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Tuesday, April 10, 2018

आत्मा का वस्त्र (कहानी) - लेखक : डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी

“अमोदा, तुमसे दूर नहीं रह सकता । ओ..... तुमने क्यों किया ऐसा? मेरे लिए जीने से आवश्यक तुम हो। और अगर तुम मेरे जीवन में नहीं हो तो मृत्यु का वरण ही सही है।”, 

अनुराग मन ही मन ये सोचता चला जा रहा था। समुद्र की लहरों की तरह सदैव प्रसन्न रहने वाला अनुराग का अंतर-मन आज समुद्र की तरह गहरा हो गया था। अंतर-मन की हलचल किसी को दिखाई नहीं दे रही थी, आँखे थोड़ी सी नम थी लेकिन ह्रदय बहुत ही तीव्र था। गले से शब्द नहीं निकल रहे थे, लेकिन मस्तिष्क में इतने विचार आ रहे थे कि हर विचार को देखना भी असंभव लग रहा था। 

मनुष्य के जीवन में जब स्वयम के विचार ही विकार उत्पन्न करना आरम्भ कर दें तो यह मस्तिष्क में रोग उत्पन्न कर सकता है और धीरे-धीरे विकृत विचार, मानसिकता को भी विकृत करना आरम्भ कर देते हैं और इस निराशा में व्यक्ति कुछ भी कर सकता है, रोगी हो सकता है, आत्मघातक भी हो सकता है और अपराध भी कर सकता है। सोचने-समझने की शक्ति क्षीण होने पर ऐसा होना स्वाभाविक है।

अमोदा और अनुराग बचपन से ही साथ पढ़ते थे और अमोदा, अनुराग को पहले दिन से ही मोहित करती थी, अनुराग आरम्भ में तो समझा नहीं, लेकिन धीरे धीरे अमोदा उसके जीवन का अभिन्न अंग बनती गयी। दोनों का नाम भी स्कूल से लेकर कॉलेज तक के उपस्थिति रजिस्टर में भी आगे-पीछे ही रहा। अनुराग का बचपन मन युवा होने तक समझ गया था कि अमोदा उसके जीवन के लिए ही है। अनुराग मितभाषी, अंतर्मुखी व्यक्ति था लेकिन अमोदा इसके विपरीत सबके साथ हंसती रहती और हंसाती रहती थी। अमोदा, अनुराग के प्रेम को भी हंसी ठठ्ठा ही समझती थी और अनुराग उसके लिए एक अच्छे मित्र के समान था।

आज अमोदा ने बड़ी मासूमियत भरी खुशी से अपनी मंगनी की बात सबको बताई थी। अनुराग हक्का-बक्का रह गया, उसके जीवन की सबसे बड़ी खुशी, बड़ी खुशी के साथ उससे दूर जा रही थी और उसको खुश देखकर वो निराश हो रहा था। वो अपने कॉलेज से निकल कर समुद्र तट पर आ गया और उसी समुद्र में विलीन होने के विचार उसके मन में स्वतः ही प्रकट होने लगे। वो सोच रहा था कि काश ये लहरें अपने साथ में उसे भी ले जाए और वह फिर कभी भी लौट कर धरती पर नहीं आये।

आत्मघात के विचार उसके मस्तिष्क पर हावी हो चुके थे। और उसने निर्णय कर लिया कि अब वो जीवित नहीं रहेगा। किसी भी हाल में नहीं, अमोदा उसका जीवन थी अब जब वो ही बिछड़ गयी तो जीवन ही बिछड़ गया। अब तो मृत्यु ही साथी है।

“मुझे जीवित नहीं रहना है”, उसने अंतिम निर्णय ले लिया।

उसने एक स्थान तलाश कर लिया, जहां पर सैलानी और अन्य लोग नहीं जाते थे क्योकि वह स्थान संकटमय था और वहां कई दुर्घटनाएं पहले भी हो चुकी थी। आज भी उस स्थान पर कोई नहीं था। कुछ क्षण अनुराग नम आँखों से लहरों का उतार-चदाव देखता रहा, उसे हर लहर में अमोदा का अक्स दिख रहा था और उसने ठान लिया कि उसे अमोदा में विलीन होना है, उसकी हंसी के साथ एकाकार होना है, और ये लहरें अमोदा का ही प्रतिरूप है। 

