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Tuesday, January 30, 2018

इंटरव्यू : एक खास मुलाक़ात कॉमिक्स आर्टिस्ट तदम ग्याडू के साथ - An Exclusive Interview with Tadam Gyadu

कॉमिक्स कलाकारों / लेखकों / प्रकाशकों के इंटरव्यू की विशेष श्रंखला में आज एक खास इंटरव्यू में हम आपको रूबरू करवा रहे हैं कॉमिक्स आर्टिस्ट तदम ग्याडू से।  तदम ने अपने टैलेंट और मेहनत के ज़रिये बहुत कम वक़्त में कॉमिक्स इंडस्ट्री में अपनी एक खास पहचान बनाई है।  वर्तमान में वो भारत की कई बड़ी कॉमिक्स कंपनियों के लिए काम कर रहे हैं।  आइये तदम से उनसे कॉमिक्स फैन से प्रोफेशनल कॉमिक्स आर्टिस्ट बनने के सफर के बारे में जानते हैं।



तदम इस विशेष इंटरव्यू में आपका स्वागत है।

सवाल 1 : अपने जीवन के अब तक के सफर के बारे में बताएं ।
जवाब :
धन्यवाद शहाब जी ! मेरी अभी तक की जिन्दगी का सफ़र काफी इंटरेस्टिंग रहा है. जेसा की आप जानते होंगे, मैं अरुणाचल प्रदेश का रहने वाला हूँ. मैंने कभी सोचा नहीं था की मेरा कॉमिक्स और आर्ट में इंटरेस्ट मुझे इतनी दूर दिल्ली भी लेकर आएगा. लेकिन हाँ, मैंने एक सपना जरूर देखा था की कभी मैं इंडियन कॉमिक्स इंडस्ट्री में काम करूँगा. टेंथ की पढाई के बाद मेरी ज़िन्दगी में कई उतार चढाव आये थे लेकिन हर मोड़ पर मेरे सपने ने मुझे गाइड किया और वही सपना मुझे आज यहाँ तक लेकर आया. उसी सपने की वजह से मैं आज फाइन आर्ट्स की पढाई भी कर रहा हूँ वरना शायद मैं भी अपने दोस्तों की तरह आज इंजीनियरिंग कर रहा होता 😀

सवाल 2 : ड्राइंग के अलावा आपके और क्या-क्या शौक हैं ?
जवाब :
ड्राइंग के अलावा मैं गाने सुनना, मूवीज देखना, किताबें पढना, कॉमिक्स कलेक्ट करना और लिखना पसंद करता हूँ. मैंने कई कहानियाँ लिखीं हैं. कुछ अपने पसंदीदा सुपर हीरोज की फैन स्टोरीज भी लिखी हैं मैंने.


सवाल 3 : कॉमिक्स के प्रति अपने जूनून के बारे में कुछ बताएं।
जवाब :
इस देश में कॉमिक्स के लाखों फैन हैं . मैं भी उन्ही में से एक हूँ. बचपन में मैं पागल हुआ करता था कॉमिक्स के लिए. यह वो वक़्त था जब कॉमिक्स मेरे लिए नशा बना हुआ था. वेसे बना तो आज भी हुआ है लेकिन मैंने अब उस पर काफी हद तक कण्ट्रोल पा लिया है. कॉमिक्स के लिए वो बचपन जूनून ही तो वजह है की मैं आज कॉमिक्स बना रहा हूँ. हालांकि अब मैं अपने काम को इम्प्रूव करने पे ज्यादा ध्यान देता हूँ और अब कॉमिक्स मेरे लिए एक स्टडी मटेरियल भी है, न की सिर्फ मनोरंजन.

