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Monday, September 10, 2018

नज़रिया - नाम बदलने की राजनीति

मशहूर लेखक व नाटककार विलियम शेक्सपियर ने कहा था ''नाम में क्या रखा है'' लेकिन पिछले कुछ वक़्त से हमारे देश के नेताओं को लग रहा जैसे नाम में ही सबकुछ रखा है। सारे ज़रूरी मुद्दों को दरकिनार करके सिर्फ नाम बदलने की होड़ लगी हुई है।  ऐसा लगता है जैसे नाम बदल देना ही हर समस्या का समाधान होता जा रहा है।  पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की मौत के बाद से ही उनकी पार्टी के नेताओं पर जगहों के नाम बदलकर अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखने के जूनून सवार हो गया है।  सड़कों, चौराहों और कई जगहों का नाम बदलने की घोषणा की जा रही है।  उन्हें लगता है की सिर्फ नाम बदल देने से ही पूर्व प्रधानमंत्री को सम्मान दिया जा सकता है।
लखनऊ के हज़रतगंज चौराहे का नाम बदलकर अटल चौराहा किया जा रहा है। हज़रतगंज चौराहे का नाम बेग़म हज़रतमहल के नाम पर रखा गया है।  बेग़म हज़रतमहल जो एक स्वतंत्रता सेनानी थी। बेग़म हज़रतमहल जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अंग्रेज़ों का मुक़ाबला किया जिसके लिए उन्हें विशेष रूप से सम्मान मिलना चाहिए उसके बजाये किसी मृतक को सम्मान देने का नाम पर एक महान स्वतंत्रता सेनानी की याद को मिटाने की कोशिश की जा रही है।

इससे पहले भी उत्तर प्रदेश में  मुग़लसराय रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय कर दिया गया। अब सवाल  ये उठता है की नाम बदलने से उस जगह को और वहां के लोगों को क्या कोई फायदा मिला ? क्या नाम बदलने से स्टेशन पर ट्रैन टाइम पर आने लगी है ? यात्रियों को सभी सुविधायें मिलने लगी हैं ? गुड़गांव का नाम बदलकर गुरुग्राम कर दिया गया क्या नाम बदलने से वहां के लोगों की समस्याएं ख़त्म हो गई ? ज़ाहिर इन सब का एक ही जवाब है नहीं।  सिर्फ नाम बदल देने से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला है।  नाम बदलना सिर्फ एक रणनीति के तहत किया जा रहा है।  ज़रूरी मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए और अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने के लिए जगहों का नाम बदलकर जनता को बहस में उलझा दिया जाता है ताकि जनता सवाल पूछने के बजाये बहस में उलझी रहे।  

पिछले कुछ  सालों में देश में समस्याएं बड़ी हैं।  महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है।  पेट्रोल डीज़ल के रेट लगातार बढ़ते जा रहे हैं।  रुपये में गिरावट जारी है।  सरकार हर मोर्चे पर नाक़ाम साबित हुई है।  इस साल कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव और अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं ऐसे में जनता को महत्वपूर्ण मुद्दों से भटकाने के लिए गैरज़रूरी बहस में उलझाया जा रहा है।  नेताओं को इन सब कामों को छोड़कर देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान देना होगा क्योंकि जनता अब सारा खेल समझ चुकी है अब वो इन सब बातों में नहीं बातों में नहीं उलझने वाली।
''सिफ़र'' 

Nazariya Now

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