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Tuesday, February 27, 2018

इंटरव्यू : एक खास मुलाक़ात एनिमेटर / आर्टिस्ट मंगेश सूर्यवंशी जी के साथ - An Exclusive Interview with Animator / Artist Mangesh Suryawanshi

कॉमिक्स कलाकारों / लेखकों / प्रकाशकों के इंटरव्यू की विशेष श्रंखला में आज एक खास इंटरव्यू में हम आपको रूबरू करवा रहे हैं एनिमेटर / आर्टिस्ट मंगेश सूर्यवंशी जी से। मंगेश सूर्यवंशी जी बेहतरीन आर्टिस्ट के साथ एनिमेटर भी हैं।  मंगेश सूर्यवंशी जी काफी समय से कॉमिक्स के लिए आर्टवर्क बना रहे हैं कॉमिक्स के साथ ही उन्होंने कई एनीमेशन प्रोजेक्ट्स पर भी काम किया है. आइये मंगेश सूर्यवंशी जी  से उनके जीवन के रोमांचक सफर के बारे में जानते हैं। 
मंगेश सूर्यवंशी जी इस विशेष इंटरव्यू में आपका स्वागत है।


सवाल 1 : अपने जीवन के अब तक के सफर के बारे में बताएं ।
जवाब :
आपका बहुत बहुत धन्यवाद कि अपने मुझे इस इंटरव्यू के लायक समझा. बहुत ही छोटी उम्र रही होगी जब मेरी मदर ने मुझे समर वेकेशन (गर्मियों कि छुट्टियों) में कॉमिक्स लाकर दी थी. मुझे अच्छी तरह से याद है मेरी  माँ ने ''नागराज कि कब्र'' ''नागराज का बदला'' ''नागराज और शांगो'' ये 3 कॉमिक्स और दूसरी 5 कॉमिक्स अन्य पब्लिकेशन कि लाकर दी थीं. उन कॉमिक्स को पड़कर ही मेरी रूचि कॉमिक्स ड्राइंग में बढती गई. स्कूल में भी मेरा प्रिय विषय (Subject) चित्रकला ही था. मैं स्कूल में, घर में जब भी समय मिलता ड्राइंग बनाता था. कॉमिक्स में बने हुए आर्टवर्क को देख देखकर वैसा ही आर्टवर्क बनाने कि कोशिश करता था.  और फिर  मैंने भी भी अपना कॉमिक्स कलेक्शन करना शुरू कर दिया. क्योंकि नागराज की ही कॉमिक्स मैंने अपने जीवन में सब से पहले पड़ी थी तब से नागराज मेरा प्रिय कॉमिक्स कैरक्टर है. मेरी हमेशा से ही अपने घरवालों से 2 मुख्य (Main) डिमांड रहती थी मुझे कॉमिक्स चाहिए और ड्राइंग का सामान जैसे ड्राइंग शीट्स, पेंसिल, स्केच पेन, इंक पेन, ये सब और दूसरा कुछ नहीं. स्कूल से कॉलेज तक के सफर में मेरा कॉमिक्स और ड्राइंग के प्रति interest  वैसा ही बरक़रार रहा.

मैंने ग्रेजुएशन के दौरान ही एनीमेशन का कोर्स ज्वाइन किया था. 2003 में मैंने प्रथम एनीमेशन स्टूडियो, नागपुर ज्वाइन किया था. 2 साल के बाद मैं उसी स्टूडियो में As Trainy Animator जॉइन हुआ. मेरे शहर नागपुर का वह पहला ही एनीमेशन स्टूडियो था. शायद इसी वजह से उसका नाम ''PRATHAM ANIMATION STUDIO'' रखा गया होगा. उस समय वहां BAJAJ, TVS, HONDA, MTV, CHANNEL V, VICCO, PANASONIC इत्यादि बड़ी ब्रांड कम्पनीज का Advertisement का काम होता था. हमारा एनीमेशन स्टूडियो था इसलिए ज़्यादातर सभी कम्पनीज के एनिमेटेड ऐड वहां बनाये जाते थे. शायद बहुत ही कम लोगों को ये पता होगा की VICCO जैसे बड़े ब्रांड का पूरा प्रमोशनल वर्क हमारे स्टूडियो से ही बनकर जाता था. उस वक्त के सिनेमाघरों में इंटरवल के दौरान कई सालों तक हमारे स्टूडियो द्वारा बने गई Advertisement चलती थीं. और मैंने भी इन सभी Animated Advertisement बनाने में अपना योगदान दिया है.उसके बाद स्टडी और स्टेशनरी मटेरियल सप्लाई करने वाली 1 कंपनी जिसका नाम ''KORES COMPANY'' था उसके द्वारा हमारे एनीमेशन स्टूडियो को करीब 200 अलग-अलग विषयों (Topic) पर फुल लेंथ एनिमेटेड मूवीज़ बनाने का कॉन्ट्रैक्ट मिला. सारे जो 200 टॉपिक्स थे वे सब Mythological थे जैसे : झांसी की रानी, शिवाजी महाराज अभिमन्यु आदि इन मे से अभिमन्यु नाम कि 1 Full Length Movie का Pre-Production से लेकर Post Production का बहुत सारा काम  मैने ही किया है. KORES कम्पनी ने इस फ़िल्म के लिये लगने वाले Dialogues कि Recording मुंबई के 1 बड़े रिकॉर्डिंग स्टूडियो से करा के भेजी थी. टीम मेम्बर्स कम होने की वजह से हमें करीब 11 से 12 महीनो का वक्त लगा इस 1 ऑवर की मूवी को बनाने में.

