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Wednesday, April 11, 2018

Time Pass वाली दोस्ती (कहानी) - लेखक : इंद्रजीत कुमार

"आज चाँद भी मुझे फीका लग रहा है उसकी खुबसुरती के सामने।पता नहीं उसकी खुबसुरती के सामने अब हर चीज़ बरसुरत लगने लगी है।क्या जादू हो गया है, जो मुझे परेशान कर देती थी आज अगर वो साथ होती है तो हवा भी मानो हमारी दोस्ती से खुश हो रही हो, पेड़ों के पत्ते भी मानो झूम रही हो और तो और हर चीज धीरे हो गई हो बस हम अपनी रफ्तार से चल रहे हों उफफफ।"

"भाई क्या हो गया है?आज ऐसी बातें कर रहा है।"
"कुछ नहीं यार बस मेरी जिंदगी अब नया मोड़ ले रही है।बस उसी के साथ रहूँ ऐसाा लगता है।"
"भाई अपनी gf के चक्कर में अपना दोस्त को मत भुला देना"
दो दोस्त एक मैदान में बातें कर रहे थे।आदित्य और विकी दोनों काफी अच्छे दोस्त थे।अपनी सारी बातें एक-दुसरे को बताते थे।इनकी दोस्ती की जितनी तारीफ की जाए कम ही थी।विकी की एक स्पेशल दोस्त थी लेकिन फिर भी वो अपने दोस्त आदित्य के साथ अपनी यारी निभाता था।

"भाई! तेरी पेंटिंग पुरे स्कूल में फेमस हो गई है, लड़कियाँ दिवानी हो गई है।"विकी उत्साहित होते हुए बोला।
"हाँ यार पता चला,  मैंने बस कोशिश की थी बाकी हनुमान की कृपा है।"आदित्य हाथ जोड़ते हुए बोला।
आदित्य 17 साल का सीधा-साधा लड़का था।साँवला रंग, अच्छी खासी लम्बाई और स्वस्थ शरीर।मगर हनुमान भक्त था लड़कियों से दूर रहता था, ना कभी लड़कियों के बारे में गलत सोचता ना ही लड़कियों के पास आता-जाता ।वहीं इससे उल्टा इसका दोस्त विकी।पता नहीं दोनों अलग-अलग ख्यालो के थे फिर भी इनकी दोस्ती इतनी गहरी कैसे थी शायद यही कारण था कि आदित्य दिल का भोला था।

आदित्य को पेंटिंग का बहुत शौक था।साथ में कविता भी लिखा करता।पढ़ाई में मन लगे या ना लगे लेकिन अगर पेंटिंग करने बोल दिया जाए तो पता नहीं हर काम छोड़कर इसमें लग जाता, और  आदित्य की ही मेहनत थी जो स्कूल में उसकी इतनी तारीफ होने लगी थी।सभी आदित्य को स्कूल में जानने लगे थे।इनके स्कूल में लड़के-लड़कियाँ अलग-अलग थी।मगर फिर भी बहुत लड़कियों ने आदित्य का नाम सुना था, कई बार स्कूल में आते-जाते देखा।

कुछ दिन बीत गए स्कूल में एक कार्यक्रम रखा गया।बस क्या था सभी लड़के-लड़कियों को एक साथ रहने मिल गया था।कार्यक्रम के दिन स्कूल में काफी हलचल हो रही थी। सब अपने-अपने काम में व्यस्त थे।लेकिन पता नहीं आदित्य स्कूल के 1st फ्लोर पर अकेलाबैठा था।शायद उसकी कोई दोस्त नहीं थी।तभी किसी के आने की आने की आहट आई आदित्य पीछे मुडा तो उउसने देखा कि एक खुबसुरत लड़की उसी की तरफ आ रही है।वो लड़की काफी सुंदर लग रही थी लंबे बाल ,काली-काली मोती जैसे आँखें, गोरे लाल -लाल गाल और गुलाब की जैसे होंठ जो लिपस्टिक से और भी सुंदर लग रहे थे।आज पहली बार हुआ था जो आदित्य उसकी खुबसुरती में खो गया था।उसका दिल अपनी सीमा तोड़ चुकाथा।शायद उस लड़की के अतरंगी चाल आदित्य को मदहोस किए जा रहे थे।


