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Sunday, August 19, 2018

साक्षात्कार : "कौवों का हमला" उपन्यास और भारतीय टेलीविज़न जगत के प्रख्यात लेखक श्री अजय कुमार सिंह 'रावण' से कुछ बातें। भाग #01 साक्षात्कारकर्ता - मोहित शर्मा 'ज़हन'

 "कौवों का हमला" उपन्यास और भारतीय टेलीविज़न जगत के प्रख्यात लेखक श्री अजय कुमार सिंह 'रावण'  से कुछ बातें। 
भाग #01 साक्षात्कारकर्ता - मोहित शर्मा 'ज़हन'

सवाल 1 : अपने बारे में कुछ बतायें।
जवाब : मैं अजय कुमार, उत्तर प्रदेश और बिहार में पला बढ़ा . पेशे से इंजिनियर बनाना था मगर बचपन से कहानी लिखने की कला में पारंगत होना चाहता था, तो वही इच्छा मुंबई ले आई. सामान्य परिवार और सामान्य जरूरतें यही मैंने जीवन में देखा है परन्तु फिल्म और टीवी की कहानियों में हमारे मध्यम वर्ग के जीवन को प्रस्तुत करते और उसका आनंद लेते हुए नहीं देखा. मुंबई में फिल्मों में डायरेक्शन से कैरियर की शुरुआत की और फिर अंग्रेजी फिल्मों की डब्बीग स्क्रिप्ट लिखने से लेकर हिंदी टीवी सीरियल की कहानियाँ लिखने लगा. समय और विभिन्न कलाकारों के साथ काम करके कहानी कहने के अंदाज और सब्जेक्ट पर बहुत कुछ सीखा और सीखता जा रहा हूँ . 
    
सवाल 2 : पहले उपन्यास का विषय बच्चों पर केंद्रित क्यों चुना जबकि शुरुआत में आपके लिए क्राइम फिक्शन जैसे विषय ज़्यादा आसान होते?

जवाब : क्राइम फिक्शन, मैंने बहुत लिखा और लेखनी की दुनिया में आने के बहुत पहले से ऐसी कहानियाँ लिखने का मन था क्यूंकि ये मेरे दिमाग में स्वतः आती हैं. मैंने क्राइम फिक्शन की काफी कहानियाँ लिखी और सफलता भी मिली तो अब दूसरे genre की कहानी पर काम करना था.

बच्चों का साहित्य लिखने का तो बहुत मन था , यहाँ तक की मैंने CID और आहट में भी बच्चों को दिमाग में लिख कर ही कहानी लिखता था.

पिछले 5 साल से ये कोशिश चल रही थी की क्या लिखूं. कई टीवी शो भी बनाये, पारिवारिक और कॉमेडी पर आधारित पर वो सब किसी चैनल पर पास नहीं हुए तो थोडा शक बढ़ा हुआ था की दूसरी कहानियाँ पसंद क्यों नहीं की जा रही. फिर कौवों का हमला, बच्चों का साहित्य, कुछ ऐसे आया की मैं अपने कहानी लिखने के कैरियर में हमेशा चम्पक पढ़कर सीखने की कोशिश करता की मेरी कहानी इतनी सरल है या नहीं. और फिर मैं अपने बेटे को सोते वक़्त एक कहानी सुनाता था जिसमें ये कहानी उसको बहुत पसंद थी तो मैंने इस कहानी को लोगों तक लाने का सोचा क्यूंकि यही एक कहानी थी तो शुरू से अंत तक दिलचस्प भी थी और पूरी तैयार भी.


सवाल 3 : लेखन के अलावा किन बातों में रूचि है ?
जवाब : मुझे नयी जानकारियाँ पढने, बातें करने, ख्यालों में खोये रहने और खाने का बहुत शौक है.

सवाल 4 : अपने करियर का सबसे सफल वर्ष किसे मानते हैं और क्यों ?
जवाब : पैसे के हिसाब से 2010-2013 : टीवी का सर्वोच्च TRP देखा और पैसे भी बहुत कमाये ! काम की कदर हुई और एक पहचान भी मिली. 2009 मेरे लिए अत्यधिक सफल कहना चाहूंगा क्यूँकी टीवी का माइलस्टोन शो लिखने को मिला "अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो". कई ऐसे बड़े शो पर काम करने का मौक़ा मिला जो आगे चलकर टीवी इंडस्ट्री के लिये मील का पत्थर साबित हुए. उन सभी प्रोजेक्ट में जुड़कर मुझे उन सब्जेक्ट पर काम करने का मौक़ा मिला जो मैं खुद से जल्दी नहीं उठाता.