Rtist Animation Studio-The League of Professionals
उसके बाद मैंने 2008 में अपनी जॉब छोड़ दी और 1 कॉलेज में Lecturer  की जॉब करने लगा. वहां उस कॉलेज में 2 साल का "Diploma in Animation" कोर्स पड़ाया जाता था. कुछ महीनों के पश्चात् मैं वहां Animation department का  HOD बन गया और 2011 तक मैंने वहीँ पर अपना जॉब जारी राखी. साथ में मैंने 2008 में ही अपना छोटा सा एनीमेशन स्टूडियो Rtist Animation Studio-The League of Professionals ओपन किया था, वहां मैं कॉलेज की जॉब के बाद Freelancing Projects पर काम करता था. उसके बाद मैंने 1 दूसरा कॉलेज ज्वाइन किया जहाँ 3 साल का "B.Sc. in Animation" डिग्री कोर्स पड़ाया जाता था. वहां  As Lecturer ज्वाइन हुआ, वहां भी 1 साल  बाद Animation Department का  HOD बन गया और साथ में मेरा अपना पर्सनल स्टूडियो भी चलता था. 2014 में वहां से जॉब छोड़ दी तब से अपने स्टूडियो में ही Freelancing Projects पर काम करता हूँ, जैसे कॉमिक्स डिजाइनिंग, 2D एनीमेशन और ग्राफ़िक डिजाइनिंग के मैंने लगभग 20 से 22 सक्सेसफुल प्रोजेक्ट्स किये हैं. सक्सेसफुल से मेरा मतलब है जो प्रोजेक्ट शुरू किया उसे कम्पलीट किया, क्लाइंट ने अप्रूव किया और मुझे Pay किया. इनमे से बहुतांश प्रोजेक्ट मेरे एनीमेशन, कॉमिक्स डिजाइनिंग और स्कूल बुक  illustration के ही हैं.
सवाल 2 : ड्राइंग/एनीमेशन के अलावा आपके और क्या-क्या शौक हैं ? 
जवाब :
फिल्मे देखना मुझे बहुत पसंद है. मेरे पसंदीदा हैं हॉरर, एक्शन, कॉमेडी, ड्रामा, आर्ट और साइंस फिक्शन मूवी. स्कूल में और आज भी मुझे ड्रामा और स्टेज परफॉरमेंस में काफी दिलचस्पी है. कॉलेज में लेक्चरर रहते हुए मैंने अपने स्टूडेंट्स से एनुअल फंक्शन में काफी सरे ड्रामा और स्टेज परफॉरमेंस करवाए हैं. 1 कॉमेडी ड्रामा तो मैंने भी स्टूडेंट के साथ अभिनय किया है. इसके अलावा मुझे गेमिंग का बहुत शौक है खासकर GTA.