"हाय! तुम यहाँ क्या कर रहे हो?"तभी लड़की  चुटकी बजाते हुए बोली।
"हेलो! तुम मुझे जानती हो क्या?"आदित्य ने कहा।
"congrats  यार 
you are great यार 
तुम कमाल हो।" उस लड़की ने एकाएक उत्साहित होते हुए कहा।
"क्या मतलब?क्यों" आदित्य ने हैरानी से पूछा।
"अरे! तुम्हारी पेंटिंग इतनी फेमस हो गई है और मैंने सुना की तु poem भी लिखता है।यार मुझे सुनना है तुम सुनाओगे प्लीज।"

पता नहीं वो लड़की ऐसे आदित्य से ऐसे बात कर रही थी जैसे कि उसको पहले से जानती हो।
"हाँ मुझे कविता लिखने का शौक है लेकिन अभी याद नहीं है एक भी।तो मैं तुम्हें अपनी डायरी दे दुँगा तुम पढ़ लेना।" आदित्य ने कहा,"वैसे तुम्हारा नाम क्या है?"

"सौम्या" लड़की ने कहा।और फिर क्या था नीचे कार्यक्रम चल रहा था और ऊपर दोनों अपनी-अपनी बातें कर रहे थे।शायद सौम्याको भी नीचे मन नहीं था इसलिए ऊपर ही चली गई थी।ऐसा पहली बार हुआ था इतने सालों में कि आदित्य इतना ज्यादा घुल-मिल रहा था किसी लड़की से।सौम्या हमेशा मस्ती में रहने वाली चुलबुली लड़की थी।स्कूल के कई लड़कों से उसकी अच्छी दोस्ती थी।
कुछ दिन बाद सौम्याने आदित्य को अपने घर बुलाई ताकि कविता सुन सके।तो बस आदित्य सौम्याके घर चला गया।कविता तो शायद बहाना थादोनों की दोस्ती का।दोनों में काफी देर तक बात हुई सौम्या ने आदित्य को अपने घरवालों से मिला रही थी।
"यार पता नहीं मैं तुमसे इतनी जल्दी कैसे घुल-मिल गई।वैसे तुम बहुत अच्छेहो।"
हाँ सौम्या तुम भी बहुत अच्छी हो।"
"आदि सुनो ना।"
"उफफ इतना प्यारा नाम।"
"हाँ तो बस अपने दोस्त को बुला रही हूँ।"
"तुम सिंगल हो मतलब कि तेरा कोई........"
"ओए! पागल मुझे दोस्ती ही पसंद है।प्यार मोहब्बत मेरा काम नहीं है।"
"वाह! यार मुझे भी सिर्फ दोस्ती पसंद है लेकिन मुझे तुमसे दोस्ती करने में डर लगता है।"
"क्यों?"
आदित्य अपनी पुरानी कहानी बताता है जो कैसे उसकी दोस्त शिवानी उसको धोखा दी थी दोस्ती में।हर किसी को प्यार में धोखा मिलता है लेकिन आदित्य पहला था जो दोस्ती में धोखा खाया था।और उस दिन से आदित्य को लड़कियों से नफरत हो गया था।"so sad but तुम मेरे दोस्त हो मुझ पर भरोसा कर सकते हो।मैं कभी तुम्हें धोखा नहीं दुँगी। promise yaar."

"आज फिर किसी पर भरोसा कर रहा हूँ।"दोनों ही कुछ ही दिनों में अच्छे दोस्त बन गुए थे।अब धीरे-धीरे आदित्य को सौम्याके बारे में पता चलने लगा था।सौम्याका उसके जैसे और भी दोस्त थे।वो लड़कों के साथ काफी क्लोज रहती थी।ना चाहते हुए भी ये सब सोचकर आदित्य को डर लगने लगा था।"यार ये सागर कौन है?"

"हाँ मेरा दोस्त है आदि।" 
"बेस्ट फ्रेंड क्या?"
"हाँ यार।"
ये सुनते ही आदित्य बुरा महसुस करने लगा था।पता नहीं क्यों वो अकेले सौम्यापर हक जताना चाहता था लेकिन ये तो हो नहीं सकता था।तभी आदित्य ने सागर को  Facebook पर message किया:- 
"हाय!"
"हेलो!congrats तुम्हारा पेंटिंग काफी फेमस हो गया है।"
" Thank you bro.कुछ पूछना था तुमसे।"
"हाँ बोलो क्या बात है?"
"सौम्याको जानता है।मतलब तुम्हारी दोस्त है क्या?"
"हाँ जानते हैं।वो मेरी बेस्ट फ्रेंड है।"इस बात को सुनते ही पता नहीं आदित्य के दिल को अजीब सा एहसास होने लगा था।उसने पूछा-"वो तुमको बेस्ट फ्रेंड मानती है।"
"हाँ यार।लेकिन क्यों?"
"नहीं मेरी भी बेस्ट फ्रेंड है वो।"
"हम्म्म.....अच्छीलड़की है।"

