HIGHLIGHTS

Sunday, February 17, 2019

सैनिकों की शहादत और मुआवज़ा #सिफ़र

पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले में CRPF के 40 से ज़्यादा जवान शहीद हुए हैं।  इस हमले ने पुरे देशवासियों को बेचैन कर दिया है।  हर देशवासी जवानों की शहादत पर ग़मज़दा है। कई लोग हमले में शहीद जवानों के परिवार के लिए मुआवज़े की मांग कर रहे हैं, शहीद जवानों और उनके परिवार के लिए हमारे दिल में सम्मान है, 
उनके परिवार को निश्चित रूप से सहायता की जनि चाहिए लेकिन क्या जवानों के परिवार को दी जाने वाली मदद के लिए मुआवज़ा शब्द का प्रयोग सही होगा ? शहीद जवानों के लिए मुआवज़े शब्द का इस्तेमाल करने पर मुझे आपत्ति है।  शहीद जवानों के लिए इस शब्द का इस्तेमाल करना मेरे विचार में उनकी शहादत का अपमान करने जैसा है।  मुझे इस शब्द पर आपत्ति क्यों है ? ये समझने के लिए हम ''मुआवज़ा'' शब्द का मतलब समझते हैं।  मुआवज़ा उस रक़म या मदद को माना जाता है जो किसी को किसी तरह का नुकसान होने पर उसके  नुकसान की भरपाई करने की लिए दी जाती है,  इस रक़म या मदद से उस व्यक्ति के नुकसान को ख़त्म या कम किया जा सकता है।  लेकिन क्या एक सैनिक जो देश के लिए शहीद हो गया है क्या उसके परिवार को सिर्फ़ आर्थिक सहायता देकर उस नुकसान की भरपाई होना मुमकिन है ? बिलकुल नहीं देश के एक जवान के खून की एक-एक बूँद अनमोल है, कुछ आर्थिक मदद तो क्या सारी दुनिया की दौलत मिलाकर  देश पर उसकी शहादत का क़र्ज़ नहीं उतारा जा सकता।  


जब एक जवान शहीद होता है तो देश और प्रत्येक देशवासी उस जवान और उसके परिवार का क़र्ज़दार बन जाता है, और ये क़र्ज़ किसी रक़म या मदद से उतारा नहीं जा सकता है। जो जवान अपने घर परिवार से दूर सिर्फ देश की रक्षा के लिए हर मोर्चे पर पूरी मुस्तैदी के साथ अपना फ़र्ज़ निभा रहा है, जिस जवान की वजह से देश दुश्मनो से सुरक्षित है, वो जवान जिसकी शहादत का क़र्ज़ हर देशवासी पर है उसकी शहादत के लिए मुआवज़ा शब्द का प्रयोग करना बिलकुल गलत है, मुआवज़े की जगह ''सम्मान राशि'' या ऐसी ही किसी सम्मानजनक शब्द का इस्तेमाल करना चाहिए । देश के लिए फ़र्ज़ निभाते हुए शहीद होने वाले जवान के लिए मुआवज़े जैसे शब्द का इस्तेमाल करना निंदनीय है।  सैनिकों और उनके परिवारों के लिए नयी नीति बनानी होगी, सैनिकों की शिकायतों पर ध्यान देकर उनका समाधान निकलना होगा, सैनिकों को को मिलने वाले खाने और अन्य चीज़ों की गुणवत्ता को बढ़ाना होगा।  शहीद हुए सैनिकों के परिवार को सम्मान के साथ विशेष सुविधायें उपलब्ध कराना  होंगी।  सैनिक देश का गौरव हैं उनको और उनके परिवार को सम्मान देना सरकार और देश के हर नागरिक की ज़िम्मेदारी है।



 शहाब ख़ान  ''सिफ़र''

No comments:

Post a Comment