सवाल 3 : कॉमिक्स के प्रति अपने जूनून के बारे में कुछ बताएं।
जवाब :
जैसा कि मैंने पहले ही बताया कॉमिक्स से मैं बचपन से प्रभावित रहा हूँ. मेरा कॉमिक्स कलेक्शन बढ़ने और नई नई कॉमिक्स कि स्टोरीज पड़ने मिले और सुन्दर आर्टवर्क देखने को मिले इसलिए मैं पैसे जोड़कर रखता था, जैसे घर में कोई मेहमान आते तो वो जाते वक्त हाथ में कुछ पैसे दे जाते उन्हें मैं रखूँगा और अपने हिसाब से उन्हें खर्च करुँग ऐसी जिद घरवालों के आगे करता था. फिर उन्हीं पैसों में घरवालों से थोड़े और पैसे मांगकर कॉमिक्स खरीदता था. मेरे घर से कॉमिक्स कि दूकान काफी दूर थी और जिस जगह थी उस मार्किट एरिया में छोटी उम्र का बच्चा अगर गया तो गुम ही गया समझो. फिर भी घरवालों के मना करने के बावजूद मै चोरी छिपे साईकल से निकलता था और कॉमिक्स खरीदकर तेज़ साईकल चलाते हुए घर आता था ताकि घरवालों को किसी प्रकार का शक न हो कि मैं दूर मार्केट एरिया में गया था. इसी तरह मेरे 1 स्कूल फ्रेंड के पास करीब 100-150 कॉमिक्स का कलेक्शन था और वो सारी कॉमिक्स मेरे कलेक्शन में नहीं थी और मुझे वो चाहिए थीं, मेरा फ्रेंड उन्हें बेचने को राज़ी हो गया, सवाल फिर वहीँ आकर खड़ा हो गया कि इतना सारा पैसा कॉमिक्स खरीदने के लिए लाऊँ कहाँ से ? और मेरा फ्रेंड तो नम्बर 1 का बनिया था, उस वक़्त भले हमारी उम्र छोटी थी पर मेरा वो दोस्त पूरा बिज़नेस माइंड वाला था. ''पैसे दे और कॉमिक्स ले जा'' बस यहीं पे उसकी गाडी रुकी थी, काफी मिन्नतों के बाद वो राज़ी हुआ कि मैं हर महीने उसे 40 से 50 रुपये दूंगा और वो मुझे अभी सारी कॉमिक्स दे देगा और साथ में मैं जो नई कॉमिक्स खरीदूंगा उसे भी पड़ने दूंगा. उस दोस्त का नाम तो नही बताऊंगा क्योंकि वो भी ये इंटरव्यू पड़ेगा, और फिर इतने सालों कि हमारी घनिष्ट मित्रता पक्की दुश्मनी में बदल जाएगी (jokes apart). 😂

मुझे आज भी या यूँ कहूं कि बचपन से ही ज्यादा घुमने फिरने का शोक था, मैं, मेरी कॉमिक्स और मेरा आर्ट मटेरियल बस यही मेरी दुनिया था.  मेरे 1 रिश्तेदार हैं जो दुसरे शहर में रहते थे, जिनके यहाँ मैं जाने का मौक़ा नहीं छोड़ता था वो भी इसलिए क्यूंकि उनके घर के पास ही एक लाइब्रेरी थी और जब मैं शायद पहली बार उनके यहाँ 15-20 दिनों के लिए गया था तब उन्होंने मुझे लाइब्रेरी कि मेम्बरशिप दिलवा दी और मैं वहां रखी हुई रोज़ नई नई कॉमिक्स पड़ता था. वहां रहते हुए मैंने सब से ज्यादा ''राज कॉमिक्स'' और ''इंद्रजाल कॉमिक्स'' पड़ीं. बस दुःख इस बात का होता था कि काश ये कॉमिक्स लाइब्रेरी वाले को वापस न करनी पड़ें, काश इन्हें मैं अपने कलेक्शन में रख लूं, खैर कोई बात नही उस वक़्त न सही आज कि तारीख़ में ही सही मेरे पास उनमे से बहुतांश कॉमिक्स मेरे कलेक्शन में मौजूद हैं.