“अमोदा मैं आ रहा हूँ, तुम्हारे पास”, अनुराग चिल्ला कर बोला, उसकी वाणी में दर्द के साथ कुछ मस्तिष्क की विकृति भी झलक रही थी, और यह कहते ही उसने बड़े बड़े क़दमों के साथ एक चट्टान की तरफ चलना आरम्भ कर दिया, उस चट्टान से पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी थी और कुछ व्यक्ति मर भी गए थे।

उसने उस चट्टान पर चढना शुरू कर दिया, चट्टान पर फिसलन थी, लेकिन उसका मन केवल वही शब्द दुहरा रहा था, “अमोदा मैं आ रहा हूँ...... तुम्हारे पास”, मृत्यु उसके समीप आ रही थी यह कहना सही नहीं होगा, लेकिन अनुराग मृत्यु के समीप जा रहा था, उसे पता था, कुछ क्षणों के पश्चात उसकी आत्मा इस शरीर को त्याग देगी, आत्मा जिसे पानी नहीं गला सकता है, आग नहीं जला सकती है, शस्त्र नहीं काट सकता है..... लेकिन ये शरीर अमोदा रूपी लहरों से एक होने वाला है और उसी में हमेशा के लिए समा जाएगा। अमोदा, यही प्रेम की पराकाष्ठा है। अपने जीवन का त्याग कर देना। इन्हीं विचारों के साथ अनुराग चलता ही जा रहा था कि एक तीव्र ध्वनी ने उसका ध्यान भंग कर दिया,
“रुको... मरने जा रहे हो तो जाओ, लेकिन मुझे कुछ दे जाओ।” 

उसने मुड कर देखा, तो एक भिखारी किस्म का व्यक्ति, जिसकी दाढी बड़ी हुई थी, चेहरे पे वक्त की कालिमा थी, बिखरे अधपके बाल, फटे हुए कपडे, लेकिन आँखों में कुछ चमक सी थी, चट्टान के नीचे खड़ा हुआ था।

अनुराग ने भर्राई धीमी आवाज़ में पूछा, “क्या चाहिए?”

उस व्यक्ति की आँखों की चमक बढ़ गयी, बोला, “तुम तो मरने जा रहे हो, कुछ क्षणों में तुम ईश्वर के पास चले जाओगे, शरीर ना रहकर आत्मा बन जाओगे, आत्मा तो निर्विकार है और निरंकार है, उसे वस्त्रों की क्या आवश्यकता? आत्मा के वस्त्र तो होते नहीं। तो अपने वस्त्र तुम मुझे दे दो। बाकी चाहो तो तुम जाओ मरने, हमारा क्या? हम तुम्हें लम्बी उम्र की दुआ भी नहीं देंगे।”

एक भिखारी किस्म के व्यक्ति के मुंह से ऐसी बात सुनकर, अनुराग की गंभीरता बढ़ गयी और चेहरा थोड़ा और सख्त हो गया। उसने कहने की कोशिश की लेकिन आवाज़ बहुत धीरे निकली, “तुम्हे पता है मुझे क्या दुःख है?”

उस व्यक्ति ने कहा, “तुम मरने जा रहे हो, तो कोई ऐसा दुःख होगा, जिससे बड़ा दुःख कुछ भी नहीं हो सकता, वो असहनीय होगा, तभी इतना बड़ा निर्णय लिया।”

अनुराग ने कहा, “हाँ!! जिस लडकी से मैं बचपन से प्रेम करता हूँ, उसकी आज मंगनी किसी और से हो गयी। अब मैं मरने के अलावा और क्या करूँ?”

उस व्यक्ति ने कहा, “तुम्हे तुम्हारे माता-पिता से प्रेम नहीं है, वो तुम्हे उतना ही प्रेम उस क्षण से करते हैं, जिस क्षण तुम पहली बार धरती पर आये”

अनुराग ने कहा, “है, क्यों नहीं है, लेकिन अमोदा मेरा जीवन है। चलो तुम मेरे वस्त्र ले लो। आत्मा को तो वस्त्र की आवश्यकता नहीं होती।”

उस व्यक्ति ने कहा, “ऐसा नहीं है कि आत्मा को वस्त्र की आवश्यकता नहीं होती। आत्मा का वस्त्र है शरीर। अगर तुम्हें यह लग रहा है कि अपने शरीर को समाप्त करके, तुम अमोदा को भूल जाओगे तो तुम गलती कर रहे हो। तुम्हारी आत्मा भटकती रहेगी, अपने वस्त्र के लिए, क्योंकि अपने वस्त्र के साथ ही वो अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति कर सकती है। बिना वस्त्र के तुम्हारी आत्मा बिना अभिव्यक्ति के केवल तड़पती रहेगी।”



