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Wednesday, May 29, 2019

नज़रिया : बिना मज़बूत विपक्ष के आदर्श लोकतंत्र की कल्पना बेमानी है #सिफ़र

2019 के लोकसभा चुनाव सम्पन्न हो चुके हैं।  बीजेपी फिर से एक बार पूर्ण बहुमत से सत्ता में आ गई है। 2014 की तरह इस बार भी संसद में विपक्ष बिखरा हुआ है।  पिछली बार की तरह इस बार भी संसद में कोई भी राजनैतिक पार्टी आधिकारिक विपक्ष की भूमिका में नज़र नहीं आने वाली है। आधिकारिक रूप से संसद में विपक्ष (प्रतिपक्ष) के नेता का दर्जा पाने के लिए लोकसभा की कुल सीटों में 10% सीट होना चाहिए।  लोकसभा में न्यूनतम 55 सीटें हासिल करने पर ही किसी पार्टी को आधिकारिक विपक्ष के नेता का दर्जा मिल सकता है। वर्तमान में बीजेपी के बाद संसद में संख्या के आधार पर कांग्रेस दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है लेकिन उसके पास भी मात्र 52 सांसद है जो विपक्ष के नेता का दर्जा हासिल करने के लिए पर्याप्त नहीं है, जिसके कारण पिछली बार की तरह इस बार भी संसद में नेता प्रतिपक्ष की मौजूदगी नदारद रहेगी। 




विपक्ष का नेता जिसे नेता प्रतिपक्ष भी कहा जाता है। नेता प्रतिपक्ष का पद कैबिनेट मंत्री के दर्जे का होता है। विभिन्न संवैधानिक संस्थान जैसे सीबीआई निदेशक, सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस, सुचना आयुक्त के  साथ अन्य कई पदों पर नियुक्ति में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।  नेता प्रतिपक्ष के न होने की स्थिति में सत्तापक्ष अपनी मर्ज़ी से संवैधानिक संस्थानों के प्रमुख की नियुक्ति करेगा जिसमे वो अपनी सहूलियत के हिसाब से चयन करेगा। संसद में विभिन्न प्रकार की समितियां गठित की जाती हैं उनमे भी नेता प्रतिपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। 

संसद में विपक्ष की भूमिका एक तरह से जनता के प्रतिनिधि के रूप में होती है।  सरकार की गलत नीतियों पर नियंत्रण करने में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।  मज़बूत विपक्ष सरकार को मनमाने ढंग से काम करने पर अंकुश लगाने का काम करता है।  विपक्ष जितना मज़बूत होगा लोकतंत्र उतना ही मज़बूत होगा। अगर विपक्ष कमज़ोर होगा तो सत्तापक्ष मनमाने तरीके से कोई कानून/बिल पारित कर सकता है। संसद में प्रश्नकाल का अपना बहुत महत्त्व होता है जिसमें सांसद सरकार से जनहित से जुड़े सवाल करते है  विपक्ष के कमज़ोर होने पर संसद में प्रश्नकाल का महत्त्व कम हो होगा क्योंकि सत्तापक्ष के सांसद अपनी सरकार से सरकार की गलत नीतियों से जुड़े और महत्वपूर्ण सवाल तो करेंगे नहीं।  लोकतंत्र में सत्ता के साथ विपक्ष का होना भी महत्वपूर्ण है। सत्ता और विपक्ष दो पहिये की तरह हैं अगर एक पहिया कमज़ोर होगा तो बैलेंस ख़राब होगा। जिस लोकतंत्र में विपक्ष की स्थिति कमज़ोर होगी उस लोकतंत्र को एक मज़बूत और आदर्श लोकतंत्र नहीं माना जा सकता । बिना मज़बूत विपक्ष के आदर्श लोकतंत्र की कल्पना बेमानी है। 

शहाब ख़ान ''सिफ़र''







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