अगर कॉमिक्स जूनून कि बात करूँ तो 1 घटना है मेरी ज़िन्दगी कि जिसे मैं हमेशा याद करके भावुक हो जाता हूँ. घटना कुछ ऐसी है - मैं और मेरी छोटी बहन बचपन  में जब साथ मिलकर स्कूल जाते थे तब हम पैदल ही घर से स्कूल के लिए निकलते थे और वैसे भी स्कूल ज्यादा दूर नहीं था, उस दिन स्कूल जाते वक़्त मुझे रास्ते के किनारे कॉमिक्स के कुछ फटे हुए पेजेस दिखे, मैं भागता हुआ गया और उन्हें इकठ्ठा करने लगा, मेरी बहन मुझ पर चिल्लाने लगी ''लवकर कर आपल्याला शाळेत जाण्यासाठी उशीर होत आहे'' (जल्दी कर हमें स्कूल जाने में देर हो रही है) हमारी मातृभाषा मराठी है इसलिए हम मराठी में ही बात करते थे. पर मैंने उसे ignore किया और कॉमिक्स के पेजेस इकठ्ठे करने लगा, उनमे से कुछ इतने फटे हुए थे कि समझ नहीं आ रहा था कि उनके टुकड़े और भी हैं या मैंने सारे उठा लिए, कुछ पेजेस तो पानी में भीगे हुए थे मैंने सारे इकठ्ठे किये और उन्हें संभालकर  अपनी कॉपी में रखा, घर आने के बाद मैंने ख़राब पेजेस को पानी और कपङे  से साफ़ किया और उनपे स्त्री (ironing) करवाई. उनके पेज नम्बर के हिसाब से उन्हें जमाया, शुक्र इस बात का था कि कॉमिक्स के पेज फटे हुए ज़रूर मगर 1 भी पेज मिसिंग नहीं था, मैं अपनी फटी कॉमिक्स की बाइंडिंग भी खुद ही करता था, इस कॉमिक्स की  बाइंडिंग मैंने खुद ही की  और उसे बहुत संभालकर रखा था, उस कॉमिक्स का नाम आज भी मुझे याद है वो कॉमिक्स थी स्व. श्री प्राण कुमार शर्मा जी कि ''चाचा चौधरी और प्रोफेसर शटलकॉक'' वो वक़्त, वो दिन, वो कॉमिक्स के प्रति दीवानापन  ... वो सब याद करके मैं बहुत भावुक हो जाता हूँ. 

सवाल 4 : आपके परिवार और दोस्तों की आपके काम पर क्या राय रहती है और उनसे कितना सहयोग मिलता है ?
जवाब :
परिवार से हमेशा सपोर्ट मिलता रहा. मेरे काम को भी सभी अच्छी तरह से समझते हैं और मुझे सपोर्ट करते हैं. कुछ over smart और extra talented लोगों को आज भी सिर्फ सरकारी नौकरी करने वाले ही settled हैं ऐसा लगता है. हम तो कहीं stand ही नही करते, चाहे हमारा काम कितनी भी मेहनत का क्यों न हो. ऐसे लोगों के लिए कोई घृणा नही अलबत्ता ऐसे लोगों के लिए दुःख होता है कि वो लोग आज भी technology और उससे होने वाले फायदे को समझ नही पाए.

सवाल 5 : अपनी पसंदीदा कॉमिक्स, लेखक, आर्टिस्ट  और कॉमिक करैक्टर  कौन हैं  ?
जवाब :
किसी 1  चयन करना थोड़ा मुश्किल है, सभी कॉमिक्स करैक्टर और उनके आर्टिस्ट अपने आप में अतुलनीय हैं. 80 - 90 के दशक की कॉमिक्स मुझे आज भी बहुत पसंद हैं. सारे आर्टिस्ट लगभग पूरा काम हाथों से करते थे और कहानियां भी इंट्रेस्टिंग होती थीं.

सवाल 6 : आप अपने जीवन में सबसे ज़्यादा किससे प्रभावित है और किसे अपना रोल मॉडल मानते हैं ?
जवाब :
जिस फील्ड (क्षेत्र) में काम करता हूँ, जो मेरा प्रोफेशन है उसमे ''Father of Animation'' के नाम से जाने जाने वाले Sir WALT DISNEY इन्हे मैं अपना रोल मॉडल मानता हूँ।  इन्होने एनीमेशन को 1  नई रूपरेखा दी और एनीमेशन के स्टैण्डर्ड को लाइव मूवीज के बराबर खड़ा किया.

