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Sunday, March 11, 2018

इंटरव्यू : एक खास मुलाक़ात सूरज पॉकेट बुक्स के संस्थापक व लेखक श्री शुभानन्द जी के साथ - An Exclusive Interview with Sooraj Pocket Books Founder & Author Shubhanand Sir

कॉमिक्स/किताब कलाकारों/लेखकों प्रकाशकों के इंटरव्यू की विशेष श्रंखला में आज एक खास इंटरव्यू में हम आपको रूबरू करवा रहे हैं सूरज पॉकेट बुक्स के संस्थापक व लेखक  श्री शुभानन्द जी से ।  शुभानन्द जी ने अनेकों किताबों का लेखन किया है। शुभानन्द जी ने अपने बेहतरीन लेखन से पाठकों के दिलों में अपनी ख़ास जगह बनाई है। शुभानन्द जी अपने प्रकाशन सूरज पॉकेट बुक्स द्वारा निरंतर साहित्य जगत में अपना अतुलनीय योगदान दे रहे हैं । सूरज पॉकेट बुक्स ने लगातार बेहतरीन किताबें उपलब्ध करवाकर कम वक़्त में ही प्रकाशन जगत में अपना एक ख़ास मुक़ाम बनाया है।  सूरज पॉकेट बुक्स  द्वारा प्रकाशित किताबों को पाठकों ने काफी पसंद किया है।  सूरज पॉकेट बुक्स द्वारा सस्पेंस, थ्रिलर, जासूसी, प्रेम,  हॉरर, हास्य, फैंटसी, नॉवेल, कहानी संग्रह, धार्मिक, बाल साहित्य सभी प्रकार की किताबें प्रकाशित कर पाठकों के दिलों में अपनी जगह बनाई है। आइये शुभानन्द जी से उनकी ज़िंदगी के रोमांचक और कामयाब  सफ़र के बारे में जानते हैं ।
सर, विशेष इंटरव्यू में आपका स्वागत है।
सवाल 1 : अपने जीवन के अब तक के सफर के बारे में बताएं ।
जवाब
: मेरे जीवन में अगर कुछ खास है तो वो है पढ़ने और लिखने की ललक और जुनून। लिखने का दीवानापन तब से है जब से मैं लिखने लायक हुआ। पांच साल की उम्र से ही स्कूल की कॉपियों में कॉमिक्स बनानी शुरू कर दी थी और पहला पात्र था जावेद ।

सवाल 2 :  आपको लेखन की प्रेरणा कब और कहाँ से मिली ? आप कब से लेखन कार्य में संलग्न हैं ?
जवाब :
 मुझे बचपन से ही कॉमिक्स पढ़ने का बेहद शौक था। मनोज, राज, डायमंड सब मेरी पसंदीदा थीं। जासूस तरह के पात्र मुझे खास आकर्षित करते थे। जैसे कि शेरबाज,  कर्नल कर्ण, क्रुकबांड आदि। फिर मेरा रुझान एस.सी. बेदी सर की राजन इक़बाल सीरीज़ की तरफ हुआ और काफी साल मैंने सिर्फ इन्हें ही पढ़ा । 12 साल की उम्र से मैंने 40-60 पेज के बाल उपन्यास लिखने शुरू कर दिये थे। बाद में वेदप्रकाश शर्मा, जेम्स हेडली चेइज़, शिड्नी शेल्डन, एरिक सेगल, रिचर्ड बाक, सुरेंद्र मोहन पाठक, पाउलो कोएल्हो, अयनरैंड आदि बहुत से लेखकों को पढ़ा और सराहा।

सवाल 3 : लेखन के अलावा आपके शौक और क्या-क्या हैं ?
जवाब :
 लेखन के अलावा मुझे संगीत सुनने का काफी शौक है। मुझे क्लासिक रॉक, हेवीमेटल और इलेक्ट्रॉनिक म्यूज़िक खास पसंद है। इसके अलावा कई साल शतरंज खेलने की भी लत रही।

सवाल 4 : आपकी पहली रचना क्या थी ? वह कब लिखी गई ?
जवाब :
 पांच साल की उम्र में लिखी कॉमिक्स, नाम अभी याद नहीं। प्रोज़ में पहला लघु उपन्यास कहर की देवी। वैसे मेरी पहली प्रकाशित रचना बालहंस में छपी एक कविता थी । उपन्यासों में राजन इक़बाल की वापसी मेरा प्रथम प्रकाशित उपन्यास था।