सवाल 4 : आपके परिवार और दोस्तों की आपके काम पर क्या राय रहती है और उनसे कितना सहयोग मिलता है ?
जवाब :
मेरे परिवार वाले शुरुआत में तो मेरे साथ नहीं थे जब मैंने उनको बताया था की मुझे कॉमिक्स आर्टिस्ट बनना है. क्यूंकि एक तो मेरे गाँव या उसके आसपास कोई आर्टिस्ट था नहीं, इसीलिए कोई न तो ये जानता था की आर्ट से भी कैरिएर बन सकता है, दुसरे मेरे घर के फाइनेंसियल हालात भी इतने अच्छे नहीं थे की वो मुझे एक ऐसे कोर्स को करने की इजाजत दे दें जिसमे नौकरी की गुन्जायिश कम है. लेकिन, मैंने अपनी इंटर की पढाई पूरी करते हुए पता लगा लिया था की मुझे आर्ट के फील्ड में कैरिएर बनाने के लिए क्या करना होगा. फेसबुक के कुछ फ्रेंड्स जेसे धीरज कुमार भैया, ललित शर्मा सर, अभिषेक मल्सुनी सर, विवेक गोएल सर, सुमित कुमार भैया और कई और लोग जिनके नाम अभी भूल रहा हूँ ने मुझे आगे के लिए गाइड किया.
उसके बाद मैंने अपने परिवार वालों को मना लिया. अभी मेरे परिवार वाले खुश हैं की मैंने अपने लिए एक सही रास्ता चुना है और आगे भी बढ़ रहा हूँ. मेरे परिवार वाले मेरा पूरा साथ देते हैं, खासकर मेरे नानाजी. उनको मेरा कम काफी पसंद है. मेरे दोस्त भी इस पूरे सफ़र में काफी हेल्पफुल रहें हैं. उन्होंने हमेशा मुझे मोटीवेट किया. मेरे काम की तारीफ करी जिससे मुझे कभी ऐसा नहीं लगा की मैंने अपने लिए गलत रास्ता चुन लिया है.

सवाल 5 : अपनी पसंदीदा कॉमिक्स, लेखक, आर्टिस्ट और कॉमिक करैक्टर कौन हैं ?
जवाब :
मुझे नहीं लगता की मेरी कोई एक सबसे पसंदीदा कॉमिक्स है. मेरी पसंदीदा कॉमिक्स की लिस्ट बहुत ही लम्बी है इसीलिए वो बताना यहाँ पे पॉसिबल नहीं. मेरे फेवरेट राइटर भी बहुत सारे हैं लेकिन मैं उनमे से कुछ बहुत ख़ास का नाम यहा लेना चाहूँगा. वो हैं भारत से - अनुपम सिन्हा सर, तरुण कुमार वाही सर, राम वी सर, शमिक दासगुप्ता सर, स्वेता तनेजा मैडम. डीसी, मार्वल, इमेज आदि से जेफ लोएब, जेफ़ जोंस, स्कॉट स्न्यदर,मार्क वैद, मार्क मिलर और भी कई सारे हैं. मेरे पसंदीदा आर्टिस्टों की लिस्ट भी यहाँ पर लिखना बहोत मुश्किल है. वो इतने सारे हैं की मुझे खुद सबके नाम एक साथ याद नहीं रहते और लिखकर रखने पड़ते हैं.

सवाल 6 : आप अपने जीवन में सबसे ज़्यादा किससे प्रभावित है और किसे अपना रोल मॉडल मानते हैं ?
जवाब :
मेरे जीवन में मैं अपने नानाजी से साबसे ज्यादा प्रभावित हुआ हूँ और वही मेरे रोल मॉडल हैं. आज जो भी हूँ, उसमे उनका सबसे बड़ा हाथ है.