सवाल 7 : आपका पसंदीदा स्पोर्ट, फिल्म, बॉलीवुड / हॉलीवुड कलाकार कौन है ?
जवाब :
आउटडोर स्पोर्ट्स में मेरी बचपन से ही दिलचस्पी नहीं थी. दोस्तों के साथ बस गली क्रिकेट खेल लिया करता था. पर मैं ज्यादा वक़्त चेस, केरम बोर्ड गेम्स इन जैसे खेलों में बिताता था. बॉलीवुड फिल्मों में मुझे चमेली की  शादी, जाने भी यारों, अंदाज़ अपना अपना, हेरा फेरी और भी हैं लिस्ट में, ऐसी फिल्मे देखना पसंद करता हूँ. हिंदी फिल्मों के कलाकारों में मुझे आमिर खान, ऋतिक रोशन, देव आनंद साहब इत्यादि अच्छे लगते हैं. आमिर खान का परफेक्शन, ऋतिक रोशन का डांस और पर्सनालिटी और देव आनंद साहब का अलग और हट के  अंदाज़ और वो मशहूर रोमांटिक गाने मुझे बहुत अच्छे लगते हैं. हॉलीवुड फिल्मों में सुपरहीरोज़ पर बनी सारी  फिल्में बहुत पसंद  हैं चाहे फिर वो Marvel की हो या DC कि. Rambo Series, Predator, See Spot Run, Terminator  Series इत्यादि फिल्में मुझे अच्छी लगती हैं. मुझे हॉलीवुड टीवी सीजन भी बहुत पसंद हैं, उनमे से कुछ खास मेरी चॉइस कि हैं जैसे - , "Two and Half Men, Gotham, Big Bang Theory, Friends etc" और पसंदीदा कलाकारों में Sylveste Stallon, Arnold Schwarzenegger, Charlie Sheen, Charlie Chaplin, Christopher Reeve, Christian Bale, Tom Cruise, Bruce Lee, Jackie Chan इत्यादि कलाकारों कि फिल्में देखना मुझे अच्छा लगता है.

सवाल 8 : भारत में कॉमिक्स के भविष्य के बारे में आपके विचार क्या  हैं ?
जवाब : 
100 प्रतिशत भारत में कॉमिक्स का भविष्य उज्जवल  सुनहरा है. थोड़ा धीरे ही सही पर हमारे भी कॉमिक्स के पात्र कॉमिक्स से निकलकर एनीमेशन में और फिर एनीमेशन से निकल लाइव एक्शन में ज़रूर आएंगे. इसके लिए प्रयास चल रहे हैं और जो लोग इसमें अपना योगदान दे रहे हैं उन सबको मैं 1 कॉमिक्स प्रेमी होने के नाते धन्यवाद देता हूँ.

सवाल 9 :  आपके हिसाब से एक अच्छी कॉमिक्स के क्या मापदण्ड हैं ?
जवाब
: इसका जवाब हरआर्टिस्ट, हर राइटर एक समान ही देगा, अच्छी कॉमिक्स के लिए अच्छी कहानी, उस कहानी पर अच्छा आर्टवर्क और सही compositing और एडिटिंग यही एक तरीक़ा है एक कॉमिक्स को अच्छी कॉमिक्स में तब्दील करने का.

सवाल 10 : वर्तमान में आप किन प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं ?
जवाब :
फ़िलहाल तो मेरे ही कुछ प्रोजेक्ट्स हैं जिनमे 30 मिनट का 1 एनिमेटेड शो है. कॉमिक्स है जो कि सीरीज में आने वाली है और 1 पब्लिकेशन हाउस से 4 बुक्स का illustration का काम मिला है. 

सवाल 11 : आपने  अभी तक किन किन कॉमिक्स  कंपनियों / पब्लिशर्स के साथ काम किया है और उनके साथ काम का अनुभव कैसा  रहा ?
जवाब :
मैंने अभी तक 3 क्लाइंट्स के लिए कॉमिक्स बुक बनाई हैं. मेरे बहुतांश प्रोजेक्ट्स 2D एनीमेशन, स्कूल बुक और ग्राफ़िक डिजाइनिंग के हैं, कुछ नॉवेल के कवर्स भी डिजाईन किये हैं पर वो हाथों कि उँगलियों पर गिन सकें इतने ही हैं. मेरी पहली कॉमिक्स जो मैंने अपने क्लाइंट के लिए बनाई थी उसका नाम है ''सफारी आपका दोस्त'' इस कॉमिक्स को 5 से 12 साल के बच्चों को टारगेट करके बनाया गया था. दूसरी कॉमिक्स एक NGO के लिए बनाई थी जो वृद्धाश्रम चलाते  हैं, स्टोरी थोड़ी भावुक थी, वृद्धाश्रम में रहने वाले पेरेंट्स को टारगेट करके बनाई गई थी, कॉमिक्स का नाम था ''संस्कार शाला'' और तीसरी कॉमिक्स मैंने एक बिज़नेस पर्सन जिनकी कंपनी का नाम ''Mad, Mad Money'' था उनके लिए बनाई थी. स्टोरी में एक सुपरहीरो को रखकर स्मॉल बिज़नेस को किस तरीक़े से बढ़ाना और ज्यादा से ज्यादा पैसा कैसे कमाना ये उस स्टोरी का प्लॉट था, कॉमिक्स का नाम था "THE ADVENTURES OF GOOGLE SINGH AND CAPTAIN HOODIE". सभी क्लाइंट्स काफी अच्छे थे और उनके साथ काम करके ख़ुशी हुई और सभी ने वादा भी किया है कि अगले कॉमिक्स प्रोजेक्ट्स के लिए वो मुझसे जल्दी ही संपर्क करेंगे.  