सवाल 5  : आपके परिवार और दोस्तों की आपके काम पर क्या राय रहती है और उनसे कितना सहयोग मिलता है ?
जवाब : परिवार में देखा जाये तो सबसे ज़्यादा सहयोग मुझे अपनी पत्नी रुनझुन से ही प्राप्त है क्योंकि वह खुद एक लेखिका है और बहुत ही रचनात्मक प्रवृत्ति की हैं, इसके अलावा मेरे मामा रवि प्रकाश वर्मा और विजय प्रकाश वर्मा ने बचपन से ही मुझे लिखने के लिए सदैव प्रोत्साहित किया। मेरे माता पिता भी मेरी किताबें गर्व के साथ संग्रह करके रखते हैं। बचपन में ही तीन चार मित्र हमेशा रहे जो कि मेरी लिखी पांडुलिपि पढ़ने के लिए हमेशा तैयार रहते थे, वर्तमान में तो मेरे साथ ही लिखा कि मेरे परम मित्र हैं और इसके अलावा कई पाठक भी मेरे मित्र बन गए हैं इन सभी का सहयोग मेरे साथ हमेशा रहा है और इनसे मुझे और लिखने की ताकत मिलती है।

सवाल 6 : आप अपने जीवन में सबसे ज़्यादा किससे प्रभावित है और किसे अपना रोल मॉडल मानते हैं ?
जवाब
: दरसल में रोल मॉडल में विश्वास नहीं रखता। क्योंकि हर इंसान में अलग प्रतिभा होती है, चाहे वह आपसे बड़ा हो चाहे छोटा। मैं हर किसी से कुछ ना कुछ सीखने की कोशिश जरूर करता हूं। रचनात्मक लोगों से स्वाभाविक तौर पर मेरा मेलजोल हो जाता है। 

सवाल 7 : आपका पसंदीदा स्पोर्ट, फिल्म, बॉलीवुड / हॉलीवुड कलाकार कौन है ?
जवाब :
  क्रिकेट, टेनिस एक जमाने में काफी फ़ॉलो किया है। फिल्मों से ज्यादा टीवी सीरीज़ मैं और मेरी पत्नी दोनों देखना पसंद करते हैं जैसे कि प्रिज़नब्रेक, गेम ऑफ थ्रोन्स, हॉउस एमडी, बिगबैंग थ्योरी, हाऊ आई मेट योर मदर आदि।

सवाल 8 : आपकी रचनाओं के किरदार आप कहाँ से चुनते हैं ?
जवाब :
 जिनसे मिलता हूँ, जिनके बारे में सुनता हूँ, पढ़ता हूँ वहीं से। बाकी कल्पनाओं के घोड़े दौड़ते ही हैं।

सवाल 9 : किस रचना ने लेखन के दौरान मन को सबसे ज़्यादा प्रभावित किया?
जवाब :
''कमीना'' लिखते वक्त में पूरी तरह से अभिषेक मिश्रा नामक ड्रग माफिया केअंतर्मन में उतर गया था।

सवाल 10 : सूरज पॉकेट बुक्स स्थापना कैसे हुई ?
जवाब :
सब कुछ धीरे-धीरे अपने आप ही होता चला गया पहले अकेले लिखता था फिर साथ लिखने वाले मिल गए।

सवाल 11 : नई जनरेशन की रूचि किताबों में कम है ये चिंता का विषय है, उन्हें किताबों से जोड़ने के लिए क्या किया जाना चाहिए ?
जवाब :
मुझे ऐसा नहीं लगता। किताब पढ़ने वाले लाखों करोड़ों की तादाद में है अगर आप पाठकों को उनकी रुचि की रचनाएं देंगे तो वह जरुर पढ़ेंगे। 

सवाल 12 : हिंदी साहित्य का भविष्य आप कैसा देखते हैं ?
जवाब :
 हिंदी पढ़ने वाले अभी भी बहुतायत में है। पब्लिशर अक्सर अंग्रेजी के प्रचलन और दुनिया भर की चीजों पर दोष देते हैं पर ऐसा नहीं है हम लोग कंपटीशन के जमाने में रहते हैं अगर आपको अपनी जगह बनानी है तो आपको कुछ नया करते रहना होगा नए माहौल नई जनरेशन के हिसाब से खुद को ढालते रहना होगा और अपना USP क्रिएट करना पड़ेगा।


सवाल 13  : आपकी नई प्रकाशित किताब ‘’मास्टरमाइंड’’ के बारे में कुछ बताइए
जवाब :
 ''मास्टरमाइंड'' मेरी समझ में मेरी अब तक की सबसे बेहतरीन रचनाओं में से एक है। इसको लिखने के लिए मैंने काफी मेहनत की है और मेरे साथ मेरे शुभचिंतकों ने भी पब्लिशिंग से पहले इसे पढ़कर इसमें कई फेरबदल करवाएं जिससे जो रचना बनकर आई वह काफी बेहतरीन है। कहानी काफी गंभीर मुद्दे पर है और विश्व में हो रही गतिविधियों पर आधारित है।कहानी बेहद तेज रफ्तार और रहस्यमई है और एक सिटिंग में पढ़ने योग्य है।तो मेरी राय है कि इसे आप फुर्सत में ही पढ़ना शुरू करें।

