशों के चलते अब गुपचुप तरीके से pdf -by- pdf नहीं बल्कि HARDDISK–to -HARDDISK Piracy भी होने लगी है. Piracy को रोकना खुद में नुकसान और समस्या है जब तक की उसका हल न निकाला जाये जैसे की कम दाम पर कॉमिक्स खरीददार तक पहुँचाना एक हल हो सकता है!

सवाल 12 :  कॉमिक्स से जुड़ी आपके जीवन की कोई मज़ेदार घटना जिसे सोचकर आपके चेहरे पर मुस्कान आ जाती हो .
जवाब
: हर एक घटना मजेदार रही है ! एक कुछ खास तरीके की है, एक कॉमिक्स Sin City का हार्डकवर लिमिटेड एडिशन मुझे बाज़ार में मिला जिसे मैंने जानबूझकर दुकानदार को दिखाने के लिए की ये फालतू बकवास कॉमिक्स है उसे देखकर और मुंह बिचकाकर रख दिया क्यूंकि मुझे पता था की ज्यादा भाव दिया तो किताब के भाव बढ़ जायेंगे. ये देख दुकानदार ने कहा 300 की है ले जाओ. जिस पर मैंने एक बार फिर किताब उठाकर उलट- पलट कर अपने दोस्त के सामने उसके चित्रों को बुरा- भला बकवास कहते हुए पटक दिया और आगे बढ़ने लगा की यार ये तो बेकार है, तब दुकानदार गिडगिडाने- सी हालत में बोला की ले जाओ! ले जाओ! अच्छी किताब है बताओ कितना दाम दोगे? हमने तब 50 रुपये कहा और एक बार फिर कॉमिक्स उठाई उलटी- पलटी और पटक दी की नहीं 50 रुपये भी बर्बाद हो जायेंगे बकवास है ये, इतना सुनते ही फिर गिडगिडाने- सा मुंह लेकर दुकानदार बोला की अरे ले जाओ 50 रुपये में ही तो है आजकल क्या मिलता है 50 रुपये में और ये बोलकर कॉमिक्स मेरे हाथ में थमा दी. पर सच तो ये है कि आज के ज़माने में भी इस पापी शहर में लिमिटेड हार्डकवर एडिशन कॉमिक्स 50 रुपये में आ जाता है.

सवाल 13 : भारतीय कॉमिक्स और विदेशी कॉमिक्स में तुलना करने पर आप क्या अन्तर पाते हैं ?
जवाब :
फिर से एक शोधार्थी के रूप में बोलना चाहूँगा कि अंतर तो बहुत बड़ा है हालाँकि कॉमिक्स तो कॉमिक्स
होती है पर कई ऐसे क्षेत्र है जहां जमीन- आसमान का अंतर देखने को मिल जायेंगे जो की तुलना करने का आधार हैं. पहला तो ये की प्रोफेशनलिज्म और पारदर्शिता जो विदेशी कॉमिक्स निर्माताओ में होती है जिसके कारण यहाँ प्रोफेशनलिज्म के बिना काम करवाने और करने वाले भी वहां लट्ठ की तरह सीधे होकर काम करते हैं भले यहाँ देश में दूसरों के साथ जलेबी– प्रोफेशनलिज्म दिखाएँ! यह पारदर्शिता और प्रोफेशनलिज्म कई तरीको से आती है जैसे की Contract करके काम करना जिसकी यहाँ अपने देश में बहुत कमी है क्यूंकि अतिविश्वास, सम्मान तथा जबान पर भरोसा किया जाता है. ये मामला नए कलाकारों के साथ खासकर होता है जो अपनी कॉमिक्स को छपता देखने के लिए सही प्रोफेशनलिज्म के मार्ग को उपेक्षित कर देते हैं.