सवाल 7 : आपका पसंदीदा स्पोर्ट, फिल्म, बॉलीवुड / हॉलीवुड कलाकार कोन है ?
जवाब :
मेरा बचपन से ही किसी भी सपोर्ट में रुझान रहा नहीं. लेकिन मैं थोडा बहुत वॉलीबॉल खेल लेता हूँ. फिल्में भी कॉमिक्स की तरह ही पसंद हैं मुझे और मेरी पसंदीदा फिल्मों के नामों की लिस्ट भी कॉमिक्स की लिस्ट की तरह ही लम्बी है और यहाँ बताना मुश्किल है. वेसे मुझे सुपर हीरो मूवीज सबसे ज्यादा पसंद हैं जोकि शायद स्वाभाविक है. बॉलीवुड में मुझे अक्षय कुमार बहुत ही ज्यादा पसंद है और मेरी हमेशा यही कोशिश रहती है की मैं उसकी हर नयी मूवी हॉल में ही जाकर देखूं. हॉलीवुड से मुझे टॉम हेंक्स, लेओनार्दो दी कैप्रियो, च्रिस एवंस पसंद हैं.


सवाल 8 : भारत में कॉमिक्स के भविष्य के बारे बारे में क्या सोचते हैं ?
जवाब :
यह एक काफी ट्रिकी सवाल है. लेकिन मैं अपनी लिमिटेड नॉलेज के अनुसार इसका जवाब यह दूंगा की मार्किट अभी फिर से एक शुरुआति दौर में है. इंडियन कॉमिक्स के गोल्डन ऐज के बाद जो कॉमिक्स इंडस्ट्री को झटका लगा था यह अभी उससे धीरे धीरे उबर रही है. नयी कंपनियां जेसे होली काऊ एंटरटेनमेंट, याली ड्रीम क्रिएशन्स, फेनिल कॉमिक्स, टी बी एस प्लेनेट वगेरह इंडस्ट्री में एक नई उम्मीद जगा रहे है. चूँकि इन सबका टारगेट ऑडियंस और कंटेंट अलग अलग है और क्वालिटी वाइज भी सारी कॉमिक्स अलग अलग ही है, तो इनको एक दुसरे से ज्यादा कम्पीट करने की जरुरत भी नहीं है. मुझे लगता है यह एक अच्छी बात है. ऐसे में क्रिएटर्स अपने काम में ज्यादा फोकस दे पा रहे हैं जिससे मार्किट में बढ़िया कंटेंट आ रहा है. और बढ़िया कंटेंट के आने से नए पाठक भी धीरे धीरे जुड़ रहे हैं. इन शोर्ट, कॉमिक्स का फ्यूचर अगर ब्राइट नहीं तो मुझे कम से कम अभी स्टेबल लग रहा है.

सवाल 9 : आपके हिसाब से एक अच्छी कॉमिक्स के क्या मापदण्ड हैं ?
जवाब :
मेरे हिसाब से एक अच्छी कॉमिक्स में अच्छी कहानी, अच्छा आर्टवर्क तो होना ही चाहिए लेकिन उसके अलावा कुछ और चीज़ें हैं जो मेरे हिसाब से एक कॉमिक को अच्छे होने का दर्जा दिलाती है. आर्टवर्क में अच्छी अनाटोमी या खूबसूरत चेहरों से ज्यादा मायने रखती है स्टोरी टेलिंग जो एक रीडर को कॉमिक्स की दुनिया में ले जा सके और कहानी के करैक्टर्स से कनेक्ट करवा सके. कहानी के मूड के हिसाब से कलर स्कीम सेट करना, उसी के हिसाब से लाइट एंड शैडो रखना, उसी के हिसाब से डायलाग बैलून्स रखना और यहाँ तक की डायलॉग्स लिखने के लिए फोंट्स का डिजाईन और कलर भी कहानी की मांग के अनुसार रखना – यह कुछ चीज़ें हैं जो एक कॉमिक को अच्छा बनाती है. यह सब चीज़ें भारतीय कॉमिक्स में पहले बहुत ही कम सोची या बनायीं जाती थी लेकिन मुझे ख़ुशी है की अभी यह सब हमारी कॉमिक्स में भी देखने को मिल रहा है, भले ही सब मे नहीं.