सवाल 14 : किताबों / लेखन से जुड़ी आपके जीवन की कोई मज़ेदार घटना जिसे सोचकर आपके चेहरे पर मुस्कान आ जाती हो ?
जवाब :
लेखन से जुड़ी अब तक की सबसे मजेदार घटना तो हमारी सूरज पॉकेट बुक्स की दिल्ली में हुई इवेंट ही थी जहां हम सभी लेखक और पाठक एक परिवार की तरह मिले। उस समारोह में हुई अभिभूति को मैं एक पल के लिए भी नहीं भूल सकता।


सवाल 15 :  साहित्य के क्षेत्र में मीडिया और इंटरनेट की भूमिका आप कैसी मानतेहैं ?
जवाब :
इंटरनेट और मीडिया तो साहित्य में क्रांति लेकर आया है एक वक्त जब पाठक पुरानी किताबें ब्लैक में लेने पर मजबूर थे अब अधिकतर मशहूर लेखक की कृतियां ई-बुक फॉर्म में उपलब्ध हो गई हैं इंटरनेट के जरिए किताबों का प्रचार करना भी काफी आसान हो गया है लेखकों और पाठकों के बीच फासले भी कम हो गए हैं जिससे कि हम लेखकों को लाइव फीडबैक मिलता रहता है जिससे कि पाठकों के मन मुताबिक साहित्य को आसानी से ढाला जा रहा है।

सवाल 16 : वर्तमान में आप किस प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं ?
जवाब : 
फिलहाल में एक नई विधा पर काम कर रहा हूं जिसके बारे में अभी ज़्यादा कुछ नहीं बता सकता। इसके अलावा जावेद अमर जॉन सीरीज का अगला नावेल लिखना शुरू किया है जिसका वर्किंग टाइटल अंतर्द्वंद्व है। साथी अभिषेक मिश्रा की अलग से सीरीज शुरू करने का इरादा है।

सवाल 17 : सूरज पॉकेट बुक्स के भविष्य में आने वाले प्रोजेक्ट्स के बारे में कुछ बताएं ?
जवाब :
इस साल सूरज पॉकेट बुक्स से काफी किताबें आने वाली हैं जैसे कि अमित खान की पुरानी किताबें, कुछ सामाजिक कहानी संग्रह व उपन्यास, काव्यसंग्रह, कई बालसाहित्य, विश्व साहित्य में प्रिंसेस एंड द गोबलिन, ड्रैकुला व जेम्स हेडली चेइज़ के कुछ अनुवाद। इसकेअलावाहमारे रेगुलर लेखकों के अन्य उपन्यास।

सवाल 18  :नए लेखकों को मार्गदर्शन के लिए आप क्या सलाह देना चाहेंगे ?
जवाब :
नए लेखकों के लिए सिर्फ यही कहना चाहूंगा कि पब्लिसिटी से ज्यादा पहले अपनी लेखनी को निखारने पर ध्यान दें अगर अच्छा लिखेंगे तो पब्लिसिटी अपने आप ही मिल जाएगी।

सवाल 19 : अंत पाठकों को क्या सन्देश देना चाहेंगे ?
जवाब:
पाठकों के बिना लेखक का अस्तित्व नहीं हो सकता। यह पाठक के ही हाथ में है कि वह अपने प्रिय लेखक से क्या लिखवा ले और इसके लिए यह जरूरी है कि भले ही किसी भी माध्यम से क्यों ना हो पर वह अपनी राय से लेखक को अवगत जरूर कराए। 


सर अपने क़ीमती वक़्त से हमारे इंटरव्यू के लिए वक़्त देने के लिए आपका बहुत शुक्रिया।  इस इंटरव्यू के माध्यम से हमें आपको और आपके काम के बारे में जानने का मौक़ा मिला। आपके द्वारा दी गई  महत्वपूर्ण जानकारियां लेखकों  और पाठकों के लिए बहुत उपयोगी साबित होंगी।  हम उम्मीद करते हैं भविष्य में भी आप लगातार साहित्य जगत में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते रहेंगे और हम आपके बेहतरीन लेखन से रूबरू होते रहेंगे। आपके प्रकाशन सूरज पॉकेट बुक्स द्वारा भविष्य में भी बेहरीन किताबों का प्रकाशन जारी रहेगा और सूरज पॉकेट बुक्स भविष्य में अपने नाम की तरह की साहित्य के आकाश में सूरज की तरह प्रकाशमान रहेगा। हमारी हार्दिक शुभकामनायें. 



 शहाब ख़ान  
©Nazariya Now

सूरज पॉकेट द्वारा प्रकाशित सभी किताबें Amazon  और अन्य कई ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट पर पेपरबैक और ई-बुक फॉर्मेट में उपलब्ध हैं।  





1 comment:

  1. सर, आपके इस साक्षत्कार से काफी कुछ सीखने को मिला।

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