सवाल 12  : टेक्नोलॉजी के दौर में कॉमिक्स मेकिंग में बहुत बदलाव आये हैं, पहले जहाँ लगभग सभी काम हाथ से किये जाते था वहीँ अब कंप्यूटर / लैपटॉप / ग्राफ़िक्स टेबलेट का इस्तेमाल होता है, टेक्नोलॉजी के बढ़ते चलन से कॉमिक्स मेकिंग को कितना फायदा पहुंचा है ?
जवाब
: टेक्नोलॉजी कि वजह से केवल फायदा ही (revolutionary) क्रांतकारी बदलाव आया है, कॉमिक्स में इंक, कलर और इफ़ेक्ट करने में लगने वाला लम्बा समय आज टेक्नोलॉजी कि वजह से घट गया है और प्रोडक्शन में ग्रोथ हुई है, पहले कभी कोई आर्टवर्क या इंकिंग में गड़बड़ी हो जाती थी तो पूरा आर्टवर्क नया बनाना पड़ता था, परन्तु technology कि वजह से आज गलतियों को सुधारा जा सकता है और काम में परफेक्शन भी आता है.

सवाल 13  : कॉमिक्स से जुड़ी आपके जीवन की कोई मज़ेदार घटना जिसे सोचकर आपके चेहरे पर मुस्कान आ जाती हो ?
जवाब : 
मुस्कान तो अभी भी आती है लेकिन उस उस घटना के वक़्त तो मैं रो दिया था. कॉमिक्स का नया सेट आ गया था और वो सेट मैं जिस कॉमिक्स सेलर से खरीदता था उसके पास नहीं आया था. हर दुसरे दिन जाकर मैं उनसे पूछता था ''कॉमिक्स आई क्या ?'' और वो न में ही जवाब देते थे, फिर उन्होंने ही मुझे बताया कि 1 बार रेल्वे स्टेशन जाकर देखो वहां के वेंडर के पास शायद मिल जाएगी. मैं और मेरा कजिन (वो भी कॉमिक्स लवर था) हम दोनों रेल्वे स्टेशन गए और पहले ही प्लेटफार्म पर 1 वेंडर के पास हमें हमारी कॉमिक्स मिल गई और साथ में कुछ पुरानी कॉमिक्स भी मिलीं जो हमारे कलेक्शन में नहीं थी. हम दोनों को तो जैसे खज़ाना मिल गया हो ऐसे खुश हो गए. उसके बाद जैसे ही थोड़े बहुत पैसे अरेंज होते हम दोनों कॉमिक्स खरीदने रेल्वे स्टेशन जाते, सारे प्लेटफार्म पर घूमते और जो भी कॉमिक्स चाहिए होती वो खरीदते. सब कुछ अच्छा चल रहा था, पर एक दिन प्लेटफार्म से बाहर निकलते हुए गेट पर खड़े सिक्यूरिटी पुलिस वाले ने हमसे पूछा ''प्लेटफार्म टिकट दो'' हम दोनों एक दुसरे को घूरने लगे, हमें उस वक़्त तक ये पता ही नहीं था कि रेल्वे स्टेशन में बिना प्लेटफार्म टिकट जाना मना है, अब तक हम कभी पकडे नही गए थे, फिर क्या उनके हाथ जोड़े, उन्हें समझाया कि हम नागपुर के ही रहने वाले हैं और कॉमिक्स खरीदने यहाँ आते हैं, हमें नहीं पता था प्लेटफार्म टिकट के बारे में, हम आगे से ऐसा नहीं करेंगे, प्लीज़ हमें जाने दो, उन्हें भी जब पूरी तसल्ली हुई कि बच्चे हैं और कहीं से कोई सफ़र करके नहीं आ रहे तब उन्होंने चेतावनी देकर हमें छोड़ दिया, लेकिन हम दोनों की आँखों से आंसू ज़रूर निकल गए थे और तब से ये सीख मिल गई कि रेल्वे स्टेशन अगर जाना  हो तो प्लेटफार्म टिकट खरीदना पड़ेगा. उसके बाद से हम जब भी जाते तो प्लेटफार्म टिकट खरीदकर ही अन्दर जाते थे.