अनुराग ने कहा, “लेकिन मुझे अमोदा में मिलना है, वो मुझे इन लहरों में दिखाई दे रही है।
उस व्यक्ति ने कहा, “अमोदा तुम्हें अगर इन लहरों में दिखाई देती है तो मृत्यु के पश्चात् तुम्हारा निर्जीव शरीर तो इन लहरों में गल जाएगा लेकिन आत्मा इन लहरों से बाहर आ जायेगी, तुम आत्मा बन जाओगे, और फिर अमोदा में मिलने के लिए अपने वस्त्रों के लिए तरसोगे।”
एक भिखारी के मुंह से इतनी ज्ञान भरी बात सुन कर अनुराग थोड़ा चौंका, अब तक वो थोड़ा संयत भी हो चुका था। उसने धीरे से पूछा, “तुम्हें ये सब बातें क्या पता? क्या तुम कोई साधू हो?”
उस व्यक्ति ने कहा, “नहीं, मैं साधू नहीं हूँ। तुमसे कपडे मांग रहा हूँ, लेकिन भिखारी भी नहीं हूँ। मैं नमक का व्यापारी हूँ। नमक की खानें हैं मेरी। एक दिन मैं अपने परिवार के साथ तिरुपति बालाजी में तीर्थ के लिए गया हुआ था, एक महीने तिरुपति में रहने के बाद जब हम वापस लौट रहे थे तो कुछ अनजान लोगों ने हमला कर दिया, और मेरी पत्नी और दो बच्चों को लेकर पता नहीं कहाँ चले गए।”

उस व्यक्ति का गला भर्रा गया, लेकिन वो कहता रहा,”वो बच्चे, जिनसे मैं उनके पहले क्षण से उतना प्यार करता हूँ, जितना तुम अमोदा से करते होंगे, मुझसे बिछड़ गए। मैं पागल सा हो गया, पुलीस ने तहकीकात  की, अपने जासूस लगाए, मंत्रियों से सिफारिश लगवा कर सब जगह ढूंढवाया, लेकिन कुछ पता नहीं चला। जैसे तैसे मैं अपने घर पर पहुंचा, वहां जाकर पता चला कि, मेरा चचेरा भाई अब मालिक बन गया है, उसने धोखे से मेरा सब कुछ हथिया लिया, मेरी खानें, मकान, धन और मुझे विश्वास हो गया कि उसीने मुझ पर हमला करवाया था।”

कुछ क्षण रुक कर उसने फिर कहा, “मैं हर तरह से बेसहारा हो गया। मेरे पास मेरा कहने कुछ भी नहीं रहा। मुझे पता नहीं मेरा परिवार कहाँ है, इस धरती पर भी है या नहीं, मैं तुम्हारी तरह खुशकिस्मत नहीं हूँ, कम से कर तुम्हे पता तो है कि तुम्हारी अमोदा, इस धरती पर खुश है और तुम चाहो तो उसे और भी खुशियाँ किसी ना किसी तरह से दे सकते हो और मैं अपने परिवार को खुश कैसे रखूँ, मुझे ये भी नहीं पता”
उसकी आँखों में आंसू आ गए।

उसने फिर कहा, “लेकिन फिर भी एक आस है, आज नहीं तो कल मेरा परिवार मुझे फिर मिलेगा, मैं फिर कानूनी लड़ाई लड़ कर अपनी खुशियाँ फिर से पा सकता हूँ। इसलिए मुझे कुछ कपड़ों की आवश्यकता है ताकि उनकी तलाश में कुछ तो आसानी हो।”

अनुराग के पास एक दिन में दूसरी बार हक्का-बक्का होने का क्षण आ गया था, उसके पूर्व विचार कहीं छुप गए थे और उसे केवल यही सुनाई दे रहा था कि, “....... तुम्हारी अमोदा, इस धरती पर खुश है और तुम चाहो तो उसे और भी खुशियाँ किसी ना किसी तरह से दे सकते हो ...... और मैं अपने परिवार को खुश कैसे रखूँ, मुझे ये भी नहीं पता........... ”

