HIGHLIGHTS

Friday, September 14, 2018

नज़रिया - हिन्दी दिवस

आज हिन्दी जिस बुरे दौर से गुजर रही है हम इस के गवाह भी है और गुनाहगार भी। हिन्दी बोलने और पढने वालो को आज देश में अनपढ गंवार, मीड़िल क्लास या एकदम नीचे दर्ज का समझा जाता है। संसद हो या बडे बडे आयोजन हमारे देश के वो साहित्यकार जिन के कंधो पर हिन्दी की जिम्मेदारी है हिन्दी से विमुख होकर बड़ी शान से अंग्रेजी में अपना सम्बोधन देते है। जिस देश की प्रमुख भाषा हिन्दी हो उस देश में केवल एक ही दिन हिन्दी दिवस मनाने की प्रथा किस ने और क्यो चलाई ? 
 
आज पूरे विश्व में बोली जाने वाली लगभग 7000 भाषाओ मे से लगभग 40 प्रतिशत भाषाए खतरे में में है जिन में हिन्दी भी है। यू तो हम लोग 14 सिंतम्बर को बडे गर्व से साल में एक दिनहिन्दी दिवस मनाते है, देश के बडे बडे साहित्यकार, पत्रकार, कवि, बुद्विजीवी, समाज चिंतक, रचनाकार, समाजसेवी संस्थाए आदि हिन्दी को देश के माथे की बिंदी, अपनी भाषा, अपने पुरखो की भाषा, अपने देश की भाषा, आमजन की भाषा,  कह कहकर गला सूखा लेते है पर साल के 364 दिन इन लोगो को हिन्दी कभी याद नही आती। 2011 की जनसंख्या के अनुसार हमारे देश की जनसंख्या 121 करोड़ को पार कर गई जिन में हिन्दी भाषियो की संख्या करीब सत्तर करोड़ बताई जा रही है। आश्चर्य होता है जिस देश में सत्तर करोड़ लोग हिन्दी भाषी हो वहा हिन्दी का ऐसा हाल। भाषा संवाद का माध्यम है हम जो भाषा चाहे बोले लेकिन हिन्दी जो हमारी राजभाषा है उसका ज़रूर सम्मान करें और हिन्दी बोलने वालो को छोटा न समझे जहां  तक इंग्लिश का सवाल है वो आज के वक़्त की ज़रूरत है। हिन्दी देश की प्रमुख भाषा उसको बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास की ज़रूरत है।  

No comments:

Post a Comment

Join Amazon Prime 30 Days Free Trial