सवाल 14  : भारतीय कॉमिक्स और विदेशी कॉमिक्स में तुलना करने पर आप क्या अन्तर पाते हैं ?
जवाब :
आपको 10 में से लगभग 7 लोग 1 जैसा ही जवाब देंगे जब आप उनसे पूछेंगे कि क्या आप कॉमिक्स पड़ते हो ? और वो जवाब होगा - ''कॉमिक्स बच्चों के लिए होती है'' और वहीँ विदेश में कॉमिक्स को गेम्स, मूवीज और एनीमेशन के बराबर समझा जाता है और सम्मान दिया जाता है. कॉमिक्स को भी 1 महत्वपूर्ण कैरियर के रूप में देखा जाता है. अगर हमारी कॉमिक्स इंडस्ट्री में बच्चों के साथ साथ बड़ों को भी टारगेट करके कहानियां और आर्टवर्क बनाया जायेगा तो शायद कुछ हद तक कॉमिक्स को हमारे देश में ज्यादा exposure मिलेगा. विदेशों में कॉमिक्स कई सालों से बनती आईं हैं और उन्होंने अपना एक बेंचमार्क बनाकर रखा है, उदाहरण के टूर पर MARVEL, DC इन दोनों ने कॉमिक्स से लेकर लाइव एक्शन का सफ़र तय किया है.

सवाल 15  : अब तक का अपना सबसे चुनौतीपूर्ण और सर्वश्रेष्ठ काम (आर्ट) किसे मानते हैं?
जवाब :
मेरे लिए तो हर दिन का काम चुनौतीपूर्ण होता है. आज किया काम कल के काम से बेहतर लगता है. फ्रीलांसिंग प्रोजेक्ट्स करते हुए भी कोई काम उतना चुनौतीपूर्ण नहीं लगा, हाँ परन्तु अनुभव सबका अलग अलग था. 

सवाल 16  : आपके आगामी प्रोजेक्ट्स के बारे में कुछ बताएं ?
जवाब :
मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट्स है कि मैं एक सुपर हीरो पर कॉमिक्स बनाऊं और इस पर एनीमेशन भी बनाऊं. कॉमिक्स कि कहानी तो मैंने लिख ली है, कॉमिक्स का सुपर हीरो भी बना दिया है और कुछ पेजेस का आर्टवर्क भी तैयार है, जल्दी ही आपसे वो सब शेयर करूँगा और 1 पब्लिशिंग हाउस से 4 Mythological स्टोरी बुक्स का illustration का वर्क मिलने वाला है कॉन्ट्रैक्ट और अन्य बातें तय हो गईं हैं, बस काम शुरू होने का है. 