अचानक से उसे बोध हुआ कि उसकी आत्मा उसीके स्वरुप में उसके सामने खड़ी हो गयी है, और उससे कह रही है, “अनुराग....!!! अनुराग का अर्थ होता है प्रेम और अमोदा का अर्थ आनदं, प्रेम के भीतर आनंद ही आनंद है लेकिन आनंद के भीतर प्रेम हो, आवश्यक नहीं। अमोदा सदा तुम्हारे भीतर है, तुम अमोदा के भीतर हो या नहीं इसकी तकलीफ को छोड़ दो। यह कोई दुःख नहीं है। जो चीज़ तुम्हारे भीतर है, उसे बाहर तलाश मत करो, उसके लिए दुखी मत हो, उसकी कोई आवश्यकता नहीं। तुम्हारा शरीर मेरा वस्त्र है, और मैं तुम्हारे भीतर हूँ, मैं केवल तुम्हारा ही नहीं अमोदा का प्रतिरूप भी हूँ, लेकिन तुम दोनों के प्रतिरूप बनने के लिए मुझे मेरा वस्त्र चाहिए। मैं ही प्रेम और आनंद का स्वरुप हूँ, फिर भी अदृश्य हूँ... अब अपने अनुराग में अमोदा को तलाश करो.... अपने जीवन को आनंदमय (अमोदामय) कर दो... कर दो अनुराग” उसकी आत्मा यह कहते हुए कहीं लुप्त हो गयी।

अनुराग ने मन ही मन दुहराया, “अमोदा, तुमसे दूर नहीं रह सकता, लेकिन मैं भूल गया था कि तुम तो हमेशा मेरे साथ हो, अगर मैं दुनिया में प्रेम बांटता हूँ तो मुझे आनंद अपने-आप ही मिल जाएगा, मुझे मेरी अमोदा मिल जायेगी। मेरी अमोदा इन समुद्र की लहरों में नहीं, मेरे द्वारा दी गयी आखों की चमक  में है, दुनिया में बहुत दुःख भरा है... थोड़ा भी कम कर दूं तो अमोदा मेरे साथ है ।”
अनुराग ने उस व्यक्ति का हाथ पकड़ लिया और चल दिया... उसके साथ उसका परिवार ढूँढने के लिए...

लेखक : डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी
सहायक आचार्य (कंप्यूटर विज्ञान)
 (उदयपुर, राजस्थान) 

167 comments:

  1. Very Motivational...

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    1. वाह, कहानी पढ़कर अच्छा लगा। अच्छा काम किया है लेखक ने।

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  2. सुगंधा शर्माApril 16, 2018 at 7:09 PM

    वाह.. बहुत अच्छी सकारात्मक कहानी

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  3. निर्मल जैनApril 17, 2018 at 9:02 PM

    बहुत बढ़िया

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  4. अक्षत वर्माApril 18, 2018 at 10:55 AM

    प्रभावी कहानी... रचनाकार को बधाई

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  5. सुभाष दत्ताApril 22, 2018 at 1:51 PM

    वाह...वाह... क्या खूब कहानी है.... कहानीकार ने दिल खुश किया...

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  6. एक राह दिखा रही है यह कहानी.... लेखक को इस लेखन के लिए हार्दिक बधाई

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  7. अच्छी कहानी... मोटीवेट करती हुई

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  8. रतन नागपालApril 24, 2018 at 10:06 AM

    क्या बात... बेस्ट से भी बेस्ट

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  9. निमेश तिवारीApril 24, 2018 at 10:07 AM

    बहुत अच्छे, बधाई सर

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  10. Very Good Said. Congo bro.

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  11. उत्तम लेखन के लिए नमन आपको.

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  12. महीप दुर्गावालApril 25, 2018 at 8:59 PM

    ---- अनुराग का अर्थ होता है प्रेम और अमोदा का अर्थ आनदं, प्रेम के भीतर आनंद ही आनंद है लेकिन आनंद के भीतर प्रेम हो, आवश्यक नहीं। अमोदा सदा तुम्हारे भीतर है, तुम अमोदा के भीतर हो या नहीं इसकी तकलीफ को छोड़ दो। -----
    पूरी कहानी का सार इसी में निहित है. ये शब्द जीवन का रहस्य भी बता रहे हैं. इस अप्रतिम रचना पर वाह और सिर्फ वाह

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  13. शानदार अभिव्यक्ति सर| दिल को छूती कहानी|

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  14. निखर तंवरApril 27, 2018 at 10:34 AM

    ऐसी कहानियों की ज़रूरत है समाज में बच्चे होकर कुछ भी कदम उठा लेते हैं साधुवाद है आपको

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  15. प्रतियोगिता में अब तक की पढ़ी कहानियों में से बेस्ट

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  16. Shreshth Kahani. Uttam.

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  17. Chandresh... Good. Keep it up.

