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Tuesday, April 17, 2018

इंसानियत और भाईचारे की मिसाल ''अल-ख़ैर को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड''

देश में काफी समय से आतंक और डर का माहौल बना हुआ है,  नफरत और हैवानियत के इस माहौल में कुछ लोग हैं जो मोहब्बत और इंसानियत के सिपाही बनकर आगे बढ़कर एक मिसाल क़ायम करते है। ऐसी ही इंसानियत और भाईचारे की मिसाल क़ायम की है पटना (बिहार) की ''अल-ख़ैर  को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड'' ने।  अल-ख़ैर  को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायट ब्याजमुक्त कर्ज देकर हजारों लोगों  परिवारों के जीवन में बदलाव लेकर आई है। सोसाइटी द्वारा बिना किसी धर्म-जाती भेदभाव के लोगों ब्याजमुक्त कर्ज दिया जाता है।  क़र्ज़ लेने वालों में हिन्दू मुस्लमान और अन्य धर्मों के लोग शामिल हैं।  संगठन का मकसद धर्म, जाति और वर्ग की परवाह किए बगैर जरूरतमंद लोगों की आर्थिक मदद करना है।  

मुस्लिम समुदाय के संगठनों द्वारा सभी धर्म जाति के लोगों  के जीवन में बदलाव लाने की मिसालें निस्संदेह बदले हुए समाज में सांप्रदायिक सद्भाव को मजूबती प्रदान करती है। अल-ख़ैर  को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड ब्याजमुक्त कर्ज देकर हजारों हिंदू मुस्लिम परिवारों के जीवन में बदलाव लेकर आई है।

कमला देवी, पंकज कुमार, गीता देवी और संजय सिंह उन्हीं परिवारों से आते हैं जिनको अल-ख़ैर  को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेडने रोजी-रोटी के लिए अपना कारोबार खड़ा करने के लिए ब्याजमुक्त कर्ज दिया. करीब 9,000 हिंदुओं को इस सोसायटी ने कारोबार खड़ा करने के लिए कर्ज दिया है. इनमें में ज्यादातर लोग वेंडर, छोटे कारोबारी, पटरियों पर दुकान चलाने वाले, सीमांत किसान और महिलाएं हैं।

पटना के मिरशिकर टोली में दुकान चलाने वाली कमला ने कहा, 'मैं सड़क किनारे पटरियों पर आलू और प्याज बेचती थी. इसके लिए 2,000 से 5,000 रुपये साहूकारों से सूद पर कर्ज लेती थी और उनके कर्ज तले हमेशा दबे रहती थी. लेकिन कुछ साल पहले जब मुझे किसी ने कहा कि अल-ख़ैर को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड बिना ब्याज के कर्ज देती है तो हैरान हो गई।'

दुकान चलाने के लिए उसने सबसे पहले सोसायटी से 10,000 रुपये कर्ज लिया. उसके बाद उसने सोसायटी से 20,000 रुपये से 50,000 रुपये तक कर्ज लिया. कमला ने कहा, 'सोसायटी से कर्ज लेकर मैंने छोटे से खोमचे की दुकान से अपना कारोबार बढ़ाकर थोक की दुकान खोल ली।'

गीता ने बताया, अल-ख़ैर  को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड के संपर्क में आने के बाद मेरी जिंदगी बदल गई. इसने हमें सम्मान की जिंदगी जीने में मदद की। हमारे जैसे गरीब लोगों के लिए ब्याजमुक्त कर्ज भगवान का वरदान ही है। यहां बैंकों की तरह कर्ज मिलने की कोई अनिश्चिता नहीं होती है।'

मंजू देवी ने पिछले पांच साल में अपने बच्चों की सालाना फीस भरने के लिए अलखर से 20,000 रुपये कर्ज लिया. उसके पति सड़क किनारे दुकान चलाते हैं। 

कमला ने कहा कि वह अपनी कमाई में से कुछ पैसे किस्त के रूप में अल-ख़ैर  को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड को भुगतान करती है जिससे कर्ज उतर जाए।

संजय सिंह ने कहा कि छोटी दुकान करने वालों को कर्ज देने में बैंकों की कोई दिलचस्पी नहीं होती है। उन्होंने कहा, 'बैंक कर्ज पर ब्याज तो लेता ही है। साथ ही, कर्ज लेने के लिए इतने सारे दस्तावेज भरने की जरूरत होती है कि गरीब आदमी परेशान हो जाता है।' संजय के पास कपड़े की छोटी सी दुकान है, जो उनकी पत्नी चलाती है और वह साइकिल पर घूम-घूम कर कपड़े बेचते हैं। 


अल-ख़ैर  को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड से करीब एक दशक से जुड़े अवकाश प्राप्त बैंक अधिकारी शमीम रिजवी ने बताया, ''ब्याजमुक्त कर्ज भले ही मुस्लिम परंपरा हो क्योंकि इस्लाम में ब्याज को अनुचित माना जाता है। मगरअल-ख़ैर को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड न सिर्फ मुस्लिम बल्कि सबको ब्याजमुक्त कर्ज देता है।''

अल-ख़ैर को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक नैयर फातमी कहते हैं  कि ब्याजमुक्त कर्ज की आमपसंदी बढ़ रही है।  उन्होंने कहा, ''जिनकी पहुंच बैंक तक नहीं हो पाती है उनके लिए पांच से 10,000 रुपये की छोटी रकम भी काफी अहम होती है। ब्याजमुक्त कर्ज पाने वाले लोगों में करीब 50 फीसदी हिंदू हैं. ज्यादातर लोग अपनी रोजी-रोटी चलाने के लिए कर्ज लेते हैं जिससे उनका सशक्तीकरण हो रहा है।''

अल-ख़ैर को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड ब्याजमुक्त कर्ज प्रदान करने वाली एक सफल माइक्रोफायनेंस संस्था की मिसाल है, जो हजारों लोगों के चेहरों पर मुस्कान लेकर आई है। सोसायटी ने छोटी सी निधि से काम शुरू किया था और इसके पास शुरुआत में पटना स्थित एक छोटे से दफ्तर में सिर्फ दो कर्मचारी थे।  आज संस्था में 100 कर्मचारी काम करते हैं। इन कर्मचारियों के वेतन, दफ्तर का किराया और अन्य खर्च के लिए यह कर्ज लेने वालों से नाममात्र का सेवा प्रभार लेता है।

मुस्लिम समुदाय के कुछ पढ़े-लिखे लोगों के साथ वर्ष 2000 के आरंभ में इस संगठन की नींव पड़ी थी। संगठन का मकसद धर्म, जाति और वर्ग की परवाह किए बगैर जरूरतमंद लोगों की आर्थिक मदद करना था।  अल-ख़ैर  को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड के बारे में अधिक जानकारी के लिए ऑफिसियल वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं www.alkhairsociety.com

जानकारी साभार : NDTV 

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