सवाल 17  : नए  आर्टिस्ट  जो कॉमिक्स और एनीमेशन इंडस्ट्री में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं उन्हें मार्गदर्शन के लिए आप क्या राय देना चाहेंगे ?
जवाब :
एनीमेशन ये 1 प्रोसेस है जिसमे ड्राइंग, एक्टिंग और 1 सुत्रबाध तरीक़े से एनीमेशन को समझना और सिखलाना पड़ता है, मैं किसी को कोई दोष नहीं दे रहा परतु आज एनीमेशन को लोगों ने कमर्शियल बना दिया है. स्टूडेंट्स से लाखों में फीस लेकर उन्हें केवल सॉफ्टवेयर पढाकर एनीमेशन पड़ा दिया ऐसी धोखाधड़ी हो रही है. मैं उन सभी से सिर्फ 1 ही सवाल पूछना चाहूँगा आज से करीब 90 साल पहले SIR WALT DISNEY ने एनीमेशन को एक नए ही तरीक़े से पेश किया था, उस वक़्त क्या कम्पुटर और एनीमेशन सॉफ्टवेयर थे ? definitely जवाब ''नहीं थे'' यही होगा, लेकिन उसके बावजूद उन्होंने अपने जीवनकाल में 80 से अधिक फिल्में और करीब 100 से अधिक टीवी शो बनाये हैं और सभी बहुत ही फेमस रहे हैं, उनके बाद भी उनके नाम से फ़िल्में बनती आ रही हैं और बनती रहेंगी. एनीमेशन का एक बेसिक फाउंडेशन कोर्स होता है जिसमे करीब 2 साल का समय लगता है इसमें आपको SIR WALT DISNEY के तरीक़े से एनीमेशन सिखाया जाता है.  जिसमे ड्राइंग, बेसिक थ्योरी, एनीमेशन कि पूरी पाइपलाइन जैसे Pre-Production, Production और Post-Production, Animation Principles इत्यादि सिखाया जाता है और इन सब में किसी भी प्रकार से कंप्यूटर या सॉफ्टवेयर का यूज़ नहीं होता, सॉफ्टवेयर से एनीमेशन में लगने वाली लम्बी प्रोसेस को छोटा कर दिया जाता है और कई सारे ऐसे टूल्स हैं जिनसे छोटा बड़ा एनीमेशन का पार्ट easily हो जाता है. पहले हर फ्रेम को हाथों से ड्रा करके इंक और पेंट किया जाता था, सॉफ्टवेयर में ये काम आसानी से और बड़ी जल्दी हो जाता है, लेकिन इसके लिए सबसे पहले आपको एनीमेशन आना चाहिए. सॉफ्टवेयर ये 1 BUNCH of TOOLS है, टूल्स का क्या यूज़ है ? कैसे यूज़ किया जाता हैं ? ये सिखा देते हैं और एनीमेशन पढा दिया ऐसा बोलते हैं. उस टूल्स को एनीमेशन बनाते वक़्त कहाँ यूज़ करना, किस तरीक़े से यूज़ करना है ये सीखना महत्वपूर्ण है. एनीमेशन का सही नॉलेज और सॉफ्टवेयर का सही इस्तेमाल ये सीखना ज़रूरी है. आज स्टूडेंट्स और उनके पेरेंट्स बड़ा infrastructure देखकर इम्प्रेस हो जाते हैं और लाखों में फीस देते हैं फिर Practically जब वो किसी स्टूडियो में काम करते हैं तब उन्हें काफी मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं, 1 समय तो काफी Disappointment होते  है और वो ये सोचने लगते हैं कि एनीमेशन कि फील्ड में आकर उन्होंने गलती कर दी, सच बात तो ये होती है कि उन्होंने सही मार्गदर्शन देने वाले इंस्टिट्यूट या सही मार्गदर्शन देने वाले गुरु (teacher) का चयन नहीं किया. एनीमेशन कि Academic Study और actual में एनीमेशन करना बहुत different है, मैं जब स्टूडेंट था तब मेरे सर ने एक बात बताई थी ''अगर एनीमेशन सीखना है तो पहले उनसे सीखो जो पहले एनीमेशन बना चुके हैं'' लाखों रूपए बर्बाद करके अगर सही ट्रेनिंग न मिले तो क्या फायदा ? और जहाँ तक कॉमिक्स आर्टिस्ट कि बात है तो मैरे जैसा beginner उन्हें क्या मार्गदर्शन देगा, मैं खुद अभी भी कॉमिक्स इंडस्ट्री मैं बहुत नौसखिया हूँ.

सवाल 18  : अंत में कॉमिक्स फैंस को क्या संदेश देना चाहेंगे?
जवाब
: इंडियन कॉमिक्स इंडस्ट्री आज थोड़े मुश्किल दौर से गुज़र रही  है. आज के बच्चे टीवी, कंप्यूटर, गेमिंग आदि में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं इसलिए जितना हो सके कॉमिक्स को प्रमोट करे, बच्चों में कॉमिक्स के प्रति इंटरेस्ट जगाएं, उन्हें भी कॉमिक्स आर्टिस्ट बनने के लिए प्रेरित करें और कॉमिक्स इंडस्ट्री को फिर उसी मुक़ाम  पर वापस ले आयें.

मंगेश जी अपने क़ीमती वक़्त से हमारे इंटरव्यू के लिए वक़्त देने के लिए आपका बहुत शुक्रिया।  इस इंटरव्यू के माध्यम से हमें आपको और आपके काम के बारे में जानने का मौक़ा मिला। आपने हमें कॉमिक्स और एनीमेशन से जुडी बहुत सी महत्वपूर्ण जानकारियां दी निश्चित ही  कॉमिक्स फैंस और आर्टिस्ट/एनिमेटर  के लिए उपयोगी साबित होंगी. हम उम्मीद करते हैं भविष्य में भी आप लगातार कॉमिक्स /एनीमेशन  इंडस्ट्री में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते रहेंगे और हमें आपके द्वारा निर्मित  बेहतरीन कॉमिक्स पड़ने को मिलेंगी और आपके द्वारा निर्मित एनीमेशन मूवीज / सीरियल देखने को मिलेंगे ।   भविष्य के लिए हमारी  हार्दिक  शुभकामनायें.



 शहाब ख़ान 
©Nazariya Now

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