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Monday, January 7, 2019

नज़रिया : क़र्ज़माफ़ी और किसानों की समस्याएँ ✍ #सिफ़र

भारत को एक कृषि प्रधान देश माना जाता है लेकिन फिर भी आज देश में किसानों की स्तिथि गंभीर चिंता का विषय है। किसानों की समस्याओं को कभी भी उनके अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा नहीं माना  गया किसानों की समस्याओं को हमेशा एक राजनैतिक मुद्दा ही माना जाता रहा है।  राजनेताओं द्वारा हमेशा से किसानों के मुद्दे पर अपनी राजनैतिक रोटियां ही सेंकी जाती रही हैं।  हर पार्टी किसानों की समस्याओं पर अपना राजनैतिक फ़ायदा  देखते हुए एक दूसरे पर कीचड़ उछलती रहती है।  सत्ता और विपक्ष की राजनैतिक चक्की के दोनों पाटों के बीच हमेशा किसान ही पिसते आये हैं। किसानों की क़र्ज़माफ़ी और आत्महत्या को भी हमेशा एक राजनैतिक मुद्दा ही माना  जाता रहा है, इस मुद्दे पर हर पार्टी का एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप चलता रहा है। चुनाव के वक़्त सभी पार्टियां क़र्ज़माफ़ी को अपने घोषणा पत्र में शामिल करती रही हैं।  

तीन राज्यों में चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस सरकार ने किसानों के कर्जमाफ़ी के आदेश दिए हैं।  अन्य राज्यों में भी क़र्ज़माफ़ी की मांग की जा रही है। सवाल ये उठता है की क्या सिर्फ क़र्ज़माफ़ी ही किसानों की समस्याओं समाधान है ?  जवाब है बिलकुल नहीं, क़र्ज़माफ़ी को एक सिर्फ़ अस्थाई राहत ही माना  जा सकता है ये सम्पूर्ण समाधान नहीं है।  किसानों की और भी कई समस्याएं हैं जिनमें अच्छी क़्वालिटी का बीज वाजिब क़ीमत पर न मिलना, सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली का उपलब्ध न होना, विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक समस्याएं जैसे बाढ़ , सूखा, पाला, अल्पवृष्टि, अतिवृष्टि, आंधी आदि, ट्रांसपोर्ट की समस्या, फसल की सही क़ीमत का न मिल पाना इन सभी समस्याओं पर ध्यान देकर इनका समाधान निकालना  ज़रूरी है।   

मान लीजिये की किसानों का क़र्जमाफ़ कर दिया जाता है और फिर वो खेती के लिए दुबारा क़र्ज़ लेते हैं और अच्छी क़्वालिटी का बीज वाजिब क़ीमत पर नहीं मिल पाता जिसकी वजह से उनकी फसल अच्छी नहीं होती या बिजली की अनुपलब्धता के कारण सिंचाई ठीक से नहीं हो पाती, फसल का सही दाम नहीं मिलने से लागत का निकालना भी मुश्किल हो जाता है, प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल बर्बाद हो जाती है जिसकी वजह से किसान क़र्ज़ की अदायगी नहीं कर पाएंगे अब ऐसी स्थिति में फिर से क़र्ज़माफ़ी की मांग उठेगी यानि असल समस्या वहीं की वहीं रह जाएगी। 

अब सवाल ये उठता है की किसानों की समस्याओं का  सम्पूर्ण समाधान क्या है ? समाधान के लिए हर समस्या की गहराई में उतरकर उस पर ग़ौर करना होगा।  सबसे पहले तो किसानों को अच्छी क़्वालिटी का बीज वाजिब क़ीमत पर उपलब्ध कराना होगा।  कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक शोध को बढ़ाना होगा।  कृषि की वैज्ञानिक तकनीकों खोजना होगा जिससे खेती की लागत में कमी लाई जा सके और किसानों को खेती की नई नई तकनीकों के बारे में ट्रेनिंग देनी होगी ताकि किसानों को ज़्यादा मुनाफ़ा हो सके। किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना होगी।  विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक समस्याएं जैसे बाढ़ , सूखा, पाला, अल्पवृष्टि, अतिवृष्टि, आंधी आदि को रोका तो नहीं जा सकता लेकिन विभिन्न वैज्ञानिक उपायों के द्वारा इन आपदाओं से फसलों को होने वाले नुक़सान को कम किया सकता है साथ ही फसलों के बीमा के लिए सही नीतियां बनाकर ऐसी स्तिथि में किसानों के नुक़सान की भरपाई की जा सकती है।  किसानों के लिए ट्रांसपोर्ट और कोल्ड स्टोरेज की सही व्यवस्था की जानी चाहिए।  फसलों के सही दाम मिले उसके लिए ठोस क़दम उठाने होंगे। 

अगर सभी उपायों पर योजनाबद्ध तरीके से पूरी ईमानदारी से काम किया जाये तो किसानों के लिए खेती को ज़्यादा से ज़्यादा फायदेमंद बनाया जा सकता है जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मज़बूत होगी और फिर भविष्य में क़र्ज़माफ़ी की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी और देश के अन्नदाता को मजबूरन आत्महत्या जैसा क़दम नहीं उठाना पड़ेगा। किसान  सम्मान के साथ अपना जीवन व्यतीत कर सकेंगे और देश के विकास में अपना योगदान भी देते रहेंगे।  


✍ शहाब ख़ान 'सिफ़र'




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