इन सब चीजो का यथा प्रोफेशनलिज्म का खासकर असर कॉमिक्स के गुणवत्ता पर पड़ता है. जैसे की भारतीय
comics की दीमक कॉपी –पेस्ट जिसका पेस्ट-कण्ट्रोल अभी तक नहीं हुआ जिसका कारण है “जलेबी-प्रोफेशनलिज्म” जहाँ सब कुछ उचित है दूसरे के किये गए काम को Inspiration के नाम पे इतना ले लेना की प्रोफेशनलिज्म के मायने बदल जाएँ या फिर बिना क्रेडिट दिए काम करवाना या चुरा लेना. हालाँकि ओरिजिनल कुछ नहीं होता पर इस डायलोग को बहाने की तरह उपयोग करके हद पार करने की प्रवृति ही कारण है की आज के समय में विदेशी कॉमिक्स से कौन- कौन सी कहानी व चरित्र उठा लिए गए और बेचे गए ये सब जानकार पाठकों का देशी कॉमिक्स से मोहभंग हो रहा है और ये आजकल कुछ ज्यादा हो रहा है कुछ लोगो ने इस मोहभंग करने को व्यवसाय बना लिया है यूट्यूब पर ऐसे वीडियो की भरमार हो रही है, क्योंकि ये ही वह मुख्य अंतर है जो विदेशी कॉमिक्स की प्रभुता और वर्चस्व को जग- जाहिर कर देता है. यही वो बिंदु है जहाँ आप देशी कॉमिक्स और विदेशी कॉमिक्स में कई सारे अंतर खोज सकते हैं. ऐसा नहीं है की देशी कॉमिक्स मौलिक रचनाओं से वंचित है पर सत्य यही है की जब तुलना का समय आएगा तो इन्ही बिन्दुओं पर मुख्य तुलना की जाएगी और हर क्षेत्र पर सवाल प्रोफेशनलिज्म के इर्द गिर्द ही उठेंगे! और ये अन्तर वर्तमान में जगजाहिर हो रहा है जिसे भुनाने वाले भी देसी लोग ही हैं। सकारात्मक पहलु पर बात करें तो देशी कॉमिक्स के क्षेत्र में बदलाव आ रहे हैं खासकर नए चित्रकार और लेखक सजग हैं और अच्छा काम करने से पीछे नहीं हैं. कुछ पुराने प्रकाशन व नए प्रकाशन नए- नए उद्यम कर रहे हैं जिससे विदेशी कॉमिक्स से अंतर का दायरा यकिनन भविष्य में कम ही होगा. (इन जैसे विषयों पर जल्द ही मेरे लेखआने वाले हैं।)

सवाल 14 : अब तक का अपना सबसे चुनौतीपूर्ण और सर्वश्रेष्ठ काम (आर्ट) किसे मानते हैं और क्यों?
जवाब :
इस सवाल के नजरिये से कभी सोचा नहीं. इतना ही कहूँगा कि मेहनत से पीछे नहीं हटता और हमेशा
अच्छा करने की कोशिश रहती है.

सवाल 15 : आपके आगामी प्रोजेक्ट्स के बारे में कुछ बताएं ?
जवाब :
कॉमिक्स थ्योरी के तहत कई प्रोजेक्ट्स आयेंगे कुछ पर्सनल प्रोजेक्ट भी हैं. जिसमे से एक बहुत ही खास प्रोजेक्ट है जो यदि सफल रहा तो फिर हम लोग रुकने वाले नहीं हैं. ये सब सीक्रेट हैं जब तक सही समय न आये खुल कर नहीं बता सकता, इसके लिए क्षमा चाहता हूँ.