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  18. Wow. Great End.

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  19. बढ़िया बेहतरीन सृजन

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  20. अभिषेक नागलाApril 29, 2018 at 2:50 PM

    बहुत अच्छी कहानी है...

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  21. Priyanka AudichyaApril 29, 2018 at 2:51 PM

    Sir great story

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  22. क्या कहने... बहुत खूब कहानी

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  23. अद्भुत सृजन, बधाई

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  24. आभा सहायMay 1, 2018 at 9:21 PM

    बहुत ही अच्छी कहानी शुभकामनाएँ

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  25. Shabd Kumar ShuklaMay 1, 2018 at 9:24 PM

    नौजवानों के लिए प्रेरणा देती हुई रचना. सच्चे प्रेम को बताती.

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  26. सटीक कहानी सुन्दरतम

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  27. Harsh Kumar SinghMay 2, 2018 at 10:26 AM

    Achhi Katha

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  28. अर्चना झाMay 2, 2018 at 10:28 AM

    लाजवाब, यथार्थ के धरातल पर लिखी गयी कहानी :)

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  29. उषा नंदकरनीMay 2, 2018 at 3:52 PM

    अच्छी सीख देती हुई रचना

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  30. Upendra AgarwalMay 2, 2018 at 3:53 PM

    बहुत अच्छी और रोमांचक कहानी

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  31. bahut sundar kahani kash sabhi aisa hi soche

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  32. Heart touching

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  33. चंद्रेश जी अच्छी कहानी लिखने के लिये बधाई।

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  34. नितांत रोचक - दिलचस्प कहानी

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  35. बसंत प्रकाशMay 3, 2018 at 1:52 PM

    जबरदस्त

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  36. बेहतरीन और प्रेरणादायी कहानी

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  37. बेहद खूबसूरत कहानी है

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  38. मधु दीक्षितMay 3, 2018 at 9:19 PM

    पढ़कर सिर्फ एक ही शब्द दिल-दिमाग में आया...बेहतरीन

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  39. अभिजात प्रकाशMay 3, 2018 at 9:21 PM

    कई बार दो शब्द ही इंसान की जिंदगी बदल देते हैं. आर्ट ऑफ़ लिविंग

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  40. अति सुंदर प्रस्तुति

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  41. गीतांजलि ठाकुरMay 4, 2018 at 10:59 AM

    बहुत अच्छे दृष्टिकोण से लिखी हुई कहानी

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  42. Good one. Best wishes.

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  43. सोचने को विवश करती रचना

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  44. प्रेरक और अच्छी कथा

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  45. वाह बहुत सुंदर चंद्रेश छतलानी भाई.....

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  46. दुनिया में प्रेम बांटने वाले को आनंद अपने आप ही मिल जाता है । क्या खूब पात्रों के नाम के साथ बेहतरीन सन्देश को जोड़ा है । अनुराग और अमोदा... बेहतरीन शिल्प और हृदयस्पर्शी कथा । ऐसी ही कहानियाँ लिखते रहो डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी जी ।

    - डॉ. अनुज सिंह

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  47. विकास दासMay 5, 2018 at 11:29 AM

    super

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  48. Shandar Abhivykti

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  49. सुंदर संदेश देती हुई कहानी

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  50. Nitasha PatairiyaMay 5, 2018 at 9:24 PM

    Awesome

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  51. Sarika ChaturvediMay 6, 2018 at 10:08 AM

    Very nice

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  52. डॉ. सोमेश तिवारीMay 6, 2018 at 3:50 PM

    बहुत अच्छा लिखा है डॉ. साहब... बधाई कबूल फरमाएं

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  53. Subhash VashishthaMay 6, 2018 at 6:05 PM

    वआह्ह्ह्ह्ह् बहुत अच्छी कहानी कही है चंद्रेश भाईजी

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  54. पुष्पेन्द्र 'निर्मोही'May 7, 2018 at 7:58 AM

    युवाओं को प्रोत्साहित करते कथ्य पर आधारित रचना। अच्छा सन्देश।

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  55. कवि अभीनेत्रMay 7, 2018 at 8:02 AM

    वाह...
    संगीत सा बज उठा दिल में इक कहानी पढ़ के
    'चन्द्रेश' का लिखा पढ़ा तो दिल वाह-वाह धड़के

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  56. बहुत अच्छे

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  57. Really nice story

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  58. कहानी का बहुत खूबसूरत अंत किया है आपने...