"gf  बनाने का इरादा है क्या?"इस बात से सागर एकदम चौंका और बोला, "नहीं भाई हमको दोस्त ही रहने दो उसका।तुमको पसंद आ गई क्यारे?"
"नहीं रे!पागल हमको तो  बेस्ट फ्रेंड ही अच्छी लगती है और उसमें भी कभी-कभी भाई बोल देती है।"
"हा हा हा .......वो तो हमको idiot बोलती है ,हम तो उसका idiot दोस्त है ना।"
अब तो शायद इस बात से पक्का हो गया था कि कहीं ना कहीं सागर सौम्या को पसंद करता था लेकिन बोलता नहीं था कभी।दोनों की दोस्ती अच्छी थी और इस बीच आदित्य सोच रहा था कि क्या सौम्या सच में उसको अपना बेस्टफ्रेंड मानती है।वो इन ख्यालों में घुम गया था।उसने तुरंत सौम्या को Facebook में message किया:- 
"झुठी हो तुम।"
"क्या हुआ यार?"
"तुम मुझे अपना बेस्ट फ्रेंड नहीं मानती।"
"कौन बोला?तुम हो यार।"
"अच्छा तो सागर वो बोलता है कि तुम उसकी बेस्ट फ्रेंड हो।वो मेरा पोपट कर दिया ना।तुमको नहीं बनाना था दोस्त तो पहले ही बोल देती ना हमको।"शायद आदित्य काफी भावुक हो चुका था, पता नहीं उसके दिल में सौम्याके लिए क्या था?"
"तुम जानते हो ना we are best friend na तो वो कुछ भी बोले तुम तो मेरे अच्छे वाले दोस्त हो।"इस बात से आदित्य को शुकून मिली था।लेकिन कहीं ना कहीं सौम्या के इन मीठी बातों से आदित्य के ख्यालों को बढ़ावा मिल रहा था, जिसके चलते वो अपना दोस्त विकी से दूर हो चुका था।हर समय सौम्या से बातें करता और सौम्या भी उसका साथ देती।उसको भी आदित्य से बात करना अच्छा लगने लगा था।रात खत्म हो गई थी।नया सवेरा आया और इस सवेरे के बाद सब कुछ बदल जाने वाला था।सभी की उम्मीद टूटने वाली थी।

दोपहर को आदित्य अपने घर में बैठा था तभी उसे सौम्या की दोस्त सिया से पता चला कि सौम्या का boy friend है और दोनों पिछले 3 साल से साथ में हैं।इस बात का अंदाजा भी लगाना मुश्किल था कि आदित्य पर क्या बीत रहा था उस समय। उसके पैरों तले जमीन खिसक गई थी, बार-बार यही सवाल आ रहा था उसके मन में कि आखिर उसकी बेस्ट फ्रेंड उसको ये बात बताई क्यों नहीं?क्या वजह होगा?"

और जब वो अपना fb id खोला तो वह सुन पड़ गया था।सौम्या उसको ब्लोक कर चुकी थी।उसने सौम्या की दोस्त से पता करना चाहा मगर उसे कुछ पता नहीं चल पाया।अब वो बिल्कुल अकेला हो चुका था विकी भी उसके साथ नहीं था।उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे और क्या ना करे ।आखिर उसकी गलती क्या थी जो उसे यह सजा मिली थी।
वक्त बीत रहा था आदित्य की बेचैनी और भी बढ़ रही थी।तभी सौम्या का फोन आया:-
"हेलो!आदि।"
"धोखेबाज ! झूठी! पागल......."
"हाँ बोल लो बटमेरी बात सुन लो यार प्लीज।"
"बोलो मुझे block क्यों की?"
"यार वो मेरा bf किया वो हम दोनों का chat पढ़ लिया।उसको मेरा fb का password पता है इसलिए और तुमसे दोस्ती तोड़ने बोला।"
"यार इतनी बड़ी बात छुपाई तुम।"
"यार मैं बताना चाहती थी और बताने भी वाली थी लेकिन अब ये हो गया।so sorry yaar really sorry."
"तो अब दोस्ती खत्म।"
"नहीं यार तुमको तो पता है मैं अपने दोस्तों के बिना नहीं रह पाते।इसलिए तुम कुछ दिन रूक जाओ फिर सब ठीक हो जाएग।"
"पक्का  ना ।"
"हाँ यार। ok bye take care."

