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Tuesday, April 17, 2018

माँ (कहानी) - लेखिका : अनुप्रिया जायसवाल

''माँ'' कितना छोटा शब्द है ना लेकिन इस शब्द मे बहुत कुछ लिपता हुआ है। यह कहानी है एक लड़की की जो माँ के अनेक रूप देखकर सोचने पर विवश हो गई। उस लड़की का नाम है निमी। वह अपने मां बाप के साथ गांव मे रहती है।
निमी को उसके माता-पिता प्यार करते हैं। निमी को बचपन में ही एक गम्भीर रूप कि बिमारी हो गया था लेकिन उसकी मां के वजह से से वह फिर से स्वस्थ हो जाती है। कभी कभी निमी को उसके मां का बर्ताव अच्छा नहीं लगता क्योंकि उसकी मां उसे उसकी इच्छा के अनुसार काम नहीं करने देती। एक बार दिन निमी अपने दोस्तों के साथ खेल रही थी तभी उसे अचानक से चोट लग जाती है। वह भी रोने लगी काफी खून भी बह रहा था। किसी ने उसकी मां को जा कर निमी की चोट के बारे में जानकारी दी। वह उस समय खाना बना रही थी उसने जब निमी के बारे में पता चला तो दौड़ते हुए निमी के पास जा पहुंची और निमी को सम्भालने के लगी। वह निमी की हालत देखकर रोने लगी। तभी निमी ने अपनी माँ से पूछा की मां तूम तो मुझे हर बात पर डांटती हो और तूमने तो मुझे मना भी किया था की खेलने मत जाना लेकिन मैं गई और तुम मुझे डाटोगी नहीं क्या? निमी बोली मां तूम रोओ मत ये चोट जल्दी ठीक हो जाएगी। 


निमी बोली मां मैं एक बात पूछूँ? माँ बोली पूछो-निमी पूछती है कि क्या हर मां तूम्हारे तरह ही होती है क्या? माँ ने पूछा की तुम ऐसा क्यों पुछ रही हो तभी निमी बोलती कि मैंने और भी माँओं को भी देखा है जो अपने बच्चे को कभी डांटती है तो कभी प्यार करतीं हैं। तब मां बोलती है-हॉं हर मां एक जैसी ही होती है। वह अपने बच्चों को प्यार भी नहीं करती है और डाांटती भी है चलो निमी मै तुम्हें एक  व्याख्या सुनाती हुँ जो मेरे साथ भी हुआ था बचपन में मे। तुम्हारी नानी भी मेरे साथ ऐसा ही व्यवहार करती थी लेकिन मैंने कभी भी तुम्हारी नानी के साथ अच्छा बर्ताव नहीं किया क्योंकि मुझे लगता था कि वह मेरे साथ अच्छा बर्ताव नहीं करती लेकिन तब भी तुम्हारी याद नानी मुझे बहुत प्यार करती। जब वह कही चली जाती तो मुझे वह बहुत याद आती और तो और घर भी सुना हो जाता था। फिर जब वह वापस आती तो मैं बहुत खुश हो जाती लेकिन उन्हें बताती नहीं कि मैं उन्हें कितना याद करती। एक दिन पहले तुम्हारी नानी को बहुत दूर जाना पड़ता है वह भी बहुत दिनों के लिए। जब तुम्हारी नानी चली जाती है। तो मेरा एक दो दिन आराम से बीतता है लेकिन कुछ दिन बाद मैं उन्हें बहुत याद करती दिन-रात मुझे उनकी बातें याद आती तब मुझे मां के प्यार का एहसास हुआ और मैं बैठे - बैठें सोचने लगी की जो बच्चे अनाथ है या फिर जिनकी मां नहीं है वह कैसे रहते होंगे। मां जो हमारी हर बात समझ जाती हैं, जो बच्चे को हो रहे परेशानियों को भाप लेती है। उनके पास तो वही नहीं होती। मैंने माँ और मां के स्वभाव के बारे में बहुत सोचा। कुछ महीने बाद तुम्हारी नानी घर वापस आ गई तब से मैं अपने मां के साथ अच्छे से रहने लगे। अब मैं तुम्हारी नानी के साथ दोस्त के तरह रहने लगी थी। लेकिन कुछ ही दिनों बाद तुम्हारी नानी का देहवाश हो गया। शायद भगवान मुझे मेरी गलती का शबक दे रहे थे। मैं बहुत रोई। उस दिन से मुझे मां के महत्व के बारे में पता चला। इसलिए कभी भी मां से नाराज नहीं होना चाहिए। तब निमी की मां बोली जब कोई ऐसी परिस्थिति तुम्हारे सामने आएगी तब तुम भी समझोगी। उस दिन से निमी ने कभी भी अपने मां को तंग नहीं किया और अपने दोस्तों को भी मां के महत्वता के बारे में समझाया।

लेखिका  : अनुप्रिया जायसवाल 
(गोरखपुर, उत्तरप्रदेश) 

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