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  59. नरेश मालिकMay 7, 2018 at 8:37 PM

    सुंदर कहानी

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  60. सजीव चित्रण सुंदर कथा

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  61. सुधीर पालMay 8, 2018 at 10:01 AM

    बेमिसाल कहानी

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  62. गजब की कहानी .. बधाई योग्य लेखन

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  63. PRAVEENA AGARWALMay 8, 2018 at 10:06 AM

    VERY NICE G

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  64. sundar rachna..true love kya hota he.. ye bata gayi ye katha..

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  65. बहुत सुंदर कहानी। जीने की राह दिखती हुई अनुपम कथा।

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  66. उत्कृष्ट कथा

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  67. Amazing and heart touching story

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  68. बहुत भावपूर्ण

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  69. भाविक जायसवालMay 8, 2018 at 10:28 PM

    दिल पाखंडी होता ही है और अपने पाखडं में यह जो कुछ भी कर गुजरवाये वो भी कम| दिल के पाखण्ड को दिल ही तोड़ सकता है, जब विचार बदल जाते हैं... दिल बदल जाता है| रास्ता मिल जाता है... चट्टानें गायब हो जाती हैं| रचना दिल के इस मनोविज्ञान को दर्शाने में पूरी तरह सफल है यह कहानी| सफलतम कहानियों में से एक|

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  70. अच्छा संदेश! बधाई!

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  71. Madhukar Kumar JainMay 9, 2018 at 9:28 AM

    Ati Uttam Kahani

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  72. nicely expressed

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  73. Really wonderful. Ek alag nazariye ko darshati.

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  74. Excellent

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  75. कालिका प्रसाद छिब्बरMay 9, 2018 at 9:41 AM

    अति सुंदर कहानी ... इसे ही तो प्रेम कहा जाता है। प्रेम के स्वार्थ से निकलने के लिए बहुत बड़ा दिल चाहिए होता है। प्रेमी/प्रेमिका से दूर जाने पर बरसों से यही होता आया है कि दिल सिकुड़ जाते हैं... कोई कुछ भी कदम उठा लेता है। प्रेमी/प्रेमिका ना मिलें तो जीने-मरने के वाडे याद आ जाते हैं... गलत कदम उठा लिया जाता है। हिंदी फिल्मों में यही सिखाया जाता है... जबकि मरना प्रेम नहीं... प्रेम का अंत है... प्रेम विस्तृत है... विशाल है... वसुधैव है... जीवन है... फ़िल्मी भ्रम का सर्वनाश करती यह कहानी उत्कृष्ट है। लेखक को साधुवाद देता हूँ।

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  76. संतोष सैनीMay 9, 2018 at 4:09 PM

    बहुत बढ़िया कहानी। सटीक और हृदयस्पर्शी शब्दों में आपने अपनी बात कह दी।

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  77. पूनम कौरMay 9, 2018 at 7:47 PM

    ऐसी कहानियाँ दिल तक पहुँच जाती हैं .. भुलाए नहीं भुलती और बार-बार पढने भी और सुनाने को भी जी चाहता है ... बहुत ही बढ़िया

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  78. बेमिसाल कथा

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  79. प्रेरणादायक

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  80. खूब पसंद आयी

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  81. चट्टान पर खड़े आदमी को जिन शब्दों से चट्टान से उतारा है आपने उन शब्दों से चट्टान हृदय वाला भी पिघल जाए. अति सुंदर.

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  82. कला और भाव का खूबसूरत संयोजन

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  83. Varsha AhluwaliaMay 9, 2018 at 10:32 PM

    Lovely story

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  84. उज्ज्वला सिंहMay 10, 2018 at 10:42 AM

    प्रेम में त्याग की भावना होती है, सामने वाले को ख़ुशी देकर और खुश देखने में खुदकी ख़ुशी ढूंढना ही सच्चा प्रेम है... यूं मौत को गले लगा लेना प्रेम नहीं वियोग की भावना है। आजकल वियोग को ही प्रेम समझा जा रहा है, यह कहानी अपने कथ्य में जो कुछ कह रही है और जो सन्देश दे रही है, उस सच को सभी को अपनाना चाहिए और क्षणिक वियोग की भावना से ओतप्रोत होकर प्रेम को तिलांजली नहीं देनी चाहिये। मुझे यह कहानी बहुत पसंद आई।
    !