सवाल 10 : वर्तमान में आप किन किन कॉमिक्स कंपनियों के लिए काम कर रहे हैं ?
जवाब :
जी अभी तो मैं होली काऊ एंटरटेनमेंट के लिए एक्सक्लूसिव आर्टिस्ट हूँ और केवल उन्ही के लिए काम कर रहा हूँ. होली काऊ से पहले मैंने राज कॉमिक्स, चेरियट कॉमिक्स, याली ड्रीम क्रिएशन्स और एक अपकमिंग पब्लिशर की एक कॉमिक्स में भी काम किया है.
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सवाल 11 : राज कॉमिक्स भारत की सबसे बड़ी कॉमिक्स कंपनी है उनके साथ काम करने का अनुभव कैसा
रहा ?
जवाब :
राज कॉमिक्स में काम करने का मेरा अनुभव काफी अच्छा रहा. एक फैनबॉय के लिए यह एक सपना साकार होना था. मैं बहुत ही किस्मत वाला हूँ की भारत के उन लाखों लोगों में से, जो राज कॉमिक्स के लिए कॉमिक्स बनाना चाहते थे, मुझे एक चांस मिला अपने फेवरेट सुपर हीरोज को ड्रा करने का. मैंने राज कॉमिक्स में काफी कुछ सीखा चूँकि मैं घर से ही काम करता था तो मेरा आर्ट डायरेक्शन सुशांत सर कर रहे थे और उन्होंने मुझे कुछ बहुत ही काम की बातें सिखाई जो मैं आज भी कॉमिक्स ड्रा करते हुए यूज़ करता हूँ.
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सवाल 12 : आपके जीवन में कॉमिक्स से जुडी कोई ऐसी घटना घटी हो जो आपको आज तक गुदगुदाती हो या
चेहरे पर हंसी लाती हो ?
जवाब :
वेसे ऐसे बहुत सारे इन्सिदेंट्स हुए हैं मेरे साथ, जेसे कॉमिक्स के लिए घर से पैसे चुराने पर मार पड़ना या क्लास में टेक्स्टबुक के भीतर कॉमिक्स छुपाकर पढते हुए पकडे जाने पे टीचर से पनिशमेंट मिलना, लेकिन मुझे लगता है यह कॉमन चीज़ है. हर इंडियन कॉमिक फैन के साथ यह हुआ होगा. इसीलिए मैं एक ऐसा इंसिडेंट यहाँ पर बताना चाहूंगा जो शायद मैंने ही करने की कोशिश की है. बात उस वक़्त की है जब मैं फिफ्थ में था. घरवाले कॉमिक्स पढने नहीं देते थे. इस पाबंदी और लगातार पड़ती मार से परेशान होकर मैंने मेरे एक और कॉमिक्स प्रेमी दोस्त के साथ मिलकर घर छोड़कर भागने का प्लान बनाया था. हमारा प्लान था की हम दोनों डेल्ही आयेंगे और राज कॉमिक्स जाकर संजय जी से कॉमिक्स का काम मांगेंगे. निर्धारित दिन में हम दोनों भाग निकले और बस से असम पहुंचे जहाँ पर मेरे घर का सबसे पास का रेलवे स्टेशन पड़ता है. मैंने इससे पहले कभी रेल का सफ़र नहीं किया था और ना ही मैं कभी असम आया था. मेरे दोस्त को भी ज्यादा पता नहीं था क्युकी उसने भी अभी तक एक ही बार सफ़र किया था रेल से. लेकिन हम दोनों ने पूरा मन बना लिया था की अब वापस नहीं जाना. लेकिन किस्मत ने हमारा साथ नहीं दिया और हम इतने बड़े शहर में रेलवे स्टेशन नहीं खोज पाए. फिर आखिर में थके हारे हम घर लौट आये. किस्मत से मेरी पिटाई भी नहीं हुई 😂