सवाल 16 : नए आर्टिस्ट जो कॉमिक्स इंडस्ट्री में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं उन्हें मार्गदर्शन के लिए आप क्या राय देना चाहेंगे ?
जवाब :
आर्टिस्ट बनने के साथ- साथ प्रोफेशनल बने अच्छे इंसान बनें, क्षणिक मुद्रा –लाभ या नाम के लिए अपने नैतिकता का साथ न छोड़ें. फिलहाल इस कॉमिक्स इंडस्ट्री में फुल टाइम करियर (यानि फाइनेंसियली) के ज्यादा आसार नहीं है जब तक की आपका काम वाकई में अच्छा न हो, यानि अपनी शिक्षा को और करियर को तिलांजलि देकर इस तरफ न आयें. प्राथमिक व उच्च शिक्षा को प्राथमिकता दें वह जिन्दगी भर काम आएगी. कॉमिक्स आर्टिस्ट बनने के लिए हालाँकि किसी डिग्री की जरुरत नहीं है पर Fine आर्ट्स कॉलेज या इंस्टिट्यूट से शिक्षा लें वहां पेंटिंग और applied art आदि के कोर्स लीजिये जिससे आगे शिक्षक भी बन सकते हैं (परिवार वाले खुश रहेंगे और फुल सपोर्ट देंगे). 
जब भी कॉमिक्स इंडस्ट्री में एंट्री मारें स्टाइल से और फुल-टू प्रोफेशनलिज्म के साथ यानि लल्लो- चप्पो में न फंसें सीधा Comics प्रकाशकों से Submission देने के नियम पूछें और अपना बेस्ट आर्टवर्क सबमिट करने से पहले कुछ लोगों से UNBAISED रिव्यु जरुर लें. 5 पेज सीक्वेंसियल आर्टवर्क सबमिट जरुर करें क्यूंकि कॉमिक्स प्रकाशक आपके बनाये जलपरियों, सेब- संतरों और बॉडी- बिल्डर्स में रूचि नहीं रखते!

सवाल 17 : अंत में कॉमिक्स फैंस को क्या संदेश देना चाहेंगे?
जवाब :
मेरा सन्देश तो मेरे काम ही हैं अब चाहे वो Comics Theory के प्रोजेक्ट्स हों या अन्य Comics या फिर
Documentary फिल्म “Indian Comics Fans''  इनमे ही मेरे संदेश समाहित हैं। ये जरुर कहना चाहूँगा कि मुझे Comics Fans की महत्ता पता है इसलिए मेरी Documentary Film उन्ही पर फोकस है और आप कभी भी मुझसे संपर्क कर सकते हैं Comics Fans की तरह नहीं बल्कि दोस्त की तरह www.facebook.com/snath.mahto
शम्भू जी अपने क़ीमती वक़्त से हमारे इंटरव्यू के लिए वक़्त देने के लिए आपका बहुत शुक्रिया।  हम उम्मीद करते है देश में कॉमिक्स कल्चर को बढ़ावा देने के लिए आप अपना योगदान देते रहेंगे और भविष्य में हमें आपके द्वारा निर्मित बेहतरीन कॉमिक्स पड़ने को मिलेंगी।  आपके आने वाले प्रोजेक्ट ''GHOSTS OF INDIA-Horror Comics Anthology''  और भविष्य के प्रोजेक्ट्स के लिए हमारी शुभकामनायें. 

 शहाब ख़ान  
©Nazariya Now

5 comments:

  1. नए उभरते आर्टिस्ट और लेखकों को लेकर शंभू भैया जी ने सही कहा ! जब तक बिना सही नाॅलेज, स्किलनेस और काॅन्फिडेन्ट कमिटमेंट ना हो यहाँ काॅमिक्स कैरियर को बनाने की सोचना नहीं चाहिए ! फिलहाल पाँच पेज सेगमैंट का जो यह प्रोजेक्ट है, यह सभी के लिए उचित प्लेटफार्म है और सभी को इसका एडवांटेज लेना चाहिए (यदि वे वाकई गंभीर हैं) ! क्योंकि कोई भी पब्लिशर भला आपके बचकाने ड्राइंग पर क्यों ध्यान देगा !

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  2. चूँकि शंभूनाथ जी लंबे समय से काॅमिक्स इंडस्ट्री के कार्यकाल से जुड़े हुए हैं सो यह सभी नई पीढ़ी के आर्टिस्ट व राइटरों के लिए सिर्फ़ साक्षात्कार ना होकर एक जरूरी सबक है !

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  3. वैसे तो आपका पूरा इंटरव्यू ही शानदार लगा शम्भू प्यारे ...लेकिन दसवें सवाल के जवाब से मैं शत प्रतिशत सहमत हूँ.....आजकल की कॉमिक के अधिकतम आर्टवर्क में दम नहीं होता है ....कलर से ही लीपा-पोती कर दी जाती है .

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  4. Interesting interview with a talented youngster. I am sure he will make his mark in a big way in the years to come.

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  5. wah..bahut sandar bhai..13th question ke answer me aapne bahut kuch keh deya..sabhi new artists ko ese padhna caheye

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