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  85. उलझनों को सुलझाती प्यारी सी कहानी

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  86. heart touching

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  87. बहुत भावपूर्ण कहानी पढ़ कर दिल भर आया। काश! दुनिया में सभी को ऐसे लोग मिल जाएँ ताकि कोई गलत डिसिजन न ले।

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  88. नागेन्द्र चंद्राMay 10, 2018 at 10:59 AM

    वाह डॉ. चंद्रेश कुमार छ्तलानी जी, बहुत ही सुंदर और सार्थक सन्देश देती कहानी लिखी है आपने ...

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  89. गजब का सृजन

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  90. बहुत खूब कहानी

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  91. हिमकर जोशीMay 10, 2018 at 11:03 AM

    इसे कहते हैं कहानी, बहुत सुंदर .. बेहतरीन

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  92. दर्पण कुमारMay 10, 2018 at 11:05 AM

    वाह चंद्रेश छ्तलानी भाई, आप कमाल लिखते हो ..

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  93. Great story...

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  94. उत्तम स्वरूप बिष्टMay 10, 2018 at 12:33 PM

    लाजवाब कहानी

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  95. Bahut sundar rachna. badhai yogya lekhan.

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  96. धर्म शर्माMay 10, 2018 at 12:42 PM

    अद्भुत सृजन, प्रशंसनीय

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  97. निःसंदेह बहुत अच्छी रचना

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  98. डॉ ऋचा अग्रवालMay 10, 2018 at 10:13 PM

    बहुत दिनों बाद अच्छी और सार्थक कहानी पढने को मिली... सुंदर रचना

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  99. Shubh Veer SinghMay 10, 2018 at 10:15 PM

    निशब्द हूँ... बेहद अच्छी कहानी

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  100. बहुत उम्दा

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  101. प्रकाश भाटियाMay 11, 2018 at 10:37 AM

    प्रेमिका की चाह
    नहीं मिली तो आह
    और कहानी पर
    वाह - वाह और सिर्फ वाह

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  102. बहुत ही शानदार

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  103. आदित्य रंजनMay 11, 2018 at 10:41 AM

    बेहतरीन और ज्ञानवर्धक

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  104. रचना सिंहMay 11, 2018 at 10:42 AM

    विचारणीय विषय

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  105. Nice bro.

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  106. सत्य तोमरMay 11, 2018 at 2:06 PM

    Kya kahne... sundar kahani

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  107. बहुत खूब सर

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  108. Ratnesh Kumar SinghMay 11, 2018 at 2:12 PM

    नये अंदाज में लिखी गयी शानदार कहानी...

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  109. स्नेहलताMay 11, 2018 at 2:16 PM

    निःसंदेह कथा बहुत उत्तम है

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  110. बजरंग शर्माMay 11, 2018 at 6:48 PM

    बेहतरीन मज़ा आ गया पढ़कर

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  111. वाकई ,,, बहुत उम्दा

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  112. जीत सिंह राठौड़May 11, 2018 at 9:27 PM

    वाह बहोत खुब होकम

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  113. Bahut Bahut Bahut Achhi Kahani... Great.

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  114. आकर्षण और प्रेम में यही अंतर है, आकर्षण में पाने की भावना होती है और प्रेम में सिर्फ प्रेम और कुछ भी नहीं| प्रेम को इस बात से असर नहीं पड़ता कि कोई साथ है या नहीं, कोई अलग है मिलन है| जैसे मीरा का कृष्ण के प्रति प्रेम था, कोई चाह नहीं.. कोई इच्छा नहीं.. विसुद्ध प्रेम| जहाँ पाने की इच्छा हो जाती है वो आकर्षण ही है| इस रचना में सामान्य शब्दों में जनसाधारण के लिए जो गहरा सन्देश दिया है, वो वास्तव में एक ऐसा सच है जिसे सभी को जानना चाहिए और उसका पालन भी करना चाहिए| समाज का बहुत बड़ा सुधार हो जाएगा| इस कहानी के लिए लेखक डॉ. चंद्रेश कुमार छ्तलानी को बधाई|

    रक्षित सिंह सोलंकी

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  115. सुन्दर सृजन

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  116. जया शिशोदियाMay 13, 2018 at 12:59 PM

    बहुत सुंदर कहानी

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  117. Dr. Ashish DubeyMay 14, 2018 at 12:47 PM

    Good Written.

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  118. Bahut Umda Kahani.

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  119. bahut achhi kahani

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  120. सुंदर रचना

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  121. बहुत अच्छी कहानी। एक नई कल्पना

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  122. Radha SrinivasanMay 17, 2018 at 8:20 PM

    एक अछूते विषय पर लिखी गयी कहानी... heart touching story

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  123. बहुत अच्छी कथा है। बधाई हो आपको।

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  124. रवि प्रकाशMay 18, 2018 at 10:18 PM

    रचना ने दिल छू लिया...