सवाल 5 : व्यस्क पाठकों से बाल पाठकों को आप किस तरह अलग हैं ?
जवाब : मैंने व्यस्क पाठकों के लिए कभी नहीं लिखा , हमेशा बच्चों के लिए ही लिखा है. अगले जनम की लाली औरउसके भाई बहन के नजर से कहानी लिखता था. CID और आहट तो बच्चों के लिये ही था. टीवी के लिए लिखना या फिल्म के लिये , चुकी ये दोनों ऑडियो विसुअल माध्यम हैं, तो लिखते वक़्त मैं इमोशन के साथ इसका भी ध्यान रखता की आवाज और चित्रों के साथ कैसे खेला जा सकता है .

सवाल 6 : क्या यह उपन्यास किसी सीरीज का हिस्सा है ?
जवाब : इसको सीरिज बनाऊंगा, ये नहीं सोचा था. शुरू में, यही कहानी ३ हिस्सों में थी, अभी जहाँ कहानी ख़त्म होती है उसके आगे भी एक लम्बी कहानी थी जिसको मैं 3 लघु उपन्यासों में ढालने का प्लान कर रहा था पर जब ये उपन्यास लिखने लगा तो उन दोनों उपन्यासों को निचोड़ कर इसमें डाल दिया. कुछ किरदार और थोड़ी मस्ती निकल गयी पर कहानी दुरुस्त रहे , फैले नहीं, ये पहला लक्ष्य था. 

सवाल 7 : भविष्य की योजनाओं के बारे में बतायें।
जवाब : मैं बहुत सी कहानियाँ आधी अधूरी टीवी और फिल्म पर बनाने के लिए लिखता जो कभी बन नहीं पाये, कोशिश है उन सभी को उपन्यासों के तौर पर प्रस्तुत करने की . साथ ही , बहुत ही और कहानियाँ है जिसको कहना चाहता हूँ , बनाना चाहता हूँ . मैं कहानी कहने के लिये उपन्यासों का माध्यम बेहतर तरीके से इस्तमाल करना चाहता हूँ . इसके साथ ही, टीवी और फिल्म के दमदार कलाकारों के साथ प्रोजेक्ट करने का बहुत मन है. उस बड़े पैमाने पर कहने के लिए नयी कहानियों की तलाश कर रहा हूँ ! अभी तक वेब सीरिज में बहुत कुछ नहीं किया , star समूह के लिए वेब सीरिज उस वक़्त लिखा था जब इसपर मार्किट में कोई बात नहीं करता था , वो २०१० का साल था. अभी बहुत कुछ बदल गया है और जल्द ही किसी वेब सीरिज पर काम करने की प्लानिंग चालू है.     


सवाल 8 : टीवी से प्रिंट में आने में आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा ?
जवाब : मुझे टीवी में एक टीम के साथ लिखने की आदत थी, डायरेक्टर , क्रिएटिव , प्रोडूसर , चैनल सभी की राय से कहानी बनती है वो यहाँ मौजूद नहीं था. मैं थोडा अकेलापन महसूस कर रहा था जो डरावना भी था और मजेदार भी की मेरी लेखनी को रोकने वाला कोई नहीं था. हर एक बात को खुद तय करना, हर एक डिटेल खुद सोचना और लिखना. करीब करीब एक सिनेमा या टीवी का एपिसोड बनाने जैसा तजुर्बा रहा ! सबसे बड़ी चुनौती जो महसूस हुई , जो टीवी में भी है की मैं अपनी कहानी को दर्शकों तक पहुंचाने की. पहले मैं मार्केटिंग प्रोडक्शन  हाउस और चैनल में करता था पर अब मैं सीधा पाठकों को मार्किट कर रहा हूँ , जो बिलकुल ही नया और अलग एहसास है.