सवाल 13 : भारतीय कॉमिक्स और विदेशी कॉमिक्स में तुलना करने पर आप क्या अन्तर पाते हैं ?
जवाब
: इंडियन कॉमिक्स और फॉरेन कॉमिक्स (डीसी, मार्वल, इमेज आदि) में सबसे बड़ा अंतर यह है की हमारे यहाँ एक्सपेरिमेंटेशन की अभी कमी है. आर्टवर्क में हमारी कॉमिक्स अब बहुत ज्यादा पीछे नहीं है फॉरेन कॉमिक्स से और कहानिया भी काफी अच्छी है बस कमी है तो नए प्रयोगों की. हालांकि अब धीरे धीरे नए सुपरहीरो और नॉन सुपर हीरो किरदार आ रहे हैं जो काफी अलग है और एक मास अपील रखते हैं लेकिन यह अभी काफी कम हैं. मुझे लगता है रीडर्स को टिपिकल सुपर हीरोज के अलावा इन कॉमिक्स को भी एक्सेप्ट करना चाहिए. इससे वैरायटी बढ़ेगी और नए क्रिएटर्स को मौका मिलेगा कुछ अलग और दम दार करने का.

सवाल 14 : अब तक का अपना सबसे चुनौतीपूर्ण और सर्वश्रेष्ठ काम (आर्ट) किसे मानते हैं और क्यों?
जवाब :
सच कहूँ तो मुझे अपना कोई भी काम सर्वश्रेष्ठ नहीं लगता. कोई भी आर्टवर्क बनाकर जब अगले दिन उसको देखता हूँ तो खामियां नजर आती हैं. इसीलिए इस सवाल का मेरा जवाब यह होगा की मेरा सर्वश्रेष्ठ काम अभी आने वाला है. चुनौतीपूर्ण काम की बात करूँ तो मेरे लिए मेरा हर अगला पेज चुनौतीपूर्ण होता है और मुझे उनको बनाने में बहुत मजा आता है.

सवाल 15 : आपके आगामी प्रोजेक्ट्स के बारे में कुछ बताएं ?
जवाब :
मैं अभी होली काऊ एंटरटेनमेंट के एक नए सुपर हीरो करैक्टर पे काम कर रहा हूँ. उसकी भी ऑफिसियल अनाउंसमेंट नहीं हुई है इसीलिए ज्यादा नहीं बता सकता लेकिन इतना जरूर बता सकता हूँ की यह करैक्टर बिलकुल नए तरह का है. इसकी कहानी का प्रेजेंटेशन इतना खूबसूरत है की मैं यकीन के साथ कह सकता हूँ यह लोगों को जरूर बहुत पसंद आएगा.

सवाल 16 : नए आर्टिस्ट जो कॉमिक्स इंडस्ट्री में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं उन्हें मार्गदर्शन के लिए आप
क्या राय देना चाहेंगे ?
जवाब :
मुझे खुद अभी कॉमिक्स बनाते हुए ज्यादा वक्त नहीं हुआ है तो मैं ज्यादा कुछ तो कह नहीं सकता न्यू कमर्स के लिए. लेकिन अपने २ साल के छोटे से अनुभव से इतना कहना चाहुँगा की आप अपनी नजर अपने टारगेट पर रखें और कोई कुछ भी कहे, अपने ट्रैक से न भटकें. अपना पूरा ध्यान लगाकर अपने काम को हमेशा इम्प्रूव करने की कोशिश करें. और काम ना मिलने पर निराश न होयें. काम आपको तभी मिलेगा जब आप काम को करने लायक होंगे और उसके बाद मिलता ही जायेगा. बस धैर्य रखें और मेहनत करें. 

तदम अपने क़ीमती वक़्त से हमारे इंटरव्यू के लिए वक़्त देने के लिए आपका बहुत शुक्रिया।  हम उम्मीद करते भविष्य में हमें आपके द्वारा निर्मित बेहतरीन कॉमिक्स पड़ने को मिलेंगी।  आपके उज्जवल भविष्य के लिए हमारी शुभकामनायें. 

 शहाब ख़ान  
©Nazariya Now

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