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Monday, August 27, 2018

साक्षात्कार भाग 02 : 'कौवों का हमला' उपन्यास लेखक श्री अजय कुमार सिंह 'रावण

'कौवों का हमला' उपन्यास लिखने के बाद टेलीविज़न जगत के जाने माने लेखक अजय कुमार सोशल मीडिया पर सक्रीय हैं। इस माध्यम से अजय जी अधिक से अधिक साहित्य प्रेमियों तक पहुँचने का प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में वो अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। पेश है लेखक मोहित शर्मा 'ज़हन' से उनकी बातचीत का दूसरा भाग

सवाल 12) - अपने पसंदीदा लेखकों के बारे में बतायें। एक पाठक के रूप में ऐसे क्या अनुभव रहे जो कोई लेखक आपके मन में जगह बनाने में सफल रहा?
जवाब : बॉलीवुड फिल्म और टीवी में कई लेखकों से मिलाने और साथ काम करने का मौक़ा मिला और सबसे कुछ सीखने को मिला. हर किसी का एक महत्वपूर्ण स्थान रहा. फिर भी सबसे बढ़िया लेखक जिनका प्रभाव बहुत गहरा रहा वो दो विदेशी लेखक हैं एक स्टेफेन किंग और दूसरे Roald Dahl. Dahl की कहानियों मुझे बहुत पसंद थी और मैं सोचता की वो ऐसे कहानियाँ सोच और लिख कैसे लेते हैं , स्टेफेन किंग से लिखने की विद्धा और उनके तरीके के बारे में जान कर बहुत बढ़िया लगा और उनके जैसी मेहनत करने की लालसा जगी .

सवाल 13) - क्या अच्छा लेखक होने के लिए अच्छा पाठक होना ज़रूरी है?
जवाब : हाँ ये बहुत जरूरी है, क्यूँकी अगर पढने का शौक नहीं है या कहानियों से प्रेम नहीं है तो लेखक के पास कोई मंजिल या कौशल नहीं है. यहाँ एक और बात देखी मैंने, चूँकि मैं कई नए लेखकों के साथ भी काम किया तो ऐसे कई लेखक देखे जो पढने के शौक़ीन नहीं हैं पर वो फिल्म और टीवी बहुत देखते है जिनसे उनके कहानियों की समझ बढ़ गयी . सबसे बड़ी बात जो मैंने दूसरे लेखकों को पढ़कर या उनके काम को देख कर सीखा वो था सब्जेक्ट का चयन और उसको सामान्य तौर पर लोगों के सामने रखने का कौशल. बाकी कहानियाँ तो हम लेखक वही कहते हैं जिसने हमपर प्रभाव छोड़ा हो या हम जिस बात को दूसरों तक पहुँचाना चाहते हों

सवाल 14) - अपने किसी प्रशंसक से जुड़ा कोई यादगार अनुभव?
जवाब : बहुत से दर्शकों ने बहुत प्यार दिया और कई दर्शक थे जो कहते थे की CID देखने जब वो बैठते हैं तो लेखक में अजय कुमार नाम देख कर उम्मीदें बढ़ जाती हैं . ऐसे ही बहुत से वाक्या है पर एक बात जो हमेशा जेहन में रह गयी वो थी २०१० की घटना. मैंने "अगले जन्म..." लिखना बंद किया था और मेरी शादी तय थी तो मैं अपने माता पिता और भाई के साथ वाराणसी से बलिया जा रहा था, रात का समय होने से हमें रिक्शा नहीं मिल रहा था तो बस स्टैंड तक पहुंचा दे. सभी रिक्शा वाले कुछ ना कुछ बहाना बना देते, तभी एक रिक्शा वाले को समझाने की कोशिश कर रहा था और जब उसको पता चला की मैंने "अगले जनम .. " टीवी सेरिज लिखा है तब वो इतना खुश हुआ क्यूंकि वह उसका मनपसंद सीरियल था और वह हमें सवारी देने को तैयार हो गया. :) 

सवाल 15) - भारतीय मनोरंजन के माध्यमों में किन बातों में सुधार होना चाहिए?
जवाब : मैं कहानियाँ चाहे वो टीवी, वेब या फिल्म या उपन्यास के विषय में कह सकता हूँ , वो भी क्यूंकि मैं उसमें खुद कुछ करना चाहता हूँ . इन माध्यम में कहानियों का कनेक्ट दर्शक या पाठक के साथ नहीं बन पा रहा है. मेरे ख्याल से सब्जेक्ट के चुनाव और कार्य प्रणाली में सुधार की बहुत जरूरत है, हमारा दर्शक आज इंटरनेशनल प्रोडक्शन देख रहा है और चुनौतियां बढ़ गयी हैं , और इस स्पर्धा में अपनी भारतीय कहानियों को जीतने के लिये विचार करना चाहिए . ये हमारी धरोहर हैं !