सवाल 9 : अपने देश का इतना पुराना इतिहास और यहाँ इतनी प्रतिभा होने के बाद भी मनोरंजन और कहानियों में भारत अक्सर विदेशों का मुँह क्यों ताकता है ?
जवाब : ये सवाल सोचनीय है, जितना मुझे समझ आता है की हम विदेशों से बहुत उम्मीद करते हैं, हमारे यहाँ की सोच और जीवन शैली पर उनका प्रभाव अत्यधिक है! पर कहानियों के देश होने के बावजूद हम यहाँ भी पीछे रह गए, ये बात मुझे भी समझ नहीं आती और जितनी समझ आती है की हमारे यहाँ कला को बिजनेस की तरह से नहीं देखा जाता या इसको गलत माना जाता है. जबकी दूसरे देशों ने कहानी कहने की कला को देश और व्यक्तिगत निर्माण से जोड़ कर देखा है. हमारे यहाँ घर वाले बच्चों को कहानी पढने पर जोड़ नहीं देते क्यूंकि किताब खरीदने में पैसों की फिजूल खर्ची मानते हैं. कहानी पढ़ना एक व्यर्थ कार्य. जबकी कहानियाँ हमारे आम जीवन को गहरे प्रभावित करती हैं .


सवाल 10 : बिहार और मुम्बई के जीवन में किस तरह के बदलाव देखे?
मुंबई में तो अभी तक कोई जीवन नहीं रहा , बस करियर की भाग दौड़ रही है . बिहार में सपने थे, परिवार था जो अब अतीत हो गया है और अब मुंबई में एक घर बनाने, अपनी पहचान बनाने की कोशिश है . बिहार में दुनिया थोड़ी छोटी थी और ओना कोना बहुत बड़ा, यहाँ की दुनिया बहुत बड़ी है पर अपना कोना बहुत छोटा. बिहार में लोग आराम से बैठे हुए दिख जाते थे यहाँ कोई बैठा हुआ दिखेगा तो उसको निठल्ला मान लेंगे, बिहार में लोग ताने भी सुना देंगे यहाँ कोई ताने नहीं देता क्यूंकि उसके लिए भी समय नहीं है. यहाँ अपनी भाषा सुनाने को नहीं मिलती जिससे एक आत्मीयता थी, यहाँ मैं ऐसे ही साइकिल गाड़ी या कार लेकर घूमने नहीं निकल जाता जो बिहार में आज भी जाता हूँ तो करता हूँ. पैसे का महत्व बिहार में था तो नहीं समझ आया और यहाँ पैसे नहीं तो कुछ नहीं.

सवाल 11 : उभरते लेखकों और अपने पाठकों के लिए क्या संदेश देना चाहेंगे ?
जवाब : उभरते लेखक जैसी चीज शायद नहीं होती, एक लेखक के तौर पर कभी संतुष्ट नहीं होना ही सबसे बड़ी बात मैंने सीखी है. तकनीक की जानकारी होनी चाहिए और अपनी कहानियों को कहने की हिम्मत जितनी जल्दी जुटा लेंगे उतना अच्छा. जो हमने अपने जीवन में देखा है वही कहानी है, उसको कैसे ढाल कर दर्शकों के सामने रखना है वो आपको तकनीक या माध्यम सिखाता है. मैं पाठकों को संदेश से ज्यादा, मेरी कहानियों को पढने और उस पर प्रतिक्रिया देने का रिक्वेस्ट करता हूँ.
 
सर अपने क़ीमती वक़्त से हमारे इंटरव्यू के लिए वक़्त देने के लिए आपका बहुत शुक्रिया।  इस इंटरव्यू के माध्यम से हमें आपको और आपके काम के बारे में जानने का मौक़ा मिला। आपके द्वारा दी गई  महत्वपूर्ण जानकारियां लेखकों  और पाठकों के लिए बहुत उपयोगी साबित होंगी।  हम उम्मीद करते हैं भविष्य में भी आप लगातार साहित्य जगत में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते रहेंगे और हम आपके बेहतरीन लेखन से रूबरू होते रहेंगे। हमारी हार्दिक शुभकामनायें

साक्षात्कारकर्ता - मोहित शर्मा 'ज़हन'


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साक्षात्कार भाग 02 
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