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Monday, April 23, 2018

रैप की घटनाओं के विरोध में फेसबुक अकाउंट डीएक्टिवेट प्रोटेस्ट - #DeactivateFBForRapeVictim #IndiaAgainstRape

देश में बढ़ती रैप की घटनाओं के कारण पूरे देश में आक्रोश है।  सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक लोग खुलकर इन घटनाओं का विरोध कर रहे हैं।  इन घटनाओं के विरोध में सोशल मीडिया पर भी कई तरह के अभियान भी चलाये जा रहे हैं।  इनमे एक अभियान 23 अप्रैल को चलाया गया, जिसमे विरोध स्वरुप 24 घंटे के लिए स्वेच्छा से लोगों ने अपने फेसबुक अकाउंट डीएक्टिवेट करके अपना विरोध दर्ज कराया। फेसबुक अकाउंट डीएक्टिवेट करते समय कारण  वाले ऑप्शंस में #IndiaAgainstRape लिखकर डीएक्टिवेट किया गया और उसका स्क्रीनशॉट #DeactivateFBForRapeVictim  #IndiaAgainstRape  हैशटैग के साथ ट्विटर पर शेयर किया गया।  23 अप्रैल को रात को 12 बजे से इस अभियान की शुरुआत की गई और पूरे दिन ट्विटर पर ये अभियान ज़ोरों पर चला।
 
इस अभियान की शुरुआत नावेद चौधरी, अब्दुल अलीम, ज़ैद पठान, अफ़ज़ल, मो. शान, मो.नईम, एच आर खान  द्वारा की गई। देशभर में लोगों ने इस अभियान को अपना समर्थन दिया और अपना फेसबुक अकाउंट डीएक्टिवेट करके अपना विरोध दर्ज कराया। भारत के अलावा भी कई देशों में लोगों ने इस अभियान का समर्थन में 24 घंटे के लिए अपना फेसबुक अकाउंट डीएक्टिवेट किया। ट्विटर पर पूरा दिन #DeactivateFBForRapeVictim   #IndiaAgainstRape हैशटैग ट्रेंड हो रहा था।  ये अभियान नया और रचनात्मक था, लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपना योगदान देकर इस अभियान को सफल बनाया।  

देश में बढ़ती रैप की घटनाओं के विरोध में कई लोग पीड़िताओं को इन्साफ दिलाने के लिए सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक अभियान चला रहे हैं।  इस अभियान के द्वारा भी लोगों ने इन घटनाओं के विरोध में अपना आक्रोश ज़ाहिर किया।  पिछले कुछ समय में देश में ऐसी घटनायें बड़ी हैं।  हाल ही ही में कठुआ 8 साल की मासूम बच्ची के साथ रेप की शर्मनाक घटना दिल दहला देने वाली है।  एक मासूम बच्ची को सुनियोजित तरीक़े अपहरण करके जिस तरह पूरी घटना को अंजाम दिया गया वो सुनकर कठोर से कठोर व्यक्ति का दिल भी दहल जायेगा।  बलात्कारी को बचाने के लिए जिस तरह कुछ लोगों ने प्रदर्शन किया वो और भी ज़्यादा शर्मसार करने वाला है।  कोर्ट में कुछ वकील और सड़क पर कुछ नेता भी आरोपियों के बचाव में उतर आये। एक नेता ने तो इस घटना के पीछे पाकिस्तान का हाथ होने वाला बयान तक दे दिया। अपराधियों के समर्थन में तिरंगे के साथ जुलूस तक निकला गया।  दूसरी और उन्नाव में हुई घटना में विधायक का नाम शामिल है इसके बावजूद उसे बचने की कोशिश होती रही और बाद में हाईकोर्ट के आदेश के बाद गिरफ़्तारी हो सकीय।  इस घटना में कई लोग आरोपी के समर्थन में उतर आते हैं।  कठुआ की घटना के आरोपियों में आरोपियों में रिटायर्ड अधिकारी और पुलिसकर्मी भी शामिल है तो उन्नाव की घटना में एक जनप्रतिनिधि सोचिये जिस पर देश और समाज की रक्षा और विकास का दायित्व है वो खुद ही रक्षक से भक्षक बन जाये तो गंभीर चिंता का विषय  है ?  महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में पिछले कुछ समय में लगातार बढ़ोतरी हुई है।  मासूम बच्ची से लेकर बुज़ुर्ग महिला के साथ भी ऐसी शर्मसार घटनायें होती रहती हैं।  गांव में घूँघट में रहने वाली महिला से लेकर मेट्रो सिटी में जॉब करने वाली महिला भी सुरक्षित नहीं है।  
©Nazariya Now


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