आदित्य को कुछ पल के लिए शांति मिली लेकिन वो सौम्या के bf के बारे में जानना चाहता था और उसने अब बड़ी गलती कर दी थी।उसने सागर को बता दिया वो सोचा कि सागर पता कर लेगा और सागर ने आदित्य को उल्टी-सीधी सलाह दे दिया।अब आदित्य पागलों की तरह करने लगा था।उसने सौम्या की सारी दोस्त से पुछना शुरू कर दिया और सारी दोस्त कुछ गलत समझ बैठी थी जिससेआदित्य अनजान था।आदित्य ने सब को यहां तक कह दिया कि सौम्या उसको धोखा दी है।और सारी लड़कियाँ आदित्य के जजबातों से खेलने लगी थी।सब इसका मजाक उड़ाने लगी थी।और इधर के इन  बातों से सौम्या उससे दूर होने लगी थी।बहुत दिन हो चुके थे सौम्या का कोई फोन, मेसेज नहीं आया था।आदित्य परेशान हो चुका था उसने लगातार मेसेज किया सौम्या को लेकिन हर बार उसके हाथ निराशाही लगी।आखिरकार 1 हफ्ते बाद सौम्या फोन की :-
"सुन तु बार-बार मुझे मेसेज क्यों कर रहा है यार मेरी मम्मी का फोन है।"
"अरे!यार तुम अपना दोस्त को भुल गई।एक दिन जब बहुत दूर चले जाऐंगे ना तब याद करोगी देखना।"
"सुन तु और सागर जो मेरे और मेरे bf के बारे में पता कर रहा है ना ये सब छोड़ दे, अभी मैं मजबूर हूँ इसलिए शांत हूँ अभी भी सुधर जा वरना अच्छा नहीं होगा।"
"लेकिन सौम्या मैंने क्या किया और पता तो सागर कर रहा है।"
"जो भी हो आज के बाद तुम ना फोन करना ,ना मेसेज करना और ना ही कभी contact  करने की कोशिश करना।"

"यार तुम ऐसा क्यों कर रही हो तुम मुझे धोखा दे रही हो।तुम वादा की थी कि हमेशा मेरी दोस्त रहोगी।"
"क्या धोखा धोखा कर रहे हो।मैंने तुम्हें दोस्त माना था लेकिन तेरा intentionपता चल गया।"
"कोन-सा intention क्या बोल रही हो?इसका मतलब तुम दोस्ती तोड़ना चाहती हो।"
"हाँ ऐसा ही समझो।"आदित्य कुछ बोल पाता कि फोन कट चुका था।जब उसने दोबारा फोन किया लागातार किया तो पता चला कि उसका नंबर Blacklist में जा चुका है।उसकी आँखों से लगातार आँसुओं की धार बह रही थी।उसके जैसा आप भी समझ नहीं पा रहे होंगे कि आखिर आदित्य की गलती क्या थी?"सौम्या की सारी दोस्त भी आदित्य को fb पर Block कर चुकी थी ताकि आदित्य कुछ पूछे ना।

और इस बीच आदित्य ने हर वो कोशिश की ताकि कुछ पता चले लेकिन हर बार निराशा हाथ आई उसकी।अगर कभी सौम्या की कोई दोस्त मिल जाती तो ये बोल कर बात टाल देती कि उसे कुछ नहीं पता है।इधर सागर भी परेशान था लेकिन वो आदित्य की तरह जजबाती नहीं था, उसकी बहुत सी लड़कियाँ दोस्त थी शायद इसलिए उसे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था लेकिन आदित्य तो बिल्कुल अकेला हो गया था।कहते हैं इसांन को तब तक कोशिश करनी चाहिए जब तक कि कोई रास्ता ना मिल जाए।लेकिन शायद लड़कियों के मामले में ये बात नहीं आती आप कितनी भी कोशिश कर लो मगर कोई फायदा नहीं होता और आदित्य के साथ भी यही हो रहा था।
वक्त अपनी गति से बीत रहा था।आदित्य अब धीरे-धीरे पुरानी बातों को भुलना चाह रहा था।और वो कामयाब भी हो रहा था कि उसकी जिंदगी फिर वहीं ले आई थी।आदित्य को इतने महीनों बाद सौम्या की एक दोस्त मिली थी जो कुछ बताना चाहती थी।