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  125. very good story .. best one

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  126. Nice creation.

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  127. मुकेश देशमुखMay 19, 2018 at 10:52 PM

    मेरी ईलाइब्रेरी में इस कहानी के द्वारा मैनें एक और रत्न जोड़ दिया है। इस यूआरएल को सेव कर के रख दिया।

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  128. भारतेंदु पाठकMay 20, 2018 at 9:50 AM

    बढ़िया कहानी लिखे हो आप, चंद्रेश कुमार छ्तलानी जी

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  129. सागर हिन्दुस्तानीMay 20, 2018 at 9:53 AM

    अपनी एक और बेहतरीन रचना से रूबरू कराने के लिए धन्यवाद आद. डॉ. चंद्रेश छ्तलानी जी सर

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  130. वाह क्या बात है सर जी

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  131. एक अनोखी प्रेमकथा

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  132. VERY VERY NICE

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  133. महिपाल निज्ज्तMay 21, 2018 at 3:14 PM

    पढने के बाद एक ही शब्द - वाह | बहुत ही अच्छी रचना कही है आपने श्रीमान चंद्रेश जी |

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  134. बहुत खूब जी

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  135. प्रभात तिवारीMay 22, 2018 at 10:48 AM

    बहुत सुन्दर
    ढेरों शुभकामनाएं मित्र

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  136. Ajay Kumar AggarwalMay 22, 2018 at 11:38 AM

    बहुत अच्छी कथा है। पढ़ते-पढ़ते समय कैसे बीत गया, पता ही नहीं चला।

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  137. Surya Kumar KolariyaMay 22, 2018 at 7:39 PM

    Excellent. number 1 story

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  138. एक सफल कहानी कही है आपने मित्र डॉ. चंद्रेश कुमार, आप बहुत अच्छा लिख रहे हैं| ऐसी कहानियाँ पढ़कर आपसे अपेक्षाएं बढती जा रही हैं| दिली शुभकामनाएँ मित्र|

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  139. अच्छी कथा नई सोच

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  140. राजेश्वर शर्मा "व्याकुल"May 23, 2018 at 12:52 PM

    वाह वाह भाई डॉ. चंद्रेश कुमार छ्तलानी जी , इतने अच्छे भावों से सृजित कहानी कही है आपने| पढ़ कर मन प्रफुल्लित हो गया| समसामयिक सकारात्मक सन्देश लिए ऐसी कहानी कहना आसान नहीं होता| खुल कर प्रशंसा करने को दिल चाह रहा है|

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  141. Great story

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  142. शालिनी सिंहMay 25, 2018 at 9:40 AM

    वर्तमान परिप्रेक्ष्य में युवा सोच को बदलने की शक्ति रखती बहुत ही अच्छी अभिव्यक्ति के माध्यम से रची कही कहानी, बधाई सर आपको

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  143. Behad Dilkash Kahani. Writer ko Mubarakbaad.

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  144. निरंजन श्रीवास्तवMay 25, 2018 at 9:44 PM

    बहुत खुल कर प्रशंसा करने को दिल चाह रहा है, लेकिन प्रशंसा हेतु शब्द नहीं मिल रहे| गजब की कहानी है| ढेरों बधाईयाँ|

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  145. Rajkumar AgarwalMay 26, 2018 at 10:26 AM

    एक अच्छी सीख देती हुई अद्भुत शैली और शिल्प से युक्त कहानी|

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  146. Very nice Dr. Chandresh

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  147. Wow. Very nice story.

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  148. योगेश निगमMay 27, 2018 at 4:09 PM

    कहानी बहुत अच्छी है. अंत ऐसा होगा सोचा भी नहीं था. आज भी अधिकतर बच्चे ऐसे ही भावुकता में आत्महत्या जैसे विचारों को अपना लेते हैं यह भी नहीं सोचते घर पर माता पिता इंतज़ार कर रहे होंगे.

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  149. Waah Chandresh bhaiya, bahut achche. Sundar sandeshprad katha.

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  150. Bahut Sashakt Kahani

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  151. Heart touching and nice message giving story.

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  152. मर्मस्पर्शी रचना। मन‌ भर आया। बहुत सुंदर लिखा है।

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  153. Bahut Badhiya... Badhai

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  154. Maya Singh RajputJune 4, 2018 at 9:34 AM

    Best Story

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  155. Umda Srijan. Good one.

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