सवाल 16) - अपने संघर्ष के दिनों से आपने क्या सीखा?
जवाब : कम खाओ और गम खाओ. कई बारे खाने में पैसे खर्च करूँ या बस के भाड़े में वाले संघर्ष हो जाते पर हमेशा बस भाडा जीत जाता और कई बार काम करते वक़्त लोगों की गालियाँ और डांट खाने को मिलता या मेरे आईडिया पर लोग मजाक उड़ा देते और कोई फिर उसी आईडिया को अपना बता कर वाह वाही लूट लेता, तो बहुत दुःख होता . इस दुःख को नहीं पीने का मतलब था आगे नहीं बढना. मैंने कभी अपनी दिल की बात या मुझे क्या महसूस हो रहा है कहने में नहीं हिचकता था और समय के साथ खुद को तैयार करता हूँ की आगे कभी ना हिचकूं . मजबूरी वश या डर से ना बोल कर मैं प्रोडक्ट और रिश्ते खराब करने से बेहतर अपनी बात बोल कर पसंद ना आने पर साइड होना ज्यादा पसंद करता हूँ.  

सवाल 17) - आपका सबसे बड़ा सपना क्या है?
जवाब : मैं हिंदी कहानियों की धूम देखना चाहता हूँ , जो दर्शकों और पाठकों को दीवाना बना दे.



सवाल 18) - एक कलाकार की रचनात्मक स्वतंत्रता के लिए छटपटाहट का अंत कब संभव है?
मरे लिए ये कभी नहीं हो पाया, तो अब ऐसी उम्मीद करता हूँ की ये संभव नहीं. अब यही उम्मीद करता हूँ की इतनी स्वतन्त्रता मिल जाये की मुझे अपनी कहानी पर काम करने और कहने का मौक़ा मिलता रहे . ये शायद हर लेखक के लिए बहुत जरूरी है.

सवाल 19) - कौवों का हमला के प्रोमोशन-मार्केटिंग के बारे में बतायें।
जवाब : 3 तरह की मार्केटिंग मैंने की है इस किताब से. एक टीवी , फिल्म और वेब के प्रोडूसर तक इस कहानी को पहुंचाने में, जो मैंने खुद जा जा कर एक एक को अपने हाथ से ये किताब दिया . दूसरा पाठक वर्ग, जो मुझे WhatsApp और Facebook पर मिले, उनको अपने बारे में और किताब के बारे में बताना और उनको पढने का रिक्वेस्ट करना. मेरे मकसद शुरू से बहुत पाठकों तक पहुँचने का था जिसके लिए मैंने कम कीमत की पुस्तक छपवाई और उसको पाठकों तक पहुंचाया, पर किताब पहुँचने में समय लग जाती या लोग खरीदने में सोचते जिससे मेरा उद्देश्य दूर हो रहा था तो मैंने पीडीऍफ़ को फ्री तो शेयर कर दिया और लोगों में बाँट दिया. अभी भी फेसबुक और वात्त्सप्प के माध्यम से काफी कुछ करने का प्लान है. तीसरा तरीका था, की पाठक तक अपनी दूसरी कहानियों को बिना रुके पढने को देना. तो कौवों का हमला लिखने के पहले, मैंने ये निश्चय किया की मेरी अगली 4 कहानियाँ किया होंगी. उन ४ कहानियों को ढूँढने के लिए मैंने करीब 65 कहानियाँ लिख डाली. जिसमें से 5 कहानिया जीत गयी क्यूंकि वो पूर्णता के करीब हैं और मेरे दिल दिमाग के भी, दिसंबर तक उन कहानियों की किताबो को आपके सामने प्रस्तुत करने के उद्देश्य पर भी काम चालू है.

सवाल 20) - किन जॉनर को आप सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण मानते हैं?
जवाब : मुझे रोमांस थोडा मुश्किल लगता है , वो भी इसलिए क्यूँकी मैं अभी तक एक लेखक और सामजिक इंसान के तौर पर प्रेम को समझने या अपनी समझ को प्रस्तुत करने में चुनौतियां महसूस करता हूँ. प्रेम में सेक्स एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और उससे हटकर या उसको मिलाकर मैं अपनी सोच को रखने की जिम्मेदारी को सुलझा रहा हूँ. इसलिए पहले एक प्रेम कहानी को ही पेश करने का विचार किया और उम्मीद है की मैं उसमें अपने ९ और १० वी कक्षा के अजय से मिलकर कुछ लिख पाऊं जो मनोरंजन हो बिना फूहरता के. मुझे पाठक को विशुद्ध पारिवारिक मनोरंजन कहानियाँ पेश करनी है. 

