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Thursday, April 26, 2018

पुस्तक समीक्षा : चमनलाल की डायरी

व्यंगात्मक अंदाज में लिखे किस्से-कहानियों से जीवन के कई रंगों की तस्वीर उकेरती किताब है चमनलाल की डायरी। डॉ. प्रवीण झा (वामागांधी) का लेखन, व्यंग्यात्मक होते हुए भी एक गहराई लिए हुए है, जो आनंद देने के साथ-साथ मन-मस्तिष्क में एक पैठ भी बनाता है। गहराई होने के बावजूद चमनलाल की डायरी का एक भी पन्ना   उबाऊ या बेवजह हंसाने की फूहड़ कोशिश सा नहीं लगता, जो वर्तमान के व्यंग्य में कई बार देखने को मिलती है।चमनलाल की डायरी के कुछ अध्याय तो हंसी के ठहाकों के साथ मजेदार होते हुए भी दिल और दिमाग को अंदर तक छूते हैं। व्यंग्यात्मक लेखन में अपने तरह की यह नई सी किताब है, जो किसी विषय विशेष पर अपनी रचनाओं को नहीं बांधती, बल्कि विभिन्न विषयों पर एक ठोस पृष्ठभूमि के साथ पाठकों को हंसाने में कामयाब होती है। 
 सोने की पाठशाला में चंदू मामा के पूरे जीवन को एक छोटी सी ढाई पेज की कहानी में बांधकर, वास्तविक जीवन की स्थिति-परिस्थितियों को हंसी-मजाक में समझाने का लेखक का प्रयास बेहद उम्दा है। शादीशुदा सफर के कुछ साल पुराने यात्रियों को, यह अपनी सी कहानी लगेगी, इसमें कोई दो मत नहीं है।

वहीं दक्खिन का बॉक्सर में लेखक द्वारा बॉक्सर के जीवन के कुछ पहलुओं को मजेदार अंदाज में लिखा है - ''जब-जब मुरली मुक्केबाजी खेलने जाता, उसकी नई नवेली गर्लफ्रेंड उसे ये शौक छोड़ने की सलाह देती। रोना-धोना और प्यार का पंचनामा। खिसियाया मुरली अपनी भड़ास रिंग में उतारता।''

इसी तरह आरक्षण का बंबू, पेशंट दादा, मयूरी डॉट कॉम, सुंदरबन की सुंदरी, छुटकी प्रेमकथा जैसी कहानियां पाठकों को कभी हंसी के ठहाकों, तो कभी छुटपुट मजे की फुहारों के बीच बांधे रखती है। अााम जीवन और रोजमर्रा जीवन की समस्याओं पर भी लेखक के चुटीले व्यंग्य उनकी लेखन शैली को और भी मजेदार बनाते हैं। सबसे खास बात यह है कि चमनलाल की डायरी की हर कहानी में माहौल, पृष्ठभूमि, सोच और भाव भाषा में उपयुक्त बदलाव है और कल्चर में विभिन्नताएं है, जो हर कहानी को नयापन देती हैं और उसने कल्पना करने में मददगार हैं।

डायरी में हास्य व्यंग्य शैली में लिखा हर विचार अपने आप भी अनूठापन लिए हुए है। चमनलाल की डायरी, पाठकों का भरपूर मनोरंजन करने के साथ ज्ञान वृद्धि में भी बेहद सहायक सिद्ध हो सकती है। पुस्तक मजेदार, रोचक और रोमांचक किस्सों से भरपूर है।  


पुस्तक : चमनलाल की डायरी
लेखक : डॉ. प्रवीण झा
प्रकाशक : एज्युक्रिएशन पब्लिशिंग 

समीक्षा : साभार वेबदुनिया

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