"आदि तुमने सौम्या को बहुत Hurt किऐ।"
"हाँ सब तो मैं ही कर रहा हूँ।"
"क्या मतलब?"
"यार मुझे सिर्फ कारण जानना है कि सौम्या ऐसा क्यों की या क्या हुआ उसके साथ ऐसा? पता नहीं उसको मेरा intention क्या लगा?"
"तुम सौम्याको पसंद करते थे।तुम intention की बात बोले इसलिए पूछीसच्ची बताना।"
"नहीं यार वो बस मेरी बेस्ट फ्रेंड थी।"
"तो तुम दिवाने की तरह क्यों पता कर रहे थे उसके बारे में?"
"यार अब कोई भी बिना कारण ऐसा कर देगा तो जायज है कोई भी पता करेगा ही।और तुमको तो पता ही है मैं दोस्ती में कितनाभावुक हो जाताहूँ।"
"जो भी हो बस सौम्या तुमको अपना अच्छा दोस्त मानती थी और उसको जब पता चला कि तुम ऐसा कर रहे हो ये जानते हुए भी कि उसका पहले से bf है।"
"यार प्लीज उसको समझोओ हम ऐसा क्यों करेंगे।यार सब ठीक हो जाए बस।"
"ऐसा कुछ नहीं होगा सपना मत देखो।सब सपना समझकर भूल जाओ।"
आदित्य कुछ बोल पाता कि लो लड़की जा चुकी थी।और आदित्य के घाव को और कहीं ज्यादा बढ़ा कर चली गई थी।अब आदित्य का एक ही मकसद था कि वो सौम्या को सब समझाऐगा कि जैसा वो समझ ली है वैसा कुछ नहीं है।लेकिन किस्मत को ये कहाँ मंजूर था।उसकी हर कोशिश नाकाम हो गई।आखिरी बार आदित्य ने दूसरे नंबर पर काॅल किया :-
"हेलो!कौन? "
"सौम्या प्लीज मेरी बात सुन लो ना एक बार।"
"तुझे मेरी बात समझ नहीं आती क्या मुझे अब किसी लड़के से बात नहीं करना।और सच बोलु तो तुम्हारे लिए मेरे दिल में कभी जगह ही नहीं थी।"
"तो तुम वो सब बात भुला दी जो मुझसे कहती थी।"
"हाँ ऐसा ही समझोऔर आज के बादकाॅल किया तो अच्छा नहीं होगा।"और फोन कट चुका था।आदित्य की आखिरी कोशिश भी बेकार हो चुकी थी।कभी अगर सौम्या कहीं दिख जाती तो आदित्य बात करना चाहता लेकिन सौम्या ऐसा करती जैसे आदित्य को जानती ही नहीं थी कभी।आदित्य भी अब उम्मीद खो चुका था बस अगर उसके पास कुछ था तो सौम्या का दिया दर्द। आदित्य अपनी किस्मत को कोसता कि अगर उसके साथ ऐसा ही होना था तो दोस्ती ही क्यों हुई थी पहले जैसा अकेला रह लेता।आदित्य अब पूरी तरह से टूट चुका था।बस उसने तो दोस्ती करनी चाही थी लेकिन यहाँ सब उल्टा ही हो गया था।उसकी दोस्ती में बस एक मीठा सा प्यार था जो सौम्या गलत सभझ बैठी।और आदित्य भी जानता था कि वो सौम्या से प्यार नहीं कर सकता।और गलती सौम्या की तो थी या नहीं ये आप सोच सकते हैं मगर सौम्या की सारी दोस्त की गलती तो थी जो दोस्ती को समझ नहीं पाई और दोस्ती करवाने तक की कोशिश ना की और सौम्या को आदित्य के खिलाफ कर  दी।और एक ने तो आदित्य को  Cheap लड़का तक कह दी थी।
खैर, खुशी की बात ये थी कि विकी से ये सब देखा नहीं गया और आदित्य के पास वापस आ गया हम दर्द बन कर। 

लेकिन ये आम बात है आज के लिए ऐसे हर दिन कई दोस्तीटूटती रहती है।आपको कई आदित्य मिल जाऐंगे जिन्होंने धोखे खाए हैं हाँ ये अलग बात है अक्सर लोग प्यार में धोखा खाते हैंलेकिन  आदित्य को तो दोस्ती में धोखा मिला था।अब तो प्यार से तो नफरत हो गया होगा।
लेकिन यही है आज की सच्चाई कि हर कोई Time Pass वाली दोस्ती करता है। हाँ कोई आदित्य की तरह जज़्बाती  नहीं होता और जो होता है उसकी भी हालत आदित्य की तरह हो जाती है।शायद इस बार आप अपनी Time Pass वाली दोस्ती को Real  दोस्ती बना लो।
                                                                                                                                                                                                                      लेखक :  इंद्रजीत कुमार
(गिरिडीह, झारखण्ड) 

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