सवाल 21) - इस उपन्यास के विभन्न चरणों की कुछ जानकारी दीजिए।
जवाब : कौवों का हमला को मैं 4 मूल भाग में बांटता हूँ. एक जब मैंने उन्नत को कई रात यही कहानी सुनाई और वो हर बार मजे लेकर सुनता. दूसरा इसको 25 पन्नों में लिखकर टीवी के लेखकों को पढने को दिया और सबको बढ़िया लगा. तीसरा जब मैंने उस 25 पन्ने की कहानी को बढ़ा कर 70 फिर 100 और फिर 145 तक ले गया. इस वक़्त बहुत से किरदार जुड़ गए और उनको भी जीवन देना पडा. आखिरी जब मैंने इसको एडिट करना शुरू किया अपने 3 दोस्तों के साथ पढ़ कर सही करना शुरू किया, किरदारों को छोटे छोटे हरकतों से जीवित करने के काम को मैंने और बढ़ाया, यही मैं अपनी ताकत भी मानता हूँ लेखक के तौर पर की जीवन की सहज और सामान्य घटनाओं को कहानी का हिस्सा बनाने से कहानियाँ सजीव हो जाती हैं . 

सवाल 22) - हिन्दी साहित्य की वर्तमान दशा पर आपके क्या विचार हैं?
जवाब : मैं देख रहा हूँ की नए लेखक लिख रहे हैं और बढ़िया लिख रहे हैं , हिंदी किताबों का दौर इन्टरनेट से लौट आया है पर अभी भी कहानी कहने की विधा को लेकर बहुत सीरियसनेस नहीं है. सफल होने की जल्दी बहुत ज्यादा है पर मजे की बात है की सभी मेहनत कर रहे हैं जो की उज्जवल भविष्य की तरफ इशारा करता है . मार्किट में बहुत निराशा है, लेखक के तरफ से , पाठक के तरफ से और सबसे ज्यादा प्रकाशक के तरफ से. प्रकाशक वाली कमी सबसे बड़ी है, अच्छे प्रकाशकों की मार्किट की समझ बढानी होगी, और मार्किट के हिसाब से कहानियों की किताब का चयन या लेखन करवायें. अभी प्रकाशक लेखन नहीं करवाते और वो अपना पूरा पल्ला लेखक पर झाड कर बैठ जा रहे हैं , कुछ अच्छे हैं उनकी बात शामिल नहीं है, बस मैं उनसे अभी तक नहीं मिल पाया. मैं मनोरंजक साहित्य के विषय में ऐसा पूरे जोर से कह सकता हूँ क्यूँकी अभी भी मुझे कहानियों के कई sub genre पर कोई किताब नहीं दिख रही जो प्रयोग के तौर पर ही सही पर लाना पड़ेगा ! ये इसलिए भी नहीं की वो विदेशों में सफल हैं बल्की हमारा युवा वर्ग जो मनोंरंजक साहित्य पढता है , या हम जिसको पढ़ाना चाहते हैं उसको नयापन मिलेगा और उसकी रूची बढ़ेगी. मैं ऐसी कुछ कहानियों पर काम कर रहा हूँ, उम्मीद है की जल्द ही उनको पढने लायक प्रस्तुत कर पाऊं.

सर अपने क़ीमती वक़्त से हमारे इंटरव्यू के लिए वक़्त देने के लिए आपका बहुत शुक्रिया।  इस इंटरव्यू के माध्यम से हमें आपको और आपके काम के बारे में जानने का मौक़ा मिला। आपके द्वारा दी गई  महत्वपूर्ण जानकारियां लेखकों  और पाठकों के लिए बहुत उपयोगी साबित होंगी।  हम उम्मीद करते हैं भविष्य में भी आप लगातार साहित्य जगत में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते रहेंगे और हम आपके बेहतरीन लेखन से रूबरू होते रहेंगे। हमारी हार्दिक शुभकामनायें

साक्षात्कारकर्ता - मोहित शर्मा 'ज़हन'

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कौओं का हमला की पेपरबैक कॉपी जस्ट किताब वेबसाइट पर उपलब्ध है :
http://www.justkitaab.in/product/kauvon